कला एक ऐसी चीज है जिसमें हर इंसान के पास सफलता की अपनी परिभाषा होती है. फिर इसकाएक दूसरा पहलू भी होता है जिसमें ये परिभाषा जनता लिखती है. ये किसी को समझ नहींआता. बस हो जाता है. एक कलाकार के लिये दोनों में से कोई एक चीज जरूरी होती है.जिंदा रहने के लिये. और काम करने के लिये. मालविका हरिओम एक ऐसी ही शख्सियत हैं.जिन्हें खुद नहीं मालूम था कि वो एक कलाकार बन सकती हैं. शादी के बाद ये पता चला औरफिर उसी हिसाब से इन्होंने अपनी सफलता की परिभाषा बना ली. जिसमें कला के प्रतिप्यार है, लालच नहीं. पर एक चीज और अच्छी हुई इनके साथ. जनता ने भी अपना प्यारदिया. जो लोग कलाप्रेमी हैं और आपाधापी में नहीं हैं, उनके लिये इनका करियर एकमिसाल हो सकता है. पेश है लल्लनटॉप के साथ हुआ उनका इंटरव्यू: - ऋषभ --------------------------------------------------------------------------------1. मालविका हरिओम बड़ा रिदम वाला नाम लग रहा है. आपने ये नाम कहां से लिया था?मालविका मेरा नाम था और बड़ा खाली-खाली सा लगता था. तो मैंने पति का नाम 'हरिओम' लेलिया और अपनी चॉइस से लिया था. https://www.youtube.com/watch?v=8-nZ2AwBLqw2. आपके करियर में आपके पति का क्या रोल था?हम दोनों जेएनयू में साथ पढ़ते थे और हमारे शौक मिलते-जुलते थे. ईमानदारी से कहूंतो पहले मुझे मौका नहीं मिला था, लेकिन बाद में जब मुझे मौका मिला तो मेरे पति नेमेरा बहुत सपोर्ट किया.3. आप हाउसवाइफ होते हुए अचानक दूरदर्शन पर कैसे आ गईं?मैं आकाशवाणी की अप्रूव्ड आर्टिस्ट थी. आकाशवाणी के ऑफिस में और यूट्यूब परदूरदर्शन वालों ने मेरे गाने सुने थे. 'बोल यूपी' के नाम से उनका कार्यक्रम आता था.फोक सिंगिंग के लिए दूरदर्शन वालों ने उस कार्यक्रम में मुझे बुला लिया. फिरउन्होंने मुझसे गजलें गाने के लिए कहा. उनका एक नया प्रोग्राम आ रहा है गजलों केलिए. मैं उसके लिए तैयारी कर रही हूं. गजलें लिख भी रही हूं.4. आपकी गायकी एक नई विधा है. हम देखते हैं कि आप अपना काम करने और घर संभालने केसाथ-साथ गा भी रही हैं. लेकिन आपके अंदर सफलता के लिए गलाकाट प्रतिस्पर्धा वालाएटिट्यूड नहीं दिखता है.मैं अपने सारे काम करती हूं. बच्चों को स्कूल ले जाना-लाना, कोचिंग ले जाना, किचनके सारे काम करना. ये सब मैं खुद ही करती हूं और बड़ी तसल्ली से करती हूं. वैसेमुझे जब भी मौका मिला तो मैंने गुरुओं से भी सिंगिंग सीखने की पूरी कोशिश की. मुझेउनसे थोड़ा-थोड़ा ही मिला, लेकिन वो मेरे लिए बहुत था.https://www.youtube.com/watch?v=9nqECE2iGdg5. आज-कल वुमन इम्पॉवरमेंट पर 'पिंक' और 'निल बटे सन्नाटा' जैसी फिल्में आ रही हैं,'नो ब्रा डे' भी मनाया जा रहा है. एक कलाकार की हैसियत से आप खुद को इन सारी चीजोंसे अलग मानती हैं या इस बारे में कुछ सोचती हैं?इसमें मेरी दो बातें हैं. एक सामाजिक और दूसरी व्यक्तिगत. सामाजिक बात ये कि हमारेसमाज में ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिन्हें एजुकेशन से महरूम रहना पड़ा. ऐसे में उनलोगों के लिए इन फिल्मों का कोई बहुत मतलब नहीं है. हम लोग गाने (फोक सिंगिंग) केमाध्यम से इन सारी बातों को उन्हें समझा सकते हैं. आप देखेंगे कि समाज के नियमों औरपितृसत्ता को स्थापित करने में फोक सिंगिंग का बड़ा हाथ रहा है. तो इसकी मदद से हमनई चीजें भी स्थापित कर सकते हैं. व्यक्तिगत तौर पर मैं बताना चाहूंगी कि ऑफिशियलकाम के चलते हमें एक साल यूरोप में रहने का मौका मिला था. हम हॉलैंड में थे. वहांमेरी बेटियां बिना फोन के घूमने निकल जाती थीं. शुरू में थोड़ी फिक्र रहती थी परदो-तीन महीने में ऐसा हो गया था कि हमें किसी चीज का डर नहीं रह गया था. यहां आनेके बाद मेरी बेटियों को अडजस्ट करने में बहुत परेशानी हुई. यहां कपड़ों से लेकरचलने के तरीके पर भी लोग बड़ी जल्दी निगाहें टेढ़ी कर लेते हैं. वहां कोई किसी कोनजर उठाकर नहीं देखता था, लेकिन यहां हम हर किसी की नजर के पहरे में रहते हैं. बेशकहमारा देश हमें प्यारा है, लेकिन हमें इन चीजों को बदलने की बहुत जरूरत है.6. उड़ी हमले और सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर हमारे देशमें बड़ा खराब माहौल बन गया था. आप खुद एक कलाकार हैं और एक आईएएस की पत्नी हैं.ऐसे में आप इन चीजों को किस तरह देखती हैं?जैसा मैंने कहा कि हमें हमारा देश बहुत प्यारा है, लेकिन कलाकारों की कौम एक अलगकौम होती है. इसका किसी देश या धर्म से कोई लेना-देना नहीं होता है. मुझे याद है किलखनऊ के एक कार्यक्रम में मुझे गुलाम अली साहब के ठीक बाद गाने का मौका मिला था औरइससे मुझे जो खुशी मिली थी, उसे मैं बयां नहीं कर सकती. मेरी नजर में कला औरकलाकारों को राजनीति से अलग रखकर देखना चाहिए.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:दिव्य प्रकाश दुबे का इंटरव्यू: 'कोई हिंदी का चेतन भगत बोलता है तो गाली लगती है'संजय मिश्रा का INTERVIEW: 'इस सूरज ने तुम्हें पैदा होते देखा है और मरते भीदेखेगा'