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GRE : वह विदेशी एग्जाम, जिसका स्कोर हर तोप यूनिवर्सिटी मांगती है

कई भारतीयों ने इस एग्जाम में भी अपनी कलाकारी दिखा डाली है.

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15 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 15 जनवरी 2021, 10:51 AM IST)
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दुनिया भर की बड़ी विदेशी यूनिवर्सिटीज़ जीआरई के एग्जाम के स्कोर पर ही अपने यहां एडमीशन देती हैं.
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बिहार की वह तस्वीर शायद आपको याद होगी, जिसमें लोग अपने परिचितों को नकल कराने के लिए बिल्डिंग पर लटके हुए थे. इस चीटिंग पर भी खूब हो-हल्ला मचा, फिर बिहार में ऐसा ही होता है टाइप की बातें करके सब भूल गए. लेकिन इस बार भारत वालों ने इंटरनेशनल लेवल पर चीटिंग की है. इसकी शिकायत भी उस अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने की है, जो इस एग्जाम को कंडक्ट कराता है.
हम बात कर रहे हैं GRE यानी ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन की. इस एग्जाम को कराने की जिम्मेदारी अमेरिका के ऑर्गेनाइजेशन एजुकेशन ट्रेनिंग सिस्टम (ETS) की है. इसकी भारतीय इकाई ने नीति आयोग और शिक्षा विभाग से शिकायत की है. उनका कहना है कि कोविड संकट की वजह से घर से एग्जाम देने की सुविधा के दौरान कई लोगों ने अपने आसपास एक्सपर्ट बिठाकर एग्जाम में रैंक पाई है. आखिर क्या है ये GRE एग्जाम और इसे पास करने के बाद कहां एडमिशन मिल जाता है, आइए ये भी बताते हैं. पहले जानिए GRE होता क्या है? ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्जामिनेशन या जीआरई अमेरिकी और कनाडा की यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों में एडमिशन पाने का सबसे बड़ा एग्जाम है. विदेशों से पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले ज्यादा संख्या में इस एग्जाम को देते हैं. इसके महत्व का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका की MIT, प्रिंसटन और स्टैनफर्ड जैसी बड़ी यूनिवर्सिटीज़ भी इसी एग्जाम के स्कोर पर ही विदेशी स्टूडेंट्स को अपने यहां एडमिशन देती हैं. इसे दुनिया का सबसे बड़ा एंट्रेंस टेस्ट भी माना जाता है. मुख्य तौर पर भारत से विदेशों में पढ़ने के लिए जाने वाले छात्र इस टेस्ट में हिस्सा लेते हैं. हर साल दुनिया भर के करीब 5 लाख स्टूडेंट्स इस एग्जाम का हिस्सा बनते हैं. इस एग्जाम का आयोजन दुनिया के 160 देशों के 1 हजार से ज्यादा एग्जामिनेशन सेंटरों पर हर साल किया जाता है. 2019 में भारत के तकरीबन 85 हजार स्टूडेंट्स ने यह एग्जाम दिया था.
मनोज ने एक साल पढ़ाई कर के प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी छोड़ दी थी.
अमेरिकी की एमआईटी, प्रिंसटन, स्टैनफर्ड जैसी यूनिवर्सिटी जीआरई के स्कोर पर एडमिशन देती हैं. तस्वीर अमेरिका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी की है.
कैसे होता है GRE टेस्ट? इस टेस्ट का आयोजन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से होता है. मतलब कोई चाहे तो चुनिंदा एग्जाम सेंटर पर जाकर कंप्यूटर पर टेस्ट दे सकता है. जिन देशों में कंप्यूटर आधारित टेस्ट की सुविधा नहीं है, वहां पर पेपर आधारित टेस्ट की व्यवस्था की जाती है. भारत में भी इस टेस्ट का आयोजन अहमदाबाद, बेंगलुरु, कोयम्बटूर, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और बिरला इंस्टीट्यूट पिलानी में होता है.
यह एग्जाम साल में कभी भी दिया जा सकता है. इसका कोई तय वक्त नहीं है. इसके लिए आपको ऑफिशल वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराकर अपॉइंटमेंट लेना होता है. हालांकि अगस्त से सितंबर के बीच इसकी मांग ज्यादा होती है, इसलिए अपॉइंटमेंट मिलने में दिक्कत आती है.
इस बार कोरोना के चलते घर से एग्जाम देने की भी सुविधा दी गई थी. कोई चीटिंग न करे, इसके लिए ऑनलाइन मौजूद एग्जाम लेने वाला एक डेलिगेट यह सुनिश्चित करता है कि जो एग्जाम दे रहा है, उसके कमरे में कोई है तो नहीं. इसके लिए वह आवेदक से वेबकैम के जरिए एग्जाम रूम दिखाने के लिए कहता है. इतनी चौकसी के बाद भी भारत से ऐसी शिकायतें आई हैं कि लोगों ने एग्जाम पास करने के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ली है. इसके लिए उन्होंने हर पेपर के आधार पर 30 से 40 हजार रुपए तक दिए हैं.
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जीआरई ने कोविड के चलते घर से एग्जाम देने का ऑप्शन भी दिया है. (सांकेतिक तस्वीर: Pexels)
कौन दे सकता है ये टेस्ट? जीआरई टेस्ट के लिए कोई योग्यता, उम्र आदि तय नहीं की गई है. लेकिन जो यूनिवर्सिटी इस टेस्ट स्कोर को मान्यता देती है, उन सबने अपनी अलग-अलग योग्यताएं तय की हुई हैं. यह एग्जाम सिर्फ एक स्कोर देता है. नियम-कायदा वह यूनिवर्सिटी तय करती है, जिसमें स्टूडेंट एडमिशन लेना चाहता है. भारत में GRE टेस्ट देने के लिए आपको अपनी पहचान साबित करनी होगी. इसके लिए आपके पास वैध पासपोर्ट होना जरूरी है. पासपोर्ट में आपका पूरा नाम, फोटो और साइन होने चाहिए. इसके अलावा कोई दूसरा दस्तावेज जैसे डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, एजुकेशनल सर्टिफिकेट आदि का इस्तेमाल पहचान साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता. किस-किस चीज़ का एग्जाम होता है? इस एग्जाम में स्टूडेंट के सोचने के तरीके को परखा जाता है. इसको परखने के लिए जीआरई में तीन तरह के पेपर होते हैं. कुल समय 3 घंटे 10 मिनट का वक्त का होता है.
वर्बल रीजनिंग (मौखिक तर्क) - यह एक तरह से आपके शब्दों को पढ़ने और उसमें कहा क्या जा रहा है, उसे समझने का टेस्ट है. यह एक घंटे का होता है लेकिन हर सेक्शन के लिए सिर्फ 20 मिनट का ही वक्त मिलता है.
# एक्सपर्ट टिप्स
यह पेपर अंग्रेजी की तगड़ी परीक्षा लेता है. भारत के स्टूडेंट्स के लिए यह पेपर ही भूमिका बनाने वाला होता है. भारतीय स्टूडेंट्स को इसकी सबसे ज्यादा तैयारी करनी होती है. मिसाल के तौर रिक्त स्थान भरो, पैराग्राफ पूरा करो आदि सवाल रहते हैं.
क्वांटिटेटिव रीजनिंग (मात्रात्मक तर्क) - इसमें बेसिक गणित का टेस्ट होता है. क्लास 10वीं तक की गणित के हिसाब से यह जांचा जाता है कि हिसाब-किताब और नाप-जोख की बेसिक जानकारी स्टूडेंट को है कि नहीं. इसके दो सेक्शन होते हैं. हर सेक्शन के लिए 35 मिनट का वक्त लगता है. इस तरह से यह पेपर कुल 1 घंटे 10 मिनट का होता है.
# एक्सपर्ट टिप्स
अगर साइंस बैकग्राउंड में मैथ्स के साथ 12वीं पास की है तो यह पेपर हलवा है. भारत में 10वीं तक मैथ्स पढ़ने वाला भी इस पेपर में पूरे मार्क्स ला सकता है. ज्यादातर अच्छा स्कोर लाने वाले इसमें पूरे मार्क्स का टारगेट लेकर चलते हैं
एनालिटिकल राइटिंग (विश्लेषणात्मक लेखन मूल्यांकन)-  यह पेपर सबसे आखिर में होता है. एनालिटिकल राइटिंग के जरिए यह जानने की कोशिश की जाती है कि स्टूडेंट की किसी भी टॉपिक पर लिखने की क्षमता कैसी है. उसका तार्किक दिमाग किस किस तरह के तर्क से किसी भी बात को विस्तार से समझा सकता है. कुल मिलाकर यह निबंध लिखने का टेस्ट होता है. इसमें 2 निबंध लिखने के लिए 1 घंटे का वक्त मिलता है.
# एक्सपर्ट टिप्स
इसमें अंग्रेजी में अच्छी तरह से लिखने पर जोर दिया जाता है. जो जितना अच्छा और तेज लिख सकता है, उसे उतनी ही सहूलियत रहती है. मिसाल के तौर पर क्लाइमेट चेंज, इकॉनमी या पॉलिटिक्स आदि के टॉपिक पर निबंध लिखने को आते हैं. इसका एक सेट पैटर्न है. अगर पिछले कुछ सालों का मैटीरियल खंगाल लिया तो इस पेपर में काफी आसानी रहती है.
यूपी एसआई की भर्ती परीक्षा ऑनलाइन हुई थी और लीक होने के बाद रद्द हो गई थी.
जीआरई का एग्जाम खासतौर पर स्टूडेंट की सब्जेक्ट और भाषा की समझ को परखने के लिए होता है.
क्या कोई सब्जेक्ट टेस्ट भी होता है? हां, हर साल 3 बार (अप्रैल, सितंबर और अक्टूबर ) जीआरई का सब्जेक्ट टेस्ट होता है. कुछ यूनिवर्सिटी सब्जेक्ट टेस्ट के स्कोर भी मांगती हैं.  इस टेस्ट में स्टूडेंट्स की किसी खास विषय पर पकड़ को जांचा जाता है. यह सिर्फ पेपर आधारित फॉर्मैट में ही लिया जाता है. मतलब इसे ऑनलाइन नहीं बल्कि देश भर से सेंटरों पर परंपरागत तरीके से लिया जाता है. यह टेस्ट कुल 6 सब्जेक्ट्स ( बायॉलजी, केमिस्ट्री, अंग्रेजी साहित्य, गणित, फिजिक्स, साइकॉलजी) के लिए लिया जाता है. हर सब्जेक्ट टेस्ट के लिए 2.50 घंटे का समय मिलता है.
# एक्सपर्ट टिप्स
हर स्टूडेंट को ये एग्जाम देने की जरूरत नहीं होती. पीएचडी करने के इच्छुक स्टूडेंट्स ही इस एग्जाम को देते हैं. हर यूनिवर्सिटी का इसके स्कोर के जरिए एडमीशन देने का अपना अलग पैमाना है. भारत में ज्यादातर स्टूडेंट मास्टर्स डिग्री में एडमीशन को लेकर ही ज्यादा इंट्रेस्ट दिखाते हैं. ऐसे में यह एग्जाम कम स्टूडेंट्स ही देते हैं. कितने नंबर पा जाएं तो नैय्या पर मानी जाए? तीनों पेपर को कुल मिलाकर 340 मार्क्स का एग्जाम होता है. इसमें मिले मार्क्स के हिसाब से ही स्कोर की गिनती होती है. जानकारों का कहना है कि अगर 300 के आसपास स्कोर किया तो यह सामान्य से बेहतर स्कोर माना जाता है. जीआरई के लिए तैयारी कराने वाले इंस्टिट्यूट से जुड़े आकाश शर्मा कहते हैं कि 270 के आसपास मार्क्स लगभग हर सामान्य स्टूडेंट के आ सकते हैं. दुनिया के बेहतरीन कॉलेज और यूनिवर्सिटी 320-330 के स्कोर वाले स्टूडेंट्स को एडमीशन आराम से दे देते हैं.
GRE का एग्जाम दे चुके प्रियांश दौशाल्य का कहना है-
हर यूनिवर्सिटी GRE के स्कोर के अलावा दूसरे स्कोर जैसे CGPA आदि भी देखती हैं. ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि कितना स्कोर सेफ है. लेकिन अगर स्कोर 320 के आसपास है तो लगभग हर यूनिवर्सिटी में एडमीशन मिल सकता है. हालांकि स्कोर को लेकर हर साल अलग-अलग तरह से कटऑफ रहती है.
कितनी फीस देनी होती है? हर देश के हिसाब से फीस का गणित अलग-अलग है. भारत में इसकी फीस 231 अमेरिकी डॉलर है, मतलब यही कोई 17 हजार रुपए के आस-पास. इसके अलावा अगर आपने सेंटर या एग्जाम की तारीख बदलवाई तो उसके लिए 50-50 अमेरिकी डॉलर (तकरीबन 3500 रुपए) अलग से भरने होंगे.
जीआरई का एग्जाम कराने वाला संस्थान ईटीए बहुत ही व्यवस्थित तरीके से यह एग्जाम करवाता है. www.ets.org साइट पर आपको न सिर्फ एग्जाम के बारे में पूरी डिटेल्स मिलेंगी, बल्कि तैयारी करने के बेहतरीन टूल्स और संसाधन भी मिल जाएंगे.

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