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लेकिन क्यों नहीं घुस सकतीं सबरीमाला मंदिर में औरतें?

कौन से भगवान हैं जो औरतों के आने से 'अपवित्र' हो जाते हैं?

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12 जनवरी 2016 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2016, 05:09 AM IST)
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बीते नवंबर केरल के सबरीमाला मंदिर के चेयरमैन ने कहा कि मंदिर में आने वाली औरतों के लिए मशीन बननी चाहिए. जो डिटेक्ट कर सके कि उनके पीरियड्स तो नहीं चल रहे. क्योंकि जब पीरियड्स होते हैं, वो पवित्र नहीं होती. इस चोमू बात पर भड़क गयीं देश भर की लडकियां. भड़कना भी चाहिए.
जब भसड़ कटी, तो सवाल उठा मंदिर के उस नियम पर जो सालों से चला आ रहा है. कि 10-50 साल तक की औरतें, यानी प्युबर्टी से मेनोपॉज तक की उम्र वाली औरतें मंदिर में नहीं घुस सकतीं. क्योंकि वो 'अपवित्र' होती हैं.
तो अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि ये लिंग भेद नहीं चलेगा. किसी औरत को एक मंदिर में न घुसने देना 'अनकॉन्स्टीट्यूशनल' है.
पर ऐसे फालतू नियम बनाने वाला सबरीमाला मंदिर है क्या? कहां है? और ये कौन से भगवान हैं जो औरतों के आने से 'अपवित्र' हो जाते हैं?
1. केरल में पेरियार टाइगर रिजर्व के पास बना हुआ है सबरीमाला मंदिर. दुनिया के सबसे बड़े हिंदू तीर्थस्थलों में से एक है. हर साल 10 करोड़ से भी ज्यादा तीर्थयात्री आते हैं.
sabrimala front view
मंदिर का फ्रंट व्यू

2. मंदिर को मेंटेन करता है त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड. जो केरल सरकार का हिस्सा है. मंदिर के हेड को तंत्री कहते हैं.
3. यहां पूजा होती है भगवान अय्यप्पन की. अब अय्यप्पन कौन हैं? हरिहर के बेटे थे अय्यप्पन. और हरिहर उन्हें कहते हैं जो भगवान शिव और विष्णु को कंबाइन कर के बनते हैं. भगवान अय्यप्पन महिषासुर की बहन महिषी को मारने के बाद यहां आए थे. तभी यहां उनके नाम का मंदिर बना.
harihara 1
भगवान हरिहर

4. तीरथ आसान नहीं ये वाला. 41 दिनों तक उपवास करना होता है. रुद्राक्ष पहनना पड़ता है. गोश्त नहीं खा सकते. नशा नहीं कर सकते. गरिया नहीं सकते किसी को. बाल, दाढ़ी या नाखून नहीं काट सकते. दिन में दो बार नहाना होता है और भगवा कपड़े पहनने पड़ते हैं. तब जा कर मंदिर जाने के लिए क्वालीफाई कर पाते हैं लोग.
5. क्यों नहीं जातीं मेनस्ट्रूएट करने वाली औरतें? क्योंकि भगवान अय्यप्पन ब्रह्मचारी हैं. ये वही लॉजिक है जो लड़कियों को हनुमान के मंदिर न जाने न उनकी मूर्ति न छूने देने के लिए दिया जाता है.
6. कुछ ही दिनों के लिए खुलता है मंदिर. 15 नवंबर से 26 दिसंबर तक जिसे केरल में मंडलपूजा का टाइम कहते हैं. इसके अलावा मकर संक्रांति, विष्णु संक्रांति, और हर मलयालम महीने के पहले पांच दिन. मतलब भगवान अय्यप्पन के पास रिलैक्स करने का काफी टाइम होता है.

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