22 साल के समीर वर्मा वर्ल्ड नंबर 3 को हराकर हॉन्गकॉन्ग सुपर सीरीज़ के फाइनल मेंपहुंच गए. इस जीत के साथ 24 साल में यह पहला मौका था जब कोई भारतीय हॉन्गकॉन्ग ओपनके फाइनल में है. इससे पहले 1982 में प्रकाश पादुकोण ने यह कारनामा किया था औरखिताब भी जीता था.इसके साथ-साथ सुपर सीरीज़ के फाइनल में पहुंचने वाले भी वो दूसरे भारतीय खिलाड़ीहैं. किदांबी श्रीकांत 2014 में चायना ओपन के फाइनल में पहुंचे थे और जीते थे. सुपरसीरीज़ साल में होने 12 टूर्नामेंटों की श्रृंखला है जिसमें टॉप-32 खिलाड़ी खेलतेहैं.सौजन्य: @sameerv2210 ट्विटरमहाराष्ट्र के रहने वाले समीर वर्मा 16 साल की उम्र में ही गोपीचंद की अकेडमी पहुंचगए थे. इसके ठीक अगले साल 2011 में समीर को एशियन जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप औरफिर कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में दोनों में सिल्वर मेडल के साथ पहली कामयाबियां मिली. 2साल बाद 2013 में बहरीन इंटरनेशनल सीरीज़ के साथ समीर को पहला सीनियर इंटरनेशनलखिताब मिला.2015 तक समीर वर्मा की रैंकिंग 250 भी नहीं थी. उस साल समीर वर्मा ने टाटा ओपन औरउसके बाद बांग्लादेश ओपन का खिताब जीता. फिलहाल नंबर 43 रैंक समीर इस साल अपनेकरियर की श्रेष्ठ रैंकिंग 35 तक पहुंच गए थे. इस साल इंडियन सीनियर नेशनलचैंपियनशिप अपने नाम करने के अलावा समीर जर्मनी में खेले गए बिटबर्गर ओपन केसेमीफाइनल तक भी पहुंचे थे.समीर के स्मैश अनियमित माने जाते हैं और वो बाकी भारतीय खिलाड़ियों की तरह ताकत केसाथ खेल भी नहीं खेलते. बल्कि उनकी ताकत कलाईयों के इस्तेमाल में है.22 वर्षीय समीर के बड़े भाई 24 वर्षीय सौरभ वर्मा भी इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ीहैं. सौरभ वर्मा ने इसी साल चीनी ताइपे ओपन का खिताब जीता है और रैंकिंग में सिर्फएक खिलाड़ी दोनों भाईयों के बीच में है. सौरभ की रैंकिंग 45 है.गोपीचंद की अकेडमी से पूरी फौज निकली है. पुरूषों के टॉप 50 खिलाड़ियों में से 6खिलाड़ी - के. श्रीकांत, अजय जयराम, प्रणॉय कुमार, बी साई प्रणीत और समीर-सौरभवर्मा भारत के हैं. धीरे-धीरे भारत बैडमिंटन में चीन के नजदीक आता जा रहा है. अगलेओलंपिक में भारत के पुरूष और महिला दोनों वर्गों के खिलाड़ी ओलंपिक मेडल लेकर आएंइसकी तैयारी सही ट्रैक पर है.