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नर्वसाते बहुत हैं? कॉन्फिडेंस कम है? किसी गधे का साथ कर लो

गधे के फायदे बहुत हैं, सदा राखिए संग.

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15 अक्तूबर 2016 (अपडेटेड: 16 अक्तूबर 2016, 07:31 AM IST)
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दुनिया के सभी गधों के लिए.


 
'गधा' शब्द सुनते ही दिमाग में सीधे एक ही चीज़ आती है: बेवकूफी. गधा मतलब कोई बेदिमाग प्राणी, जो सोचता-समझता कम हो. काम करना, खाना और सो जाना. बस गधे के यही तीन काम हैं.
गधा उल्टा जवाब नहीं देता. चाहे मारो, चाहे पीटो. लेकिन ढीठ गधा हिलेगा नहीं.
लगभग सभी भाषाओं में गधों के ऊपर कहावतें हैं.
कहने से कभी कुम्हार गधे पर नहीं चढ़ता
ऐसे गए जैसे गधे के सिर से सींग.
बटेउ की तरह कमाओ, गधे की तरह खाओ.
जब खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान.
तू तो गधी कुम्हार की, तुझे राम से क्या काम.
याद है, ओमकारा पिच्चर में सैफ अली खान बोलता है, 'सही कह रिया है तू रज्जो, तेरी और मेरी किस्मत गधे के लिंग से लिखी गई है.' 
मुंशी प्रेमचंद ने 'दो बैलों की कथा' में गधे की तारीफ़ की है. मुंशी जी कहते हैं कि शरीफ समझी जाने वाली गाय जब ब्याही होती है तो शेरनी बन जाती है. कुत्ता जितना वफादार होता है उतना ही गुस्सा भी करता है. लेकिन गधा है एकदम सीधा, शरीफ. उसको न लालच है, न गुस्सा है, न सुख-दुःख की चिंता. हर सिचुएशन में एक जैसा रहता है. ऐसे गुण तो ऋषि-मुनियों के पास होते हैं. और कमाल की बात है कि ऋषि-मुनियों के गुण रखने वाले इस जानवर को बेवकूफ कहा दिया गया. गधे को बेवकूफ कहना तो इन सद्गुणों की बेइज्जती करने जैसा है.
Source : Reuters
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गधे ने हर भाषा, हर कल्चर में अपनी अटेंडेंस लगवाई है. लोदी वंश, जो दिल्ली सल्तनत पर शासन करने वाले वंशों में से एक था. इस वंश के संस्थापक बहलोल लोदी के पिताजी गधों के ही व्यापारी थे. 'अज्ञेय' ने भी अपनी कविताओं में गधों की चर्चा की है. मुल्ला नसीरुद्दीन ने कितने ही बड़े पद पाए, लेकिन सवारी उन्होंने सिर्फ गधे की ही की. स्कॉटिश लेखक रॉबर्ट लुइ स्टीवेंसन ने एक गधे पर बैठकर पूरा यूरोप घूमा. फेमस फोटोग्राफर रघु राय की पहली तस्वीर एक गधे की थी. कृश्न चन्दर ने तो गधे के ऊपर एक किताब लिखी थी एक गधे की आत्म कथा.
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इसीलिए गधों के बारे में डिटेल में बात होनी चाहिए. बात होनी चाहिए उनके पेशेंस की, उनकी मेहनत की, उनकी शांतिप्रिय नेचर की. गधा, जो इंसानों से भी समझदार है, उसे हम बेवकूफ क्यों कहते हैं? गधों की 'समझदारी' जानना जरूरी है. इसलिए सबसे पहले हम गधों के बारे में मोटा-मोटी जान लें.

1. गधा पांच हजार सालों से इंसानों के लिए बोझा ढो रहा है.



2. दुनिया में करीब चार करोड़ गधे हैं.



3. गधों की लगभग 189 नस्लें हैं. (द डोमेस्टिक एनिमल डाइवर्सिटी इनफॉर्मेशन सिस्टम के सर्वे के हिसाब से )



4. सबसे ज्यादा गधे चाइना में हैं.



5. गधों की मेमोरी बड़ी तेज होती है. वो जिस रास्ते को एक बार देख लें, उसे पच्चीस साल तक नहीं भूलते.



6. एक गधा चालीस से पचास साल तक जिन्दा रहता है.



7. नर्वस घोड़ों को गधों के साथ रखा जाता है, क्योंकि गधों के पास "यो ब्रो, चिल्ल " का एक इफेक्ट होता है जिससे घोड़े शांत हो जाते हैं.



8. वैसे तो गधों को अकेले रहना पसंद नहीं है, लेकिन एक 'सिंगल' गधा बकरियों के बीच रहकर बड़ा खुश होता है.



9. गधी का दूध बीमार बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. गधी के दूध में गाय के दूध से ज्यादा प्रोटीन और शुगर होता है. लेकिन फैट कम.



10. ब्रिटेन में 2005 के बाद से ट्रैवलिंग गधों के लिए भी पासपोर्ट जरूरी कर दिया गया.




 
ये थे कुछ फैक्ट्स, लेकिन गधे के बारे में दुनियाभर में क्या है, वो भी पढ़िए:

गधों पर चली बहस

एक यूनिवर्सिटी में दो दिन की कॉन्फ्रेस चली. कॉन्फ्रेंस का टॉपिक था: सदियों से चली आ रही गधों और खच्चरों को बुरे तरीके से दिखाना. गधों के बारे में फैलाई गई गलत बातें. कांफ्रेंस में गधों के हितों पर चर्चाएं हुई. कहा गया कि गधों की कोई अलग आइडेंटिटी नहीं बताई जाती. हमेशा घोड़ों से तुलना करके गधे को नीचा दिखाने की साजिशें की गई हैं. जबकि घोड़ा, घोड़े की जगह है. और गधा अपनी जगह.funny-donkey-kiss

वेस्टर्न साहित्य के फेमस गधे

हिंदी कवियों ने तो गधे पर लिखा है ही, पर वेस्टर्न सोसाइटीज भी पीछे नहीं हैं. बाइबिल में सौ बार गधों का नाम मेंशन है. एक स्टोरी है जिसमें जीसस क्राइस्ट गधे पर बैठ कर जेरुसालेम पहुंचते हैं. जेरुसालेम क्रिस्चियन लोगों की एक धार्मिक जगह है जिसे भगवान की धरती कहते हैं. गधे को शांति, बुद्धिमानी का प्रतीक माना गया. विलियम वर्ड्सवर्थ ने भी अपनी कविता पीटर बेल में गधे को क्रिस्चियन सिंबल बताया है. न मालूम हो तो बता दें कि विन्नी द पूह का ईयोर नाम का गधा वेस्टर्न लिटरेचर का सबसे फेमस गधा है. जॉर्ज ओरवेल की किताब "एनिमल फार्म" में बेंजामिन द डोंकी नाम का एक पात्र लिया है. इटैलियन की सबसे शानदार किताबों में से एक 'डॉन क्विहोते' में भी गधे की एक बड़ी भूमिका रही है.

राजनीति में डेमोक्रेसी का सिंबल बना गधा

ग्रीस में गधों को गॉड ऑफ वाइन से रिलेट किया जाता था. रोम में गधे को एक धार्मिक जानवर माना गया. 1828 में अमेरिका के एंड्रू जैक्सन ने अपने कैम्पेन में गधे प्रेसिडेंशियल पोस्टर्स के लिए चुना.  और गधा बना डेमोक्रेसी की पहचान . गधों से ही दुनिया के बहुत सारे हिस्सों में लोगों की जिंदगी चली. गधे रोटी-पानी, कपड़े पहुंचाने का काम करते रहें हैं. 'सिल्क रोड ' के साथ-साथ पेसिफिक ओशन से सिल्क गधों पर लाद कर लाया गया.
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Source: Reuters

गधे से सीखो ढीठ बनना

गधों के ढीठ होने के स्टीरियोटाइप के बारे में एक्सपर्ट्स का कुछ और ही कहना है. जिस चीज़ को हम ढीठपना कहते हैं वो असल में गधों के लिए आत्मसुरक्षा हैं. गधे पहले चीज़ को ध्यान से देखते हैं, समझते हैं, फैसला लेते हैं. अगर उनका फैसला इंसान से अलग हो जाए तो इंसान अपनी ओपिनियन गधों पर थोप देता है. लेकिन अगर एक बार उनको अपने मालिक पर ट्रस्ट हो जाए तो सबसे ज्यादा सपोर्ट दिखाते हैं. गधे अपनी मर्ज़ी का बड़ा सम्मान करते हैं. काम में इंटरेस्ट न  हो तो वो ढीठ बनना पसंद करते हैं. गधों की यह यूनीक चीज़ इंसानों को सीखनी चाहिए. जब मन ना हो तो इंजिनियरिंग नहीं करना चाहिए. hqdefault

गधे मेहनत करना सिखाते हैं. गधे अपनी मर्ज़ी की इज्ज़त कैसे करनी चाहिए सिखाते हैं. गधे ढीठ बनना सिखाते हैं. गधे बेवकूफी नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का एक तरीका सिखाते हैं.
 

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