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50 में से सिर्फ 2 राज्यों के वोट पर होगा अमेरिकी प्रेसिडेंट का चुनाव!

बेहद रोचक है ये चुनाव.

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ऋषभ
5 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 5 नवंबर 2016, 06:29 AM IST)
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अमेरिका के हर काम की तरह 50 में से 2 राज्यों का चुनाव पर प्रभाव भी अनूठा है. अमेरिका के लोग अपने प्रेसिडेंट को सीधे नहीं चुनते हैं. अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है. फिर भी ये होता है. पर इसकी वजह है. बहुत तगड़ी. अमेरिकी संविधान में इस चुनाव को इस कदर घुमाया गया है कि कोई भी सनकी दिमाग का इंसान अमेरिका का प्रेसिडेंट नहीं बन सकता. ज्यादातर जगहों पर ये होता है कि जनता वोट कर देती है और कैंडिडेट जीत जाता है. कई बार ऐसा होता है कि कुछ ऐसे नेता आ जाते हैं जो जनता को बहका ले जाते हैं बड़ी-बड़ी बातें कर के. जोश और भावना में बहकर जनता वोट दे देती है. लेकिन तुरंत ही पता चल जाता है कि ये कैंडिडेट गलत आ गया.
तो अमेरिकी संविधान में इस चीज को बहुत बुद्धिमानी से निपटाया गया है. इसीलिेए आप देखेंगे कि ज्यादातर अमेरिकी प्रेसिडेंट बेहद मजबूत और अमेरिका के लिए जबरदस्त काम करनेवाले हुए हैं. कोई-कोई ही ऐसा हुआ है जिसने नाक कटवाई हो. पर वो दूसरों के मामले में होता है, अमेरिका को वो भी नहीं फंसाते. अभी ट्रंप को लेकर लोगों के मन में दहशत है. पर ऐसा नहीं है कि अमेरिकी जनता सीधा वोट कर के ट्रंप को प्रेसिडेंट बना देगी. अभी मौका है कि ट्रंप हार सकता है.

तो 8 नवंबर को कैसे वोट करेंगे अमेरिकी?

होता क्या है कि अमेरिकी प्रेसिडेंट इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम से चुना जाता है. ये कॉलेज कोई संस्था नहीं है, बल्कि ये वो लोग हैं जिनको नवंबर के पहले सोमवार के बाद आनेवाले मंगलवार को जनता वोट कर के चुनती है. इसी चुनाव को प्रेसिडेंशियल इलेक्शन कहा जाता है. इस बार ये 8 नवंबर को है.
अमेरिका के 50 राज्यों और वाशिंगटन डी सी (डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया) को मिलाकर कुल 538 इलेक्टर चुने जाते हैं. उसके बाद ये लोग वोट करते हैं. 538 में से 270 वोट लाने होते हैं प्रेसिडेंट बनने के लिए. यहीं पर खेल होता है. जनता के किसी कैंडिडेट को वोट देने के बावजूद ये लोग किसी और को जिता सकते हैं. हालांकि ज्यादातर मामलों में ये लोग जनता के मुताबिक ही कैंडिडेट चुनते हैं. पर दो बार ऐसा हुआ है कि इन लोगों ने किसी और को वोट कर दिया है. अगर जनता उत्तेजना में ट्रंप को वोट करती है तो, इसी के सहारे ट्रंप को हराने की आस बची है.
अब प्रश्न है कि 538 ही इलेक्टर कैसे होते हैं? अमेरिका में दो सदन हैं. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट. हाउस में 435 सदस्य हैं और सीनेट में 100. 3 इलेक्टर हैं वाशिंगटन डी सी के. तो कुल 538 इलेक्टर हुए. इसका मतलब ये नहीं है कि हाउस और सीनेट के लोग ही चुनते हैं. जी नहीं. इनसे स्वतंत्र होता है प्रेसिडेंट. यही तो यहां का लोकतंत्र है. प्रेसिडेंशियल सिस्टम. प्रेसिडेंट और हाउस अलग-अलग.

अमेरिकी संसद और प्रेसिडेंट का क्या हिसाब-किताब है?

अमेरिका की संसद को कांग्रेस कहा जाता है. इसमें दो सदन होते हैं. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट. 50 राज्य हैं. हर राज्य से दो सदस्य यानी कुल 100 सदस्य होते हैं सीनेट में. हाउस में आबादी के हिसाब से हैं.
हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव डिस्ट्रिक्ट के आधार पर होता है. हर डिस्ट्रिक्ट से एक. मतलब हमारे यहां के लोकसभा क्षेत्र की तरह. ये हाउस बिल पेश करने और अफसरों को चुनने के लिए होता है. अगर प्रेसिडेंट के इलेक्शन में कोई 270 वोट नहीं लाता तो ये लोग ही चुनते हैं वोट कर के. इनके पास अधिकार होता है कि ये किसी अफसर को हटा सकें. सिर्फ यही हटा सकते हैं. ये लोग प्रेसिडेंट पर इंपीचमेंट का भी केस चला सकते हैं. बिल क्लिंटन पर आरोप लगा था मोनिका लेंविंस्की वाले मामले में.
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हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव (Reuters)

सीनेट 6 साल के लिेए होता है. हाउस 2 साल के लिए. सीनेट के सदस्य स्टेट में फेमस होते हैं. आखिर दो ही सदस्य जाने हैं स्टेट से. हाउस के लोग डिस्ट्रिक्ट से आते हैं. तो उनकी पॉपुलेरिटी डिस्ट्रिक्ट में ही होती है. दोनों को बनाने का मकसद था. सीनेट किसी मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने के लिए है. हाउस जल्दी-जल्दी वाले काम के लिए है. तो दोनों मिल के बैलेंस बनाते हैं.सीनेट के पास एडवाइस और कंसेंट के पॉवर हैं. यही लोग ट्रीटी तय करते हैं किसी भी चीज पर.
प्रेसिडेंशियल सिस्टम में प्रेसिडेंट कार्यपालिका होता है. और कांग्रेस विधायिका यानी कानून बनाते हैं. कांग्रेस प्रेसिडेंट को हटा नहीं सकती. सिर्फ गंभीर अपराधों के लिए ही इंपीच कर सकती है. हमारे पार्लियामेंट्री सिस्टम में विधायिका का ही एक हिस्सा होती है सरकार. हमारे यहां प्रधानमंत्री महत्त्वपूर्ण होते हैं. पर ये संसद के प्रति उत्तरदायी होते हैं. इनके हटाया भी जा सकता है.

तो मुद्दे की बात, इलेक्टर्स क्या करते हैं?

तो ये इलेक्टर किसी पार्टी के ही ऑफिशियल होते हैं. पर ये केंद्र के या स्टेट के नेता नहीं हो सकते. इसके बारे में यहां के संविधान में दिया हुआ है. तो प्रेसिडेंशियल इलेक्शन हो जाने के बाद जो दूसरा बुधवार आता है, उस दिन ये लोग अपने-अपने स्टेट जा के प्रेसिडेंट के नाम पर वोट करते हैं.
फिर मजा आता है नियमों के साथ खेलने का. अगर किसी राज्य के आधे से ज्यादा इलेक्टर्स ने किसी को वोट कर दिया तो उस राज्य के सारे इलेक्टर्स को वोट उसी कैंडिडेट को चला जाएगा. मतलब कैलीफोर्निया के 55 में से 28 ने ट्रंप को वोट कर दिया तो अब सारे 55 वोट ट्रंप को ही चले जाएंगे. सिर्फ मैइन और नेब्रास्का राज्यों में ये सिस्टम नहीं है. वहां पर वोट 2-1 के रेशिओ में टूटते हैं.

अमेरिका के राज्य कैसे वोट करते हैं? 

अमेरिका में सारे लोग वोट नहीं करते. 33 करोड़ की आबादी है. पर मात्र 14 करोड़ लोग ही वोट करेंगे इस बार. इंडिया में 56 करोड़ लोगों ने वोट किया था. 17 करोड़ लोगों ने तो भाजपा को ही किया था. हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रिपब्लिक पार्टी के 247 सदस्य हैं. डेमोक्रैट के 188. बाकी दूसरी पार्टियों के पास हैं. तो यहां भी चुनाव में मजा आने वाला है. मेन वोटिंग तो 8 नवंबर को होगी. पर अमेरिका में छूट है. मिनेसोटा पहले से ही अपने यहां वोट करवा रहा है.
अब सबसे मजेदार बात ये है कि 50 राज्यों में सबमें वोट गिनने की जरूरत नहीं होती. पहले से ही पता है कि किस पार्टी का कैंडिडेट जीतेगा. शुरू से ही यही हो रहा है. तो बाकी पार्टी के कैंडिडेट वहां प्रचार करने भी नहीं जाते.मात्र 12 स्टेट ऐसे हैं जो मजा बनाए रखते हैं. इनको स्विंग स्टेट कहा जाता है. आखिरी क्षणों में भी ये स्टेट मामला पलट देते हैं. तो असली चुनाव इन्हीं 12 स्टेट्स में होता है.
सॉलिड डेमोक्रैट 15 स्टेट 188 इलेक्टर्स वोट (कुछ भी करें डेमोक्रैट, वोट तो इनको ही जाएगा).
कैलीफोर्निया(55), कनेक्टिकट(7), डेलावेयर(3), वाशिंगटन डी सी(3), हवाई(4), इलिनॉय(20), मैइन-01(1), मैरीलैंड(10), मैसाचुसेट्स(11), न्यू मैक्सिको(5), न्यू जर्सी(14), न्यू यॉर्क(29), ऑरेगन(7), रोड्स आईलैंड(4), वर्मांट(3), वाशिंगटन(12)
डेमोक्रैट एकदम कुछ उत्पात ना कर दें तो ये लोग भी सॉलिड ही हैं 3 स्टेट 25 वोट
मैइन-AL(2), मिनेसोटा(10), वर्जीनिया(13)
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डेली मिरर वेबसाईट से

सॉलिड रिपब्लिकन 18 स्टेट 136 इलेक्टर्स वोट ( वोट इनको ही जाएगा, कुछ भी करें रिपब्लिकन)
अलबामा(9), अलास्का(3), अरकंसास(6), इदाहो(4), कंसास(6), केंटुकी(8), लुसियाना(8), मिसीसिपी(60), मोंटाना(3), नेब्रास्का-AL (2), नेब्रास्का-01(1), नेब्रास्का-03(1), नॉर्थ डकोटा(3), ओकलाहोमा(7), साउथ कैरोलिना (9), साउथ डकोटा(3), टेनेसी(11), टेक्सास(38), वेस्ट वर्जीनिया(5), व्योमिंग(3).
3 स्टेट ऐसे हैं जो प्यार तो रिपब्लिकन से ही करते हैं जब तक कि कुछ कांड ना हो जाए. 3 स्टेट, 27 वोट
इंडियाना(11), जॉर्जिया(16), आइओवा(6)
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इसीलिए तय माना जा रहा है कि ट्रंप नहीं जीतेगा. क्योंकि हिलेरी की डेमोक्रैट पार्टी पहले से ही आगे है. अब ट्रंप के कांडों के बाद रिपब्लिकन भी उनसे नाराज हैं. हिलेरी शुरू से ही 220 वोट सुरक्षित कर चुकी हैं. ट्रंप के 170 सुरक्षित हैं. 270 चाहिए. तो ट्रंप बहुत पीछे हो जाएंगे.
अमेरिका में सिर्फ प्रेसिडेंट के लिेए ही वोट नहीं हो रहा. वहां को लोअर हाउस के 435 सदस्यों के लिये भी वोट हो रहा है. साथ ही सीनेट के एक-तिहाई लोग भी इसी वोट से चुने जाएंगे. स्टेट को कुछ लोग भी लगे हाथ इसी वोट से चुने जाएंगे. सीनेट के चुनाव पर भी सबकी नजर है. 100 सीटों में अभी रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादा सदस्य हैं. पर 8 नवंबर को 34 सीटों पर चुनाव है. डेमोक्रैट पार्टी अगर को इसमें ज्यादा सीटें जीतना होगा अगर हिलेरी प्रेसिडेंट बनती हैं तो नहीं तो ये लोग तंग कर देंगे. ट्रंप जीतता है तो और ज्यादा सीटें जीतनी पड़ेंगी क्योंकि तब ये लोग ट्रंप को तंग कर पाएंगे. दुनिया का सबसे धनी देश. इतनी कंजूसी. हमारे यहां तो प्रधानमंत्री बनते हैं. उसके बाद राज्यों के चुनाव पर ध्यान देते हैं. सालों भर हमारे नेता चुनाव ही लड़ते रहते हैं.

कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं चुनाव को?

पिछले पांच दशक से फ्लोरिडा और ओह्यो ही प्रेसिडेंट चुन रहे हैं. क्योंकि बाकी सबका लगभग तय रहता है. इन दोनों के इलेक्टर ही रुझान बनायेंगे. अभी इन्हीं दोनों राज्यों पर नजर है सबकी. इसीलिए ओबामा हिलेरी के पक्ष में दबा के प्रचार कर रहे हैं फ्लोरिडा में.
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अगर 270 वोट कोई नहीं जीत पाया तो क्या होगा?

अगर किसी कैंडिडेट को भी 270 इलेक्टोरल वोट नहीं मिले तो कांग्रेस तुरंत वोट करेगी. टॉप के 3 कैंडिडेट लिये जायेंगे. उनके नाम पर वोटिंग होगी. और ये स्टेट के आधार पर होगा. हर स्टेट का एक वोट होगा. जिसको 50 स्टेट में से 26 के वोट मिल जायेंगे, वो प्रेसिडेंट बनेगा.
अमेरिका में आबादी कम है. इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत मजबूत है. तो वोट की काउंटिंग फटाफट हो जाती है. फिर आधे इलेक्टर वोट पा जाने पर राज्य के सारे इलेक्टर वोट मिल जाते हैं कैंडिडेट को तो पूरा गिनने की भी जरूरत नहीं पड़ती. इसीलिए तुरंत रिजल्ट आ जाता है. अब देखते हैं कि कौन जीतता है. हालांकि हिलेरी क्लिंटन के जीतने के चांसेज बहुत ज्यादा हैं. क्योंकि ट्रंप की पार्टी के लोग ही ट्रंप से नाराज हैं.


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