ग़ुलाम अली ग़ज़ल गा रहे थे. अचानक ठहरे और कहने लगे, 'माफ कीजिएगा, सुर ज़रा बहकगया था.' गले को भरोसा देकर वो फिर शुरू हुए और गाना पूरा किया.इन गुलाम अली के गुरु थे, बड़े गुलाम अली साहेब. आज भी वो उनका नाम लेने से कतरातेहैं. लेना पड़े तो कान पर हाथ लगा लेते हैं. तो जो गुलाम अली के गुरु थे, बड़ेगुलाम अली खां साहेब, उन्होंने लता मंगेशकर के बारे में एक बात कही थी, 'कम्बख़्तग़लती से भी बेसुरी नहीं होती!'इस एक पंक्ति में आप इस करिश्माई गायिका के लिए एक उस्ताद फनकार का प्रशंसा मिश्रितस्नेह देख सकते हैं. आप अपनी अगली पीढ़ी से फख़्र से कह सकते हैं कि आपने लता ताईको अपनी आंखों से देखा था.दूरदर्शन देखा होगा तो महाभारत में 'मैं समय हूं' वाली आवाज याद होगी. वो हरीशभीमाणी की आवाज थी. हरीश ने 21 देशों के 53 शहरों में लता मंगेशकर के 123 प्रोग्रामका संचालन किया था. बाद में उन्होंने इन अनुभवों पर डायरी लिखनी शुरू कर दी. इसीडायरी के हिस्से को उन्होंने बाद में एक किताब के तौर पर छापा. नाम था, 'इन सर्च ऑफलता मंगेशकर.'आज लता मंगेशकर को इसी किताब के कुछ हिस्सों से याद करते हैं:1पूरा गोवा खरीदना चाहते थे लता के पापाइंदौर में जब लता का जन्म हुआ था तो मास्टर दीनानाथ कामयाबी के चरम पर थे. उस समयउन्हें मराठी मंच का सबसे पॉपुलर सिंगर-एक्टर माना जाता था. सांगली की एक गली मेंउन्होंने 13 कमरों वाला दोमंजिला महल सरीखा घर बनाया था. इस गली को बाद में'दीनानाथ रस्ता' कहा जाने लगा. नागपुर से लेकर खानदेश तक के हर बैंक में उनके नामका खाता था. उनकी एक स्टेज परफॉर्मेंस की लागत उन दिनों में भी चकरा देने वाली रकमथी- 70 हजार रुपये.पिता दीनानाथ.मास्टर दीनानाथ के पास गोवा में आम और काजू के बाग थे. ये जानकर बहुत सारे लोगचौंकेंगे, लेकिन सच है कि उस वक्त उन्होंने एक पहाड़ी 2 लाख रुपये में खरीद रखी थी.उनका सपना था, 'अगर देवी लक्ष्मी मुझ पर इसी तरह प्रसन्न रहीं तो 50 साल की उम्र तकमैं पूरा गोवा प्रदेश पुर्तगाली घुसपैठियों से खरीद लूंगा.'26 महीने की उम्र में संगीत से प्यार?मंगेशकर परिवार मानता है कि लता ने अपने संगीत की तरफ रुझान का संकेत बोल फूटने सेपहले ही दे दिया था. दीनानाथ मंगेशकर पोर्च में बैठकर सारंगी बजा रहे थे तभी उनकीनजर नन्ही लता पर गई. 6 महीने की वो बच्ची मुट्ठी भर मिट्टी अपने मुंह में डालने हीवाली थीं. उन्होंने सारंगी उठाकर उसे प्यार से झिड़कना चाहा. लेकिन वे हैरान रह गएजब उस बच्ची ने सांरगी के तार को ठीक उसी तरह छेड़ दिया, जिस तरह वे बजा रहे थे.'ये लड़की अद्भुत है!'- पिता नि:शब्द थे.लता.3तीन दर्दनाक महीने5 साल की उम्र में लता को भयंकर चेचक हो गई थी. हर किसी को आशंका थी कि वह चल बसेगीया फिर उसका चेहरे से दाग कभी नहीं जाएंगे. घावों में मवाद पड़ गया था और जरा भीमौका लगने पर कीड़े बच्ची पर हमला कर देते. उसकी मां या तो उसे केले के पत्तों परलिटाती या उनको लपेट देती और उसे धीरे-धीरे हिलाती. जब मां उसे लोरियां सुनाती तोरोती-कराहती बच्ची अकसर उनका साथ देती थी. डॉक्टरों को उसकी आंखों की रोशनी जाने काडर था. इस भयंकर बीमारी की चपेट में वो पूरे तीन महीने रही. जब वो ठीक हो गईं तोउनके पिता ने बाजे वालों को बुलाया. मां ने अनाज-नारियल औऱ महंगी साड़ियां शगुन केतौर पर बांटी और बेटी का पुनर्जन्म मनाया.4मधुबाला की शर्त!तब फिल्म इंडस्ट्री के बाहर लोग यही सोचते थे कि म्यूजिक डायरेक्टर ही सिंगर चुनतेहैं. लेकिन ये काम तब एक्टर और एक्ट्रेस भी करने लगे थे. लता ने एक टीवी इंटरव्यूमें कहा था, 'मधुबाला जो कॉन्ट्रैक्ट करती थीं, उसमें ये शर्त भी होती थी कि उन परजो भी गाने फिल्माए जाएंगे उन्हें मैं ही गाऊंगी.'हरीश भीमाणी ने एक जलनखोर प्लेबैक फीमेल सिंगर के बारे में भी लिखा, जिसने लता केबारे में एक बात कही थी. हरीश के मुताबिक, वो उस महिला के पास रेडियो इंटरव्यू केलिए टेप रिकॉर्डर लेकर गए थे. लता के बारे में एक नाजुक सवाल का जवाब देने से पहलेउन्होंने कहा, 'अगर आप किसी मैगजीन से होते तो मैं बहुत कुछ कहती. क्योंकि छपे हुएशब्दों का खंडन कभी भी किया जा सकता है. लेकिन यहां मेरी आवाज़ पहचान ली जाएगी.' येकहने के बाद वे एक असहज हंसी हंसने लगी!हरीश ने लिखा, 'मैं उस कलाकार का नाम यहां लिख सकता था, लेकिन वो इस बात से मुकर भीसकती थी.'5कविता कृष्णमूर्ति को इस तरह चौंकाया!एक दिलचस्प किस्सा कविता कृष्णमूर्ति का भी है. 1982 के आस-पास कविता ने बप्पी लहरीके लिए एक डबिंग आर्टिस्ट के रूप में राजकुमार कोहली की एक फिल्म के लिए एक गानागाया था. उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि बाद में ये गाना किसी पॉपुलर सिंगर की आवाजमें रिकॉर्ड किया जाएगा. कविता ने बताया, 'मुझे फिल्म का नाम याद नहीं, पर वो गीतथा, 'ओ मेरे सजना' और वो शिवरंजनी राग में था. मुझे अपनी फीस मिली और मैं इस बारेमें भूल गई. बाद में मैंने एक तमिल मैगजीन में पढ़ा कि बप्पी लहरी के इस गाने कीरिकॉर्डिंग के लिए लता मंगेशकर गई थीं और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज़ में डब कियागया गाना सुनने के बाद उन्होंने उसे रिकॉर्ड करने से मना कर दिया.'कविता सन्न रह गईं. उन्हें लगा कि ठीक है, हमें लीड सिंगर के तौर पर मौका नहींमिलता. लेकिन क्या इसका ये मतलब है कि हमसे 'डब' करने वाले गाने भी छीन लिए जाएंगे.लेकिन कुछ दिनों में उन्होंने यही खबर एक हिंदी मैगजीन में डिटेल में पढ़ी. लतास्टूडियो पहुंचीं, गीत पढ़ा, धुन सुनी और फिर डब किए हुए गीत को सुनने की इच्छाजताई. वो गीत सुनने के बाद उन्होंने कहा, 'इस लड़की ने तो कमाल कर दिया है. फिर आपमेरी आवाज में क्यों रिकॉर्ड करना चाहते हैं?' कविता को यकीन ही नहीं हो रहा था. वेहैरत में पड़ गईं, 'क्या एक बेस्ट सिंगर के कहने पर एक नए कलाकार को मौका मिल सकताहै?'6उसने कहा, 'लता, तुम सफेद चादर लपेटकर क्यों चली आती हो?'1940 के दशक में म्यूजिक की दुनिया में जीएम दुर्रानी का जलवा था. उस दौर में कोईनया म्यूजिक डायरेक्टर उनके पास पहुंचता तो दुर्रानी उससे कहते, 'दुर्रानी का गानाचाहते हो तो अच्छी धुन बनाना सीख आओ.'एक बार लता, नौशाद साहब और दुर्रानी गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे. लेकिन दुर्रानीका बर्ताव शर्मीली और विनम्र लता के साथ ठीक नहीं था. उनकी ज़ुबान में कामयाबी काउग्र एहसास झलकता था. नौशाद साहब उस घटना के गवाह थे. उन्होंने बताया, 'उस समयसिर्फ दो माइक होते थे. एक संगीतकारों के लिए, दूसरा गायकों के लिए. इस तरह वेदोनों (दुर्रानी और लता) आमने सामने खड़े थे. जैसे ही दुर्रानी की लाइन पूरी होती,वे कोई शरारत करने लगते. मैंने उनसे बाद में कहा कि वे चुपचाप खड़े रहें और अपनेमसखरेपन से उस लड़की के काम में अड़चन न डालें. क्योंकि लड़की (लता) नई थी और इससेउसका कॉन्फिडेंस डगमगा सकता था.'लेकिन 'नई लड़की' दुर्रानी की हरकतों से घबराने की जगह नाराज हो रही थी. लता के साथएक और रिकॉर्डिंग के दौरान दुर्रानी ने पुरानी हरकतें शुरू कर दीं. उन्होंने लता केसादे पहनावे का मजाक उड़ाते हुए लखनवी उर्दू में कहा, 'लता, तुम रंगीन कपड़े क्योंनहीं पहनती? तुम कैसे इस तरह सफेद चादर लपेटकर चली आती हो?' लता ने बिलाशक ये सोचाहोगा कि उर्दू जबान की तहजीब से वाकिफ ये आदमी कैसे एक औरत से गैरवाजिब नजदीकीदिखाते हुए उसे 'आप' की जगह 'तुम' कह रहा है. लता ने कहा, 'मैं सोचती थी कि ये आदमीमेरे पहनावे की जगह मेरे गायन पर ज्यादा ध्यान देगा. उसी पल मैंने फैसला किया किमैं उस कलाकार के साथ फिर नहीं गाऊंगी.'7और जब शोहदे को सिखाया सबक!लता ने बताया कि अगर मेरी किसी चीज की कोई बहुत तारीफ कर देता था तो मैं वो चीज उसेदे देती थी. उन दिनों फिल्म 'महल' बन रही थी. फिल्म के एक गाने के लिए हुई बैठक मेंगीतकार नक्शाब ने लता की चमचमाती नई कलम की बहुत तारीफ की. 'लीजिए इसे आप रखिए' येकहते हुए लता ने ये कलम उन्हें थमा दी.लेकिन लता भूल गईं कि उस कलम पर उनका नाम खुदा हुआ था. उन्हें बिल्कुल इल्म नहीं थाकि इस गीतकार का इरादा कुछ और है. नक्शाब ने 'लता' के नाम वाली कलम फिल्म इंडस्ट्रीमें सबको दिखानी शुरू कर दी कि उन दोनों के बीच 'कुछ चल रहा है.' लता ने इस मामलेमें चुप रहना ही ठीक समझा क्योंकि वे जानती थीं कि अगर वे उन्हें झूठा साबित करनेकी कोशिश करेंगी तो बवाल और बढ़ेगा और लोग मज़ा लेंगे. एक और रिकॉर्डिंग में नक्शाबफिर से टकराए. वे ये जताने को डेस्परेट थे कि लता उनके प्यार में पड़ गई हैं. इसलिएरिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद वो बीच-बीच में उनके बूथ में घुस जाते थे और उनसेडूबकर गाने पर जोर देते थे. 'इन लाइनों में इतनी मुहब्बत भर दो कि ऐसा लगे कि तुमअपने प्रेमी के सामने बिना शर्त समर्पण कर रही हो.' लता ने यहां भी अपना गुस्सा पीलिया.लेकिन उस दिन तो हद हो गई जब ये गीतकार अचानक लता के घर पहुंच गए. लता अपने नानाचौक वाले घर के अहाते में बहनों के साथ खेल रही थीं. उस समय वे महज हंसती-खेलतीकिशोरी ही तो थीं.लता ने बताया, 'अगर मैं अकेली होती तो उनके आने से दिक्कत में पड़ सकती थी, लेकिनअपनी बहनों के सामने मैं उस चिपकू आदमी से एक शब्द भी नहीं सुनना चाहती थी. मैंउन्हें सड़क पर ले गई. गुस्से में साड़ी का पल्लू कमर में खोंसते हुए मैंने पूछा किमेरी इजाजत के बिना मेरे घर आने की उनकी हिम्मत कैसे हुई. मैंने उन्हें धमकाया,'अगर मैंने दोबारा तुम्हें यहां देखा तो तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े कर इस गटर में फेंकदूंगी. ये मत भूलना कि मैं मराठा हूं.''8मुसलमान के साथ न गाने की अफवाह!साठ के दशक में लता और तलत महमूद के डुएट गाने की रिकॉर्डिंग का प्रपोजल आया, लेकिनकिन्हीं वजहों से पूरा नहीं हो सका. तब अफवाह फैली कि लता ने ये गाना इसलिए नहींगाया क्योंकि उनका को-सिंगर मुसलमान था. तलत महमूद ने इस अफवाह पर भरोसा भी कर लियाथा.दिलीप कुमार संग रक्षाबंधन.लेकिन अच्छी बात रही कि वक्त रहते ये गलतफहमी दूर हो गई. दोनों आमने सामने मिले.उत्तेजित लता ने तलत से पूछा, 'आपने इस तरह की घटिया कहानी पर कैसे यकीन कर लिया?आप ये नहीं जानते कि रफी साहब, नौशाद साहब भी मुसलमान हैं? मैं हमेशा उनके साथ कामकरती हूं. मैं यूसुफ भाई (दिलीप कुमार) को राखी बांधती हूं. आप ये भी भूल गए किमैंने अमन अली और अमानत खां साहब की शागिर्द के तौर पर सीखना शुरू किया था. वेदोनों मुसलमान थे.'--------------------------------------------------------------------------------किताबवाला: लता मंगेश्कर को कौन दे रहा था खाने में धीमा ज़हर?