एक दोस्त के मुंह से पहली बार सुनी थे ये कविता. सुनते हुए आखिरी भाग के आखिरीस्टैन्जा में रो पड़ी थी. इसी तरह आलोक धन्वा के नाम से परिचय हुआ था. सिर्फ कविताके सुख के लिए ही नहीं, 'भागी हुई लडकियां' खुद को अंदर तक हिला देने के लिए पढ़नीचाहिए. क्योंकि कविता का असल सुख इसी में है कि उसके शब्द आपको परेशान करते रहेंतब तक, जब तक कोई नई कविता आ कर हिला न दे. भागी हुई लड़कियां 1. घर की जंजीरेंकितना ज्यादा दिखाई पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आरही है जो पुरानी फिल्मों में बार-बार आती थी जब भी कोई लड़की घर से भगती थी? बारिशसे घिरे वे पत्थर के लैम्पपोस्ट महज आंखों की बेचैनी दिखाने भर उनकी रोशनी? और वेतमाम गाने रजतपरदों पर दीवानगी के आज अपने ही घर में सच निकले! क्या तुम यह सोचतेथे कि वे गाने महज अभिनेता-अभिनेत्रियों के लिए रचे गए? और वह खतरनाक अभिनय लैला केध्वंस का जो मंच से अटूट उठता हुआ दर्शकों की निजी जिन्दगियों में फैल जाता था? 2.तुम तो पढ़ कर सुनाओगे नहीं कभी वह खत जिसे भागने से पहले वह अपनी मेज पर रख गई तुमतो छुपाओगे पूरे जमाने से उसका संवाद चुराओगे उसका शीशा उसका पारा उसका आबनूस उसकीसात पालों वाली नाव लेकिन कैसे चुराओगे एक भागी हुई लड़की की उम्र जो अभी काफी बचीहो सकती है उसके दुपट्टे के झुटपुटे में? उसकी बची-खुची चीजों को जला डालोगे? उसकीअनुपस्थिति को भी जला डालोगे? जो गूंज रही है उसकी उपस्थिति से बहुत अधिक सन्तूर कीतरह केश में 3. उसे मिटाओगे एक भागी हुई लड़की को मिटाओगे उसके ही घर की हवा से उसेवहां से भी मिटाओगे उसका जो बचपन है तुम्हारे भीतर वहां से भी मैं जानता हूंकुलीनता की हिंसा! लेकिन उसके भागने की बात याद से नहीं जाएगी पुरानी पवनचिक्कयोंकी तरह वह कोई पहली लड़की नहीं है जो भागी है और न वह अन्तिम लड़की होगी अभी और भीलड़के होंगे और भी लड़कियां होंगी जो भागेंगी मार्च के महीने में लड़की भागती हैजैसे फूलों गुम होती हुई तारों में गुम होती हुई तैराकी की पोशाक में दौड़ती हुईखचाखच भरे जगरमगर स्टेडियम में 4. अगर एक लड़की भागती है तो यह हमेशा जरूरी नहीं हैकि कोई लड़का भी भागा होगा कई दूसरे जीवन प्रसंग हैं जिनके साथ वह जा सकती है कुछभी कर सकती है महज जन्म देना ही स्त्री होना नहीं है तुम्हारे उस टैंक जैसे बंद औरमजबूत घर से बाहर लड़कियां काफी बदल चुकी हैं मैं तुम्हें यह इजाजत नहीं दूंगा कितुम उसकी सम्भावना की भी तस्करी करो वह कहीं भी हो सकती है गिर सकती है बिखर सकतीहै लेकिन वह खुद शामिल होगी सब में गलतियां भी खुद ही करेगी सब कुछ देखेगी शुरू सेअंत तक अपना अंत भी देखती हुई जाएगी किसी दूसरे की मृत्यु नहीं मरेगी 5. लड़कीभागती है जैसे सफेद घोड़े पर सवार लालच और जुए के आरपार जर्जर दूल्हों से कितनी धूलउठती है तुम जो पत्नियों को अलग रखते हो वेश्याओं से और प्रेमिकाओं को अलग रखते होपत्नियों से कितना आतंकित होते हो जब स्त्री बेखौफ भटकती है ढूंढती हुई अपनाव्यक्तित्व एक ही साथ वेश्याओं और पत्नियों और प्रमिकाओं में! अब तो वह कहीं भी होसकती है उन आगामी देशों में जहां प्रणय एक काम होगा पूरा का पूरा 6. कितनी-कितनीलड़कियां भागती हैं मन ही मन अपने रतजगे अपनी डायरी में सचमुच की भागी लड़कियों सेउनकी आबादी बहुत बड़ी है क्या तुम्हारे लिए कोई लड़की भागी? क्या तुम्हारी रातोंमें एक भी लाल मोरम वाली सड़क नहीं? क्या तुम्हें दाम्पत्य दे दिया गया? क्या तुमउसे उठा लाए अपनी हैसियत अपनी ताकत से? तुम उठा लाए एक ही बार में एक स्त्री कीतमाम रातें उसके निधन के बाद की भी रातें! तुम नहीं रोए पृथ्वी पर एक बार भी किसीस्त्री के सीने से लगकर सिर्फ आज की रात रुक जाओ तुमसे नहीं कहा किसी स्त्री नेसिर्फ आज की रात रुक जाओ कितनी-कितनी बार कहा कितनी स्त्रियों ने दुनिया भर मेंसमुद्र के तमाम दरवाजों तक दौड़ती हुई आयीं वे सिर्फ आज की रात रुक जाओ और दुनियाजब तक रहेगी सिर्फ आज की रात भी रहेगी ***