दुनिया के सभी गधों के लिए.-------------------------------------------------------------------------------- 'गधा' शब्द सुनते ही दिमाग में सीधे एक ही चीज़ आती है: बेवकूफी. गधा मतलब कोईबेदिमाग प्राणी, जो सोचता-समझता कम हो. काम करना, खाना और सो जाना. बस गधे के यहीतीन काम हैं.गधा उल्टा जवाब नहीं देता. चाहे मारो, चाहे पीटो. लेकिन ढीठ गधा हिलेगा नहीं.लगभग सभी भाषाओं में गधों के ऊपर कहावतें हैं.कहने से कभी कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ताऐसे गए जैसे गधे के सिर से सींग.बटेउ की तरह कमाओ, गधे की तरह खाओ.जब खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान.तू तो गधी कुम्हार की, तुझे राम से क्या काम.याद है, ओमकारा पिच्चर में सैफ अली खान बोलता है, 'सही कह रिया है तू रज्जो, तेरीऔर मेरी किस्मत गधे के लिंग से लिखी गई है.' मुंशी प्रेमचंद ने 'दो बैलों की कथा' में गधे की तारीफ़ की है. मुंशी जी कहते हैं किशरीफ समझी जाने वाली गाय जब ब्याही होती है तो शेरनी बन जाती है. कुत्ता जितनावफादार होता है उतना ही गुस्सा भी करता है. लेकिन गधा है एकदम सीधा, शरीफ. उसको नलालच है, न गुस्सा है, न सुख-दुःख की चिंता. हर सिचुएशन में एक जैसा रहता है. ऐसेगुण तो ऋषि-मुनियों के पास होते हैं. और कमाल की बात है कि ऋषि-मुनियों के गुण रखनेवाले इस जानवर को बेवकूफ कहा दिया गया. गधे को बेवकूफ कहना तो इन सद्गुणों कीबेइज्जती करने जैसा है.Source : Reutersगधे ने हर भाषा, हर कल्चर में अपनी अटेंडेंस लगवाई है. लोदी वंश, जो दिल्ली सल्तनतपर शासन करने वाले वंशों में से एक था. इस वंश के संस्थापक बहलोल लोदी के पिताजीगधों के ही व्यापारी थे. 'अज्ञेय' ने भी अपनी कविताओं में गधों की चर्चा की है.मुल्ला नसीरुद्दीन ने कितने ही बड़े पद पाए, लेकिन सवारी उन्होंने सिर्फ गधे की हीकी. स्कॉटिश लेखक रॉबर्ट लुइ स्टीवेंसन ने एक गधे पर बैठकर पूरा यूरोप घूमा. फेमसफोटोग्राफर रघु राय की पहली तस्वीर एक गधे की थी. कृश्न चन्दर ने तो गधे के ऊपर एककिताब लिखी थी एक गधे की आत्म कथा.इसीलिए गधों के बारे में डिटेल में बात होनी चाहिए. बात होनी चाहिए उनके पेशेंस की,उनकी मेहनत की, उनकी शांतिप्रिय नेचर की. गधा, जो इंसानों से भी समझदार है, उसे हमबेवकूफ क्यों कहते हैं? गधों की 'समझदारी' जानना जरूरी है. इसलिए सबसे पहले हम गधोंके बारे में मोटा-मोटी जान लें.1. गधा पांच हजार सालों से इंसानों के लिए बोझा ढो रहा है.--------------------------------------------------------------------------------2. दुनिया में करीब चार करोड़ गधे हैं.--------------------------------------------------------------------------------3. गधों की लगभग 189 नस्लें हैं. (द डोमेस्टिक एनिमल डाइवर्सिटी इनफॉर्मेशन सिस्टमके सर्वे के हिसाब से )--------------------------------------------------------------------------------4. सबसे ज्यादा गधे चाइना में हैं.--------------------------------------------------------------------------------5. गधों की मेमोरी बड़ी तेज होती है. वो जिस रास्ते को एक बार देख लें, उसे पच्चीससाल तक नहीं भूलते.--------------------------------------------------------------------------------6. एक गधा चालीस से पचास साल तक जिन्दा रहता है.--------------------------------------------------------------------------------7. नर्वस घोड़ों को गधों के साथ रखा जाता है, क्योंकि गधों के पास "यो ब्रो, चिल्ल "का एक इफेक्ट होता है जिससे घोड़े शांत हो जाते हैं.--------------------------------------------------------------------------------8. वैसे तो गधों को अकेले रहना पसंद नहीं है, लेकिन एक 'सिंगल' गधा बकरियों के बीचरहकर बड़ा खुश होता है.--------------------------------------------------------------------------------9. गधी का दूध बीमार बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. गधी के दूध में गाय केदूध से ज्यादा प्रोटीन और शुगर होता है. लेकिन फैट कम.--------------------------------------------------------------------------------10. ब्रिटेन में 2005 के बाद से ट्रैवलिंग गधों के लिए भी पासपोर्ट जरूरी कर दियागया.-------------------------------------------------------------------------------- ये थे कुछ फैक्ट्स, लेकिन गधे के बारे में दुनियाभर में क्या है, वो भी पढ़िए:गधों पर चली बहसएक यूनिवर्सिटी में दो दिन की कॉन्फ्रेस चली. कॉन्फ्रेंस का टॉपिक था: सदियों सेचली आ रही गधों और खच्चरों को बुरे तरीके से दिखाना. गधों के बारे में फैलाई गई गलतबातें. कांफ्रेंस में गधों के हितों पर चर्चाएं हुई. कहा गया कि गधों की कोई अलगआइडेंटिटी नहीं बताई जाती. हमेशा घोड़ों से तुलना करके गधे को नीचा दिखाने कीसाजिशें की गई हैं. जबकि घोड़ा, घोड़े की जगह है. और गधा अपनी जगह.वेस्टर्न साहित्य के फेमस गधेहिंदी कवियों ने तो गधे पर लिखा है ही, पर वेस्टर्न सोसाइटीज भी पीछे नहीं हैं.बाइबिल में सौ बार गधों का नाम मेंशन है. एक स्टोरी है जिसमें जीसस क्राइस्ट गधे परबैठ कर जेरुसालेम पहुंचते हैं. जेरुसालेम क्रिस्चियन लोगों की एक धार्मिक जगह हैजिसे भगवान की धरती कहते हैं. गधे को शांति, बुद्धिमानी का प्रतीक माना गया. विलियमवर्ड्सवर्थ ने भी अपनी कविता पीटर बेल में गधे को क्रिस्चियन सिंबल बताया है. नमालूम हो तो बता दें कि विन्नी द पूह का ईयोर नाम का गधा वेस्टर्न लिटरेचर का सबसेफेमस गधा है. जॉर्ज ओरवेल की किताब "एनिमल फार्म" में बेंजामिन द डोंकी नाम का एकपात्र लिया है. इटैलियन की सबसे शानदार किताबों में से एक 'डॉन क्विहोते' में भीगधे की एक बड़ी भूमिका रही है.राजनीति में डेमोक्रेसी का सिंबल बना गधाग्रीस में गधों को गॉड ऑफ वाइन से रिलेट किया जाता था. रोम में गधे को एक धार्मिकजानवर माना गया. 1828 में अमेरिका के एंड्रू जैक्सन ने अपने कैम्पेन में गधेप्रेसिडेंशियल पोस्टर्स के लिए चुना. और गधा बना डेमोक्रेसी की पहचान . गधों से हीदुनिया के बहुत सारे हिस्सों में लोगों की जिंदगी चली. गधे रोटी-पानी, कपड़ेपहुंचाने का काम करते रहें हैं. 'सिल्क रोड ' के साथ-साथ पेसिफिक ओशन से सिल्क गधोंपर लाद कर लाया गया.Source: Reutersगधे से सीखो ढीठ बननागधों के ढीठ होने के स्टीरियोटाइप के बारे में एक्सपर्ट्स का कुछ और ही कहना है.जिस चीज़ को हम ढीठपना कहते हैं वो असल में गधों के लिए आत्मसुरक्षा हैं. गधे पहलेचीज़ को ध्यान से देखते हैं, समझते हैं, फैसला लेते हैं. अगर उनका फैसला इंसान सेअलग हो जाए तो इंसान अपनी ओपिनियन गधों पर थोप देता है. लेकिन अगर एक बार उनको अपनेमालिक पर ट्रस्ट हो जाए तो सबसे ज्यादा सपोर्ट दिखाते हैं. गधे अपनी मर्ज़ी का बड़ासम्मान करते हैं. काम में इंटरेस्ट न हो तो वो ढीठ बनना पसंद करते हैं. गधों की यहयूनीक चीज़ इंसानों को सीखनी चाहिए. जब मन ना हो तो इंजिनियरिंग नहीं करना चाहिए.गधे मेहनत करना सिखाते हैं. गधे अपनी मर्ज़ी की इज्ज़त कैसे करनी चाहिए सिखाते हैं.गधे ढीठ बनना सिखाते हैं. गधे बेवकूफी नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का एक तरीका सिखातेहैं.