अमेरिका के हर काम की तरह 50 में से 2 राज्यों का चुनाव पर प्रभाव भी अनूठा है.अमेरिका के लोग अपने प्रेसिडेंट को सीधे नहीं चुनते हैं. अमेरिका दुनिया का सबसेपुराना लोकतंत्र है. फिर भी ये होता है. पर इसकी वजह है. बहुत तगड़ी. अमेरिकीसंविधान में इस चुनाव को इस कदर घुमाया गया है कि कोई भी सनकी दिमाग का इंसानअमेरिका का प्रेसिडेंट नहीं बन सकता. ज्यादातर जगहों पर ये होता है कि जनता वोट करदेती है और कैंडिडेट जीत जाता है. कई बार ऐसा होता है कि कुछ ऐसे नेता आ जाते हैंजो जनता को बहका ले जाते हैं बड़ी-बड़ी बातें कर के. जोश और भावना में बहकर जनतावोट दे देती है. लेकिन तुरंत ही पता चल जाता है कि ये कैंडिडेट गलत आ गया.तो अमेरिकी संविधान में इस चीज को बहुत बुद्धिमानी से निपटाया गया है. इसीलिेए आपदेखेंगे कि ज्यादातर अमेरिकी प्रेसिडेंट बेहद मजबूत और अमेरिका के लिए जबरदस्त कामकरनेवाले हुए हैं. कोई-कोई ही ऐसा हुआ है जिसने नाक कटवाई हो. पर वो दूसरों केमामले में होता है, अमेरिका को वो भी नहीं फंसाते. अभी ट्रंप को लेकर लोगों के मनमें दहशत है. पर ऐसा नहीं है कि अमेरिकी जनता सीधा वोट कर के ट्रंप को प्रेसिडेंटबना देगी. अभी मौका है कि ट्रंप हार सकता है.तो 8 नवंबर को कैसे वोट करेंगे अमेरिकी?होता क्या है कि अमेरिकी प्रेसिडेंट इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम से चुना जाता है. येकॉलेज कोई संस्था नहीं है, बल्कि ये वो लोग हैं जिनको नवंबर के पहले सोमवार के बादआनेवाले मंगलवार को जनता वोट कर के चुनती है. इसी चुनाव को प्रेसिडेंशियल इलेक्शनकहा जाता है. इस बार ये 8 नवंबर को है.अमेरिका के 50 राज्यों और वाशिंगटन डी सी (डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया) को मिलाकर कुल538 इलेक्टर चुने जाते हैं. उसके बाद ये लोग वोट करते हैं. 538 में से 270 वोट लानेहोते हैं प्रेसिडेंट बनने के लिए. यहीं पर खेल होता है. जनता के किसी कैंडिडेट कोवोट देने के बावजूद ये लोग किसी और को जिता सकते हैं. हालांकि ज्यादातर मामलों मेंये लोग जनता के मुताबिक ही कैंडिडेट चुनते हैं. पर दो बार ऐसा हुआ है कि इन लोगोंने किसी और को वोट कर दिया है. अगर जनता उत्तेजना में ट्रंप को वोट करती है तो, इसीके सहारे ट्रंप को हराने की आस बची है.अब प्रश्न है कि 538 ही इलेक्टर कैसे होते हैं? अमेरिका में दो सदन हैं. हाउस ऑफरिप्रजेंटेटिव और सीनेट. हाउस में 435 सदस्य हैं और सीनेट में 100. 3 इलेक्टर हैंवाशिंगटन डी सी के. तो कुल 538 इलेक्टर हुए. इसका मतलब ये नहीं है कि हाउस और सीनेटके लोग ही चुनते हैं. जी नहीं. इनसे स्वतंत्र होता है प्रेसिडेंट. यही तो यहां कालोकतंत्र है. प्रेसिडेंशियल सिस्टम. प्रेसिडेंट और हाउस अलग-अलग.अमेरिकी संसद और प्रेसिडेंट का क्या हिसाब-किताब है?अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है. इसमें दो सदन होते हैं. हाउस ऑफरिप्रजेंटेटिव और सीनेट. 50 राज्य हैं. हर राज्य से दो सदस्य यानी कुल 100 सदस्यहोते हैं सीनेट में. हाउस में आबादी के हिसाब से हैं.हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव डिस्ट्रिक्ट के आधार पर होता है. हर डिस्ट्रिक्ट से एक. मतलबहमारे यहां के लोकसभा क्षेत्र की तरह. ये हाउस बिल पेश करने और अफसरों को चुनने केलिए होता है. अगर प्रेसिडेंट के इलेक्शन में कोई 270 वोट नहीं लाता तो ये लोग हीचुनते हैं वोट कर के. इनके पास अधिकार होता है कि ये किसी अफसर को हटा सकें. सिर्फयही हटा सकते हैं. ये लोग प्रेसिडेंट पर इंपीचमेंट का भी केस चला सकते हैं. बिलक्लिंटन पर आरोप लगा था मोनिका लेंविंस्की वाले मामले में.हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (Reuters)सीनेट 6 साल के लिेए होता है. हाउस 2 साल के लिए. सीनेट के सदस्य स्टेट में फेमसहोते हैं. आखिर दो ही सदस्य जाने हैं स्टेट से. हाउस के लोग डिस्ट्रिक्ट से आतेहैं. तो उनकी पॉपुलेरिटी डिस्ट्रिक्ट में ही होती है. दोनों को बनाने का मकसद था.सीनेट किसी मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए है. हाउस जल्दी-जल्दी वाले कामके लिए है. तो दोनों मिल के बैलेंस बनाते हैं.सीनेट के पास एडवाइस और कंसेंट केपॉवर हैं. यही लोग ट्रीटी तय करते हैं किसी भी चीज पर.प्रेसिडेंशियल सिस्टम में प्रेसिडेंट कार्यपालिका होता है. और कांग्रेस विधायिकायानी कानून बनाते हैं. कांग्रेस प्रेसिडेंट को हटा नहीं सकती. सिर्फ गंभीर अपराधोंके लिए ही इंपीच कर सकती है. हमारे पार्लियामेंट्री सिस्टम में विधायिका का ही एकहिस्सा होती है सरकार. हमारे यहां प्रधानमंत्री महत्त्वपूर्ण होते हैं. पर ये संसदके प्रति उत्तरदायी होते हैं. इनके हटाया भी जा सकता है.तो मुद्दे की बात, इलेक्टर्स क्या करते हैं?तो ये इलेक्टर किसी पार्टी के ही ऑफिशियल होते हैं. पर ये केंद्र के या स्टेट केनेता नहीं हो सकते. इसके बारे में यहां के संविधान में दिया हुआ है. तोप्रेसिडेंशियल इलेक्शन हो जाने के बाद जो दूसरा बुधवार आता है, उस दिन ये लोगअपने-अपने स्टेट जा के प्रेसिडेंट के नाम पर वोट करते हैं.फिर मजा आता है नियमों के साथ खेलने का. अगर किसी राज्य के आधे से ज्यादा इलेक्टर्सने किसी को वोट कर दिया तो उस राज्य के सारे इलेक्टर्स को वोट उसी कैंडिडेट को चलाजाएगा. मतलब कैलीफोर्निया के 55 में से 28 ने ट्रंप को वोट कर दिया तो अब सारे 55वोट ट्रंप को ही चले जाएंगे. सिर्फ मैइन और नेब्रास्का राज्यों में ये सिस्टम नहींहै. वहां पर वोट 2-1 के रेशिओ में टूटते हैं.अमेरिका के राज्य कैसे वोट करते हैं? अमेरिका में सारे लोग वोट नहीं करते. 33 करोड़ की आबादी है. पर मात्र 14 करोड़ लोगही वोट करेंगे इस बार. इंडिया में 56 करोड़ लोगों ने वोट किया था. 17 करोड़ लोगोंने तो भाजपा को ही किया था. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिक पार्टी के 247सदस्य हैं. डेमोक्रैट के 188. बाकी दूसरी पार्टियों के पास हैं. तो यहां भी चुनावमें मजा आने वाला है. मेन वोटिंग तो 8 नवंबर को होगी. पर अमेरिका में छूट है.मिनेसोटा पहले से ही अपने यहां वोट करवा रहा है.अब सबसे मजेदार बात ये है कि 50 राज्यों में सबमें वोट गिनने की जरूरत नहीं होती.पहले से ही पता है कि किस पार्टी का कैंडिडेट जीतेगा. शुरू से ही यही हो रहा है. तोबाकी पार्टी के कैंडिडेट वहां प्रचार करने भी नहीं जाते.मात्र 12 स्टेट ऐसे हैं जोमजा बनाए रखते हैं. इनको स्विंग स्टेट कहा जाता है. आखिरी क्षणों में भी ये स्टेटमामला पलट देते हैं. तो असली चुनाव इन्हीं 12 स्टेट्स में होता है.सॉलिड डेमोक्रैट 15 स्टेट 188 इलेक्टर्स वोट (कुछ भी करें डेमोक्रैट, वोट तो इनकोही जाएगा).कैलीफोर्निया(55), कनेक्टिकट(7), डेलावेयर(3), वाशिंगटन डी सी(3), हवाई(4),इलिनॉय(20), मैइन-01(1), मैरीलैंड(10), मैसाचुसेट्स(11), न्यू मैक्सिको(5), न्यूजर्सी(14), न्यू यॉर्क(29), ऑरेगन(7), रोड्स आईलैंड(4), वर्मांट(3), वाशिंगटन(12)डेमोक्रैट एकदम कुछ उत्पात ना कर दें तो ये लोग भी सॉलिड ही हैं 3 स्टेट 25 वोटमैइन-AL(2), मिनेसोटा(10), वर्जीनिया(13)डेली मिरर वेबसाईट सेसॉलिड रिपब्लिकन 18 स्टेट 136 इलेक्टर्स वोट ( वोट इनको ही जाएगा, कुछ भी करेंरिपब्लिकन)अलबामा(9), अलास्का(3), अरकंसास(6), इदाहो(4), कंसास(6), केंटुकी(8), लुसियाना(8),मिसीसिपी(60), मोंटाना(3), नेब्रास्का-AL (2), नेब्रास्का-01(1), नेब्रास्का-03(1),नॉर्थ डकोटा(3), ओकलाहोमा(7), साउथ कैरोलिना (9), साउथ डकोटा(3), टेनेसी(11),टेक्सास(38), वेस्ट वर्जीनिया(5), व्योमिंग(3).3 स्टेट ऐसे हैं जो प्यार तो रिपब्लिकन से ही करते हैं जब तक कि कुछ कांड ना होजाए. 3 स्टेट, 27 वोटइंडियाना(11), जॉर्जिया(16), आइओवा(6) अब ये हैं 12 स्विंग स्टेट जो मजा दिलाते हैंचुनाव में. बाकी की तो भक्ति है. 12 स्टेट, 162 वोटकोलोरैडो(9), मिशिगन(16), न्यू हैंपशायर(4), पेंसिलवानिया(20), विंस्कॉन्सिन(10),फ्लोरिडा(29), मैइन-02(1), नेब्रास्का-02(1), नेवादा(6), नॉर्थ कैरोलिना(15),ओह्यो(18), अरिजोना(11), जॉर्जिया(16), आइओवा(6) इसीलिए तय माना जा रहा है कि ट्रंपनहीं जीतेगा. क्योंकि हिलेरी की डेमोक्रैट पार्टी पहले से ही आगे है. अब ट्रंप केकांडों के बाद रिपब्लिकन भी उनसे नाराज हैं. हिलेरी शुरू से ही 220 वोट सुरक्षित करचुकी हैं. ट्रंप के 170 सुरक्षित हैं. 270 चाहिए. तो ट्रंप बहुत पीछे हो जाएंगे.अमेरिका में सिर्फ प्रेसिडेंट के लिेए ही वोट नहीं हो रहा. वहां को लोअर हाउस के435 सदस्यों के लिये भी वोट हो रहा है. साथ ही सीनेट के एक-तिहाई लोग भी इसी वोट सेचुने जाएंगे. स्टेट को कुछ लोग भी लगे हाथ इसी वोट से चुने जाएंगे. सीनेट के चुनावपर भी सबकी नजर है. 100 सीटों में अभी रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादा सदस्य हैं. पर 8नवंबर को 34 सीटों पर चुनाव है. डेमोक्रैट पार्टी अगर को इसमें ज्यादा सीटें जीतनाहोगा अगर हिलेरी प्रेसिडेंट बनती हैं तो नहीं तो ये लोग तंग कर देंगे. ट्रंप जीतताहै तो और ज्यादा सीटें जीतनी पड़ेंगी क्योंकि तब ये लोग ट्रंप को तंग करपाएंगे. दुनिया का सबसे धनी देश. इतनी कंजूसी. हमारे यहां तो प्रधानमंत्री बनतेहैं. उसके बाद राज्यों के चुनाव पर ध्यान देते हैं. सालों भर हमारे नेता चुनाव हीलड़ते रहते हैं.कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं चुनाव को?पिछले पांच दशक से फ्लोरिडा और ओह्यो ही प्रेसिडेंट चुन रहे हैं. क्योंकि बाकी सबकालगभग तय रहता है. इन दोनों के इलेक्टर ही रुझान बनायेंगे. अभी इन्हीं दोनों राज्योंपर नजर है सबकी. इसीलिए ओबामा हिलेरी के पक्ष में दबा के प्रचार कर रहे हैंफ्लोरिडा में. 2000 के चुनाव में फ्लोरिडा स्टेट में जनता ने अल गोर को वोट कियाथा. पर इलेक्टर्स ने जॉर्ज बुश को वोट किया. 29 के 29 वोट जॉर्ज को चले गए. चुनावमें धांधली के आरोप भी लगे थे. मामला सुप्रीम कोर्ट में गया. अमेरिका के. वहां सेबुश को ही जीत मिली. अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था. अल गोर को 48.48प्रतिशत और बुश को 47.87 प्रतिशत जनता ने वोट किया था. ये भी पहली बार हुआ था कि कमवोट पाने वाला अमेरिका का प्रेसिडेंट बना. फ्लोरिडा पर ही सबकी निगाहें हैं. अगरहिलेरी यहां जीत गईं तो ट्रंप को बाकी सारे स्विंग स्टेट जीतने पड़ेंगे. 2008 और2012 में हिलेरी की ही पार्टी यहां से जीती है.अगर 270 वोट कोई नहीं जीत पाया तो क्या होगा?अगर किसी कैंडिडेट को भी 270 इलेक्टोरल वोट नहीं मिले तो कांग्रेस तुरंत वोट करेगी.टॉप के 3 कैंडिडेट लिये जायेंगे. उनके नाम पर वोटिंग होगी. और ये स्टेट के आधार परहोगा. हर स्टेट का एक वोट होगा. जिसको 50 स्टेट में से 26 के वोट मिल जायेंगे, वोप्रेसिडेंट बनेगा.अमेरिका में आबादी कम है. इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत मजबूत है. तो वोट की काउंटिंग फटाफटहो जाती है. फिर आधे इलेक्टर वोट पा जाने पर राज्य के सारे इलेक्टर वोट मिल जातेहैं कैंडिडेट को तो पूरा गिनने की भी जरूरत नहीं पड़ती. इसीलिए तुरंत रिजल्ट आ जाताहै. अब देखते हैं कि कौन जीतता है. हालांकि हिलेरी क्लिंटन के जीतने के चांसेज बहुतज्यादा हैं. क्योंकि ट्रंप की पार्टी के लोग ही ट्रंप से नाराज हैं.--------------------------------------------------------------------------------ऐसे रोचक तरीके से चुना जाता है दुनिया का सबसे ताकतवर इंसानहोटल रूम में बुलाकर इस पॉर्न स्टार को ट्रंप ने दबोच लिया था!अमेरिकी चुनाव के कैंडिडेट देखकर उल्लू याद आते हैंफर्जी है 'अबकी बार ट्रंप सरकार' वाला वीडियो, बच्चा भी पहचान सकता हैस्पेशल रिपोर्ट, सीधे फ्रॉम अमेरिका, एक सांस में खींच जाओहमारे वैशाली से गणतंत्र 'चुराकर' ले गया था अमेरिका, अब देखोडॉनल्ड ट्रंप की जीत बस एक शीशी दारू की मोहताज है, लौलेस बताइनडॉनल्ड ट्रंप तो इंडिया और हिंदुओं के जबरा फैन निकले