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किसान का बेटा बना करोड़पति, धोनी को कंपनी का अंबेसडर बनाया, फिर कंपनी डूब गई

धोखाधड़ी के इल्जाम में जेल भेजे गए बिल्डर अनिल शर्मा की दास्तान...

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1 मार्च 2019 (अपडेटेड: 1 मार्च 2019, 10:46 AM IST)
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साल, 2002 में अनिल शर्मा बिहार से दिल्ली आ गए. यहां 2003 में उन्होंने पहले रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली का गठन किया. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
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एक किसान का बेटा. बिहार का रहने वाला. पापा ने ठाना कि लड़के इंजीनियर बनाना है. लड़का बना इंजीनियर. एनआईटी और आईआईटी जैसे संस्थानों से पढ़ाई की. सरकारी नौकरियां कीं. पैसा तो नहीं पर संबंध कमाए. फिर मन ऊबा तो नौकरी छोड़ अपना कारोबार करने की ठानी. दिल्ली आया. बिल्डर बन गया. नौकरी में बने संबंधों को भुनाया. खूब तरक्की की. देखते-देखते कंपनी देश की बड़ी बिल्डिंग कंपनी बन गई. इत्ती बड़ी कि एमएस धोनी उसके अंबेसडर बने. कंपनी का नाम आपने जरूर सुना होगा. आम्रपाली. और इस कंपनी के मालिक हैं अनिल शर्मा. पर शर्मा का इस समय बुरा वक्त चल रहा है. वो जेल में हैं. आपको सुनाते हैं उनकी पूरी कहानी.
अनिल शर्मा की कंपनी आम्रपाली ग्रुप पर आरोप है कि उसने फ्लैट देने के नाम पर करोड़ों रुपए वसूले. वो भी एक दो नहीं, 42 हजार खरीदारों से. मगर उनको फ्लैट नहीं दिए गए. आरोप है कि आम्रपाली समूह के चेयरमैन अनिल शर्मा ने खरीदारों के पैसे दूसरी जगहों पर लगा दिए. करोड़ों की निजी प्रॉपर्टी बनाई. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अनिल शर्मा की साउथ दिल्ली में एक कोठी है. अकेले इसी की कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है. इसमें अनिल शर्मा की बेटी और दामाद रहते हैं. नोएडा के सेक्टर 27 के ए ब्लॉक में एक मकान है. इसकी कीमत भी करीब 7 करोड़ रुपए है. ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रुप के सबसे लग्जरी प्रॉजेक्ट में अनिल शर्मा और शिव प्रिया के एक-एक फ्लैट हैं. इनकी कीमत भी 8 से 10 करोड़ रुपए है.
इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की इजाजत पर दिल्ली पुलिस ने अनिल शर्मा को 28 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया. उनके साथ कंपनी के दो डायरेक्टर शिवप्रिया और अजय कुमार को भी अरेस्ट कर लिया गया है. अदालत ने इनकी निजी प्रॉपर्टी भी जब्त करने का आदेश दिया है. पर ये कोर्ट-कचहरी की कहानी बहुत पुरानी है. ये तीनों बीते पांच महीने से नोएडा पुलिस की निगरानी में थे. उन्हें बीते साल 10 अक्टूबर से नोएडा के सेक्टर-62 के एक होटल में रखा गया था. 28 फरवरी को नोएडा पुलिस ही उनको लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. कोर्ट की सुनवाई के बाद पुलिस ने तीनों को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया. आम्रपाली के खिलाफ नोएडा में दो दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं. अकेले बिसरख थाने में 13 एफआईआर हैं.
कई अहम खुलासे हुए सुप्रीम कोर्ट में
इससे पहले 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. सुप्रीम कोर्ट में अदालत की तरफ से नियुक्त किए गए ऑडिटर्स ने बताया कि आम्रपाली ग्रुप ने करीब 550 लग्जरी फ्लैट 1 रुपए, 5 रुपए और 11 रुपए प्रति स्क्वायर फीट की दर से बेचे हैं. ग्रुप के चेयरमैन अनिल शर्मा ने 23 फर्जी कंपनियां बना रखी थीं. इन कंपनियों में ड्राइवर, चपरासी और ऑफिस के प्यून तक डायरेक्टर हैं. अनिल शर्मा और उनकी कंपनी पर 3000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है.
राजनीति में आने के साथ ही अनिल शर्मा के दिन बिगड़ने लगे. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
राजनीति में आने के साथ ही अनिल शर्मा के दिन बिगड़ने लगे. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

अनिल शर्मा की शुरुआत
अनिल शर्मा की कहानी बड़ी दिलचस्प है. वह बिहार के पटना से कोई 50 किलोमीटर दूर पंडारक में एक किसान परिवार में पैदा हुए. एक पत्रिका इंडिया अंपायर को दिए इंटरव्यू में अनिल शर्मा ने बताया कि उनके पिता मदन मोहन शर्मा एक साधारण किसान थे. गांव के सरकारी स्कूल में ही उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई हुई. आगे की पढ़ाई उन्होंने पटना के साइंस कॉलेज से की. पिताजी सिविल इंजीनियर बनाना चाहते थे. इसलिए फिर पूरा जोर इसी पर दिया जाने लगा. बीटेक की पढ़ाई के लिए अनिल को उड़ीसा के कालीकट के एनआईटी भेज दिया गया. वहां से बीटेक करने के बाद आईआईटी से एमटेक के लिए तैयारी की. आईआईटी में नंबर आ गया तो खड़गपुर (कोलकाता) से एमटेक करने लगे. इसके बाद पटना लौट आए. यहां एलएलबी और एमबीए किया.
सरकारी इंजीनियर की थी पहली नौकरी
एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक अनिल शर्मा ने पहली नौकरी बिहार सरकार के नगर विकास और आवास विभाग में सहायक इंजीनियर के तौर पर शुरू की. वे 1984-85 तक हाजीपुर नगर पालिका के कार्यकारी अधिकारी रहे. उस वक्त तक अनिल शर्मा के पास कोई वाहन नहीं था. एक स्थानीय कांग्रेस नेता जगन्नाथ राय ने उनको अपनी कार चलाने के लिए दे रखी थी. इस बीच अनिल शर्मा को एनटीपीसी यानी नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन में नौकरी मिल गई. फिर एनपीसीसी यानी नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन में नौकरी मिली. मगर अनिल शर्मा के जेहन में बड़ा सपना तैर रहा था. उन्होंने एक बार फिर नौकरी छोड़ दी. पर अब तक अनिल शर्मा संपर्कों और संबंधों के धनी हो चुके थे. उनके बिहार से जुड़े तमाम नौकरशाहों से करीबी रिश्ते हो चुके थे. और इन्हीं संपर्कों के बल पर उन्होंने रियल एस्टेट में बड़ा हाथ आजमाने का फैसला किया. और इसके लिए अनिल दिल्ली आ गए.
दिल्ली आकर खेला बड़ा दांव
साल 2002 में अनिल शर्मा दिल्ली आए. यहां 2003 में उन्होंने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली का गठन किया. आम्रपाली का नाम एक ऐतिहासिक कैरेक्टर के नाम पर लिया गया. ग्रुप ने नोएडा में एक्जॉटिका नाम से पहला मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट लॉन्च किया. इस प्रोजेक्ट में अनिल शर्मा ने 107 फ्लैट बनाए. इंडिया अंपायर पत्रिका के मुताबिक अनिल शर्मा ने ये प्रोजेक्ट सिर्फ 2 साल में पूरा कर लिया. उस उक्त नोएडा के दूसरे प्रोजेक्ट्स को बहुत ज्यादा रिस्पांस नहीं मिल रहा था. लेकिन आम्रपाली के प्रोजेक्ट एक्जॉटिका को लोगों ने हाथों हाथ लिया. इस तरह आम्रपाली ग्रुप की नोएडा में शानदार शुरुआत हुई. और फिर अनिल शर्मा ने एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट लॉन्च किए.
धीरे-धीरे अनिल शर्मा आम्रपाली ग्रुप का नाम बनाने में सफल रहे. उन्होंने देश भर के कई शहरों में मेगा प्रोजेक्ट शुरू किए. सस्ते से लेकर लग्जरी तक हर तरह के फ्लैट बेचे. अब ग्रुप इतना बड़ा हो गया कि कोई भी दूसरी कंपनी आम्रपाली में पैसा लगाने को तैयार हो जाती थी. इसी दौर में अनिल शर्मा ने क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को अपना ब्रैंड अंबेसडर बनाया. इससे कंपनी पर लोगों का भरोसा और बढ़ने लगा. देखते-देखते आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर से बाहर बिहार, ओडिशा, एमपी, केरल, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी दिखने लगे. इस दौरान अनिल शर्मा ने कई दूसरे प्रोजेक्ट एक्वायर भी किए.
भारतीय टीम के तब के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आम्रपाली समूह ने अपना ब्रैंड अंबेस्डर बनाया था. फाइल फोटो.
भारतीय टीम के तब के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को आम्रपाली समूह ने अपना ब्रैंड अंबेसडर बनाया था. फाइल फोटो.

साबुन तेल से लेकर फिल्में तक बनाईं
अपने अच्छे दौर में अनिल शर्मा ने दूसरे बिजनेस में भी हाथ आजमाए. अनिल शर्मा ने आम्रपाली मीडिया विजन नाम से एक कंपनी बनाई. इस कंपनी ने दो फिल्में बनाईं. पहली फिल्म गांधी टू हिटलर और दूसरी आई डोंट लव यू नाम. इस कंपनी की सीईओ अनिल शर्मा की पत्नी पल्लवी मिश्रा थीं. देखते-देखते कंपनी शिक्षा और होटल के कारोबार में भी आ गई. झारखंड के देवघर में और यूपी के बरेली में अनिल शर्मा ने 2 थ्री स्टार होटल खड़े कर दिए. ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली हॉस्पिटल भी शुरू कर दिया. कंपनी एफएमसीजी यानी घर में रोज इस्तेमाल होने वाले साबुन -मंजन तेल जैसे सामान भी बनाने लगी.
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से प्रभावित
अनिल शर्मा राजनीति में भी आना चाहते थे. खबरें हैं कि साल 2012 में अनिल शर्मा ने राज्यसभा में जाने की कोशिश की. उनको नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के कुछ बागी विधायकों ने समर्थन दिया भी. मगर कामयाबी नहीं मिली. इसके दो साल बाद अनिल शर्मा ने लोकसभा चुनाव में कूदने का ऐलान कर दिया. वे जदयू के प्रत्याशी के तौर पर जहानाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े. मगर तीसरे स्थान पर आए. इंडिया अंपायर को दिए अपने इंटरव्यू में अनिल शर्मा ने कहा कि मैं रियल एस्टेट मुगल डॉनल्ड ट्रंप को अपना गुरु मानता हूं. उनकी तहेदिल से इज्जत करता हूं. मुझे उनसे बहुत प्रेरणा मिलती है. मैं उनसे बहुत कुछ सीखना चाहता हूं. ये वही डॉनल्ड ट्रंप हैं, जो इस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति हैं. राष्ट्रपति बनने से पहले डॉनल्ड रियल एस्टेट की दुनिया के चर्चित कारोबारी थे.
कैसे बिगड़ गए हालात
अपने अच्छे दिनों के दौरान अनिल शर्मा ने बिहार के लखीसराय में आम्रपाली इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से एक कॉलेज खोला. ये कॉलेज बालिका विद्यापीठ के नाम से रजिस्टर्ड जमीन पर चलाया जा रहा था. तभी डील को लेकर बालिका विद्यापीठ के सचिव शरद चंद्र का अनिल शर्मा से विवाद हो गया. शरद चंद्र न्यायालय की शरण में गए. इसी दरम्यान उनकी हत्या कर दी गई. इसमें अनिल शर्मा समेत 7 लोग हत्या के आरोपी बनाए गए. अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता खो चुके अनिल शर्मा इसके बाद तेजी से विवादों में आ गए. हत्या में नामजद अभियुक्त हो गए. इसके चलते लंबे समय तक वह अंडरग्राउंड रहे. राजनीतिक महत्वाकांक्षा और लंबे समय तक रियल एस्टेट के धंधे से बाहर रहने के कारण उनके अधिकांश प्रोजेक्ट लेट हो गए. और स्थिति दिवालिया की हो गई. एक दिन अचानक खबर आई कि आम्रपाली के कई करोड़ के चेक बाउंस हो चुके हैं. फिर ड्रीम वैली प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा खुलासा हुआ. इस प्रोजेक्ट में लोगों से पैसे तो ले लिए गए थे, लेकिन पूरे फ्लैट नहीं बनाए गए. इसी तरह कई प्रोजेक्ट अधर में लटक गए. आज आम्रपाली ग्रुप के करीब 42 हजार फ्लैट्स की डिलीवरी लटकी है.


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