जैसे ही प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश आया. 8 नवंबर रात 8 बजे. उधर संदेशआया इधर पब्लिक पैनिकिया गई. लोग मिन्टों का काम सिकन्टों में करने के लिए भागे ATMकी तरफ. कुछ लोकल दुकानदारों के पास गए. छुट्टा कराने. कुछ जूलरी शॉप्स पर गए. सोनाखरीदने. लेकिन मुंह बनाकर आ गए. लेकिन ATM पर पहुंचे लोगों में कुछ तो हुसियारनिकले, लेकिन कुछ अकबकाए थे. आधा आंखों देखा और आधा कानों-सुना हाल बता रहे हैं.1एक सज्जन के पास कुल जमा 30 रुपये थे. जब खबर पता चली तो लपके ATM की ओर. वहां 400रुपये निकालने की कोशिश की, पर मशीन ने मना कर दिया. उन्हें कायदे से लौट जानाचाहिए था. पर जाने क्या दिमाग में आया, 500 रुपये एंटर कर दिए. दिमाग में रहा होगाकि 30 रुपये से कैसे काम चलेगा. कुछ तो निकाल लें. मशीन तो मशीन है. उसने घरघरा के500 का एक नोट निकालकर दे दिया. इन्होंने नोट उठाया और पर्स में धर लिया. फिर कुछसेकेंड में अचानक खटका हुआ कि अमां अब इसका करेंगे क्या? लेने गए थे ककड़ी. हाथ लगगई लकड़ी.2एक वैशाखनंदन कानों में ईयरफोन लगाकर ATM पहुंचे. बड़े रिलैक्स अंदाज़ में. दिमागमें रहा होगा कि दो दिन कैश की समस्या रहेगी, तो ज्यादा से ज्यादा निकाल लिया जाए.ATM मशीन में उन्होंने 2000 रुपये एंटर किए. मशीन ने 500 के दो और हजार का एक नोटनिकाल के धर दिया. अब इनको काटो तो खून नहीं. इत्तू सा मुंह लेकर चले आए.3एक भाई और पहुंचे. थोड़े हुसियार थे तो उन्हें याद था कि 500 और 1000 रुपये नहींनिकालने हैं. इसलिए उन्होंने ATM मशीन से 800 रुपये निकालने का अनुरोध किया. मशीनने एक नोट 500 का और 100 के तीन नोट निकाल के रख दिए. बता रहे थे कि पीछे से लाफ्टरकी आवाज़ भी आई. तो भइये ये तो कॉमन सेंस है. ज्यादा गणित की जरूरत नहीं है.400-400 दो बार में निकाल लेते. बेस्ट रहता. अब क्या! अब छीलो घुइयां. करो उधार!