'नोट बैन' के बाद इन 3 लोगों को मिलना चाहिए वीरता और मूर्खता पुरस्कार
आदमी पैनिक करता है तो दिमाग काम करना बंद कर देता है.
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कुलदीप
9 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 9 नवंबर 2016, 06:20 AM IST)
जैसे ही प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संदेश आया. 8 नवंबर रात 8 बजे. उधर संदेश आया इधर पब्लिक पैनिकिया गई.
लोग मिन्टों का काम सिकन्टों में करने के लिए भागे ATM की तरफ. कुछ लोकल दुकानदारों के पास गए. छुट्टा कराने. कुछ जूलरी शॉप्स पर गए. सोना खरीदने. लेकिन मुंह बनाकर आ गए.
लेकिन ATM पर पहुंचे लोगों में कुछ तो हुसियार निकले, लेकिन कुछ अकबकाए थे. आधा आंखों देखा और आधा कानों-सुना हाल बता रहे हैं.
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एक सज्जन के पास कुल जमा 30 रुपये थे. जब खबर पता चली तो लपके ATM की ओर. वहां 400 रुपये निकालने की कोशिश की, पर मशीन ने मना कर दिया. उन्हें कायदे से लौट जाना चाहिए था. पर जाने क्या दिमाग में आया, 500 रुपये एंटर कर दिए. दिमाग में रहा होगा कि 30 रुपये से कैसे काम चलेगा. कुछ तो निकाल लें. मशीन तो मशीन है. उसने घरघरा के 500 का एक नोट निकालकर दे दिया. इन्होंने नोट उठाया और पर्स में धर लिया. फिर कुछ सेकेंड में अचानक खटका हुआ कि अमां अब इसका करेंगे क्या?
लेने गए थे ककड़ी. हाथ लग गई लकड़ी.
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एक वैशाखनंदन कानों में ईयरफोन लगाकर ATM पहुंचे. बड़े रिलैक्स अंदाज़ में. दिमाग में रहा होगा कि दो दिन कैश की समस्या रहेगी, तो ज्यादा से ज्यादा निकाल लिया जाए. ATM मशीन में उन्होंने 2000 रुपये एंटर किए. मशीन ने 500 के दो और हजार का एक नोट निकाल के धर दिया. अब इनको काटो तो खून नहीं. इत्तू सा मुंह लेकर चले आए.
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एक भाई और पहुंचे. थोड़े हुसियार थे तो उन्हें याद था कि 500 और 1000 रुपये नहीं निकालने हैं. इसलिए उन्होंने ATM मशीन से 800 रुपये निकालने का अनुरोध किया. मशीन ने एक नोट 500 का और 100 के तीन नोट निकाल के रख दिए. बता रहे थे कि पीछे से लाफ्टर की आवाज़ भी आई.
तो भइये ये तो कॉमन सेंस है. ज्यादा गणित की जरूरत नहीं है. 400-400 दो बार में निकाल लेते. बेस्ट रहता. अब क्या! अब छीलो घुइयां. करो उधार!