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मोदी जी हमें मस्त लगे, रुपया खाने वालों को दस्त लगे

मितरों नरेंद्र भाई ने अपना काम कर दिया है, अब हमारी बारी है.

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सौरभ द्विवेदी
9 नवंबर 2016 (Updated: 8 नवंबर 2016, 04:20 AM IST)
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बहुत बहुत बधाई. देश को. काले धन यानी कि भ्रष्टाचार पर इससे सख्त, क्रांतिकारी कदम को लेने की हिम्मत आज तक कोई नहीं कर पाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा किया. इसलिए उन्हें भी बधाई और शुभकामनाएं. मगर असली लड़ाई अब शुरू हुई है. सरकार ने अपना इरादा जाहिर कर दिया. अब हमारी आपकी बारी है. हम क्या कर सकते हैं इस मौके पर. ये रहीं मुझ मध्यवर्गीय नौकरीपेशा पत्रकार की सलाह:

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कई लोग जानकारी के अभाव में पैनिक कर रहे हैं. उन्हें तसल्ली से बताइए. समझाइए. ये आपके पड़ोसी, घर में खाना बनाने वाली दीदी, ऑटो वाले भइया या रिश्तेदार कोई भी हो सकता है. हम अच्छे नागरिक हैं. नौकरी से, मेहनत के काम से, ईमानदारी के व्यापार से अपना घर चलाते हैं. हमारे पास तो नंबर दो क्या, नंबर डेढ़ का भी कोई पैसा नहीं है. नंबर एक नागरिक. नंबर एक कमाई. ये हमारे लिए सौगात है. रही ATM पर लंबी लाइन की बात. बैंकों में भीड़ की बात. कुछ दिनों की बात है. जब युद्ध होता है तो देश में इमरजेंसी लगाई जाती है. थोड़ी दिक्कत होती है, मगर लंबे समय में भला होता है. ये आर्थिक युद्ध है. कुछ महीनों में सब ठीक हो जाएगा. बैंक नए नोट दे देंगे. और कार्ड, ऑनलाइन ट्रांजेक्शऩ जैसे विकल्प तो अभी भी हैं ना!

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सब कह रहे हैं कि गरीबों और कारोबारियों को दिक्कत होगी. जन धन योजना के तहत देश के ज्यादातर परिवारों का खाता खुल चुका है. गरीबों के पास कैश में बहुत पूंजी नहीं होती. जो है, उसे वे बैंक में जमा करवा सकते हैं. कारोबारियों से सरकार बार बार कहती आई है. हर बिल की रसीद बनाइए. दीजिए. जिन ईमानदार कारोबारियों ने ऐसा किया होगा. उन्हें कोई दिक्कत ही नहीं. हर पैसे का हिसाब है. आराम से जो भी काउंटर कैश या कलेक्शन कैश है, उसे बैंक में जमा करवा दें. कुछ दिन लेन देन की दिक्कत आएगी. मगर देश तो उनका भी है न. तो सह लिया जाएगा बड़े भले के लिए.

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नेताओं की क्या कहें. सबसे ज्यादा ईमानदार वही होते हैं. देश के सच्चे सिपाही. कभी एक पैसे का गलत नहीं किया. इसीलिए तो संसद में, विधानसभाओं में पूरी सहमति के साथ अपना वेतन बढ़ा लेते हैं. एक नजर डाली उनके सीटीसी पर आज सुबह. ठीक पैकेज है सबका. और कोई भी पार्टी नोट लेकर तो टिकट बांटती नहीं. विरोधी या पार्टी से निकाले गए नेता झूठा इल्जाम लगाते हैं. तो उन्हें दिक्कत नहीं. किसी भी सत्तारूढ़ पार्टी ने माइनिंग या इस तरह के दूसरे घोटालों से पैसा नहीं बनाया. तो उन्हें भी दिक्कत नहीं. वो समाज के नेता हैं. समाज उन्हें चंदा देगा. प्योर व्हाइट. जैसे खीसें निपोरने पर दांत दिखते हैं, वैसा ही. तो उन्हें तो इस फैसले का बांहें पसार स्वागत करना चाहिए. और हां. एक नई मिठाई आई है मार्केट में. लोललता. वो भी जरूर खाएं खुशी में .

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रिएल एस्टेट वाले लोग सुना है परेशान हैं. लोग नाहक उन्हें बदनाम कर रहे हैं. कि सबसे ज्यादा काला धन नेताओं का, कारोबारियों का, माफिया का इसी में लगता है. वो तो सब कुछ व्हाइट में करते हैं. उनकी बिल्डिंग में आने वाली नमी पर पनपी सफेदी की तरह. तो उन्हें क्या दिक्कत. वैसे भी वो लोगों की सेवा करना चाहते हैं. इसीलिए अखबार में इतने सुंदर सुंदर ऐड और डील देते हैं. आपका आशियाना, हमारा सपना टाइप. तो उनके लिए सरकार पहले ही एक एक्ट ले आई है. ताकि वो लोगों की और अनुशासन के साथ सेवा कर सकें. और अब ये फैसला तो सोने पर सुहागा है. कोई उन पर उंगली नहीं उठा सकता. खबरदार.

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कुछ लोग जूलरी वालों का जिक्र कर रहे हैं. कल शाम इस फैसले के बाद सुना कि सोने की खरीद में बढ़ोतरी हो गई. जूलर्स पर भी इल्जाम गलत है. वो तो माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. लक्ष्मी जी धन धान्य के साथ अच्छे चरित्र की भी कामना करती हैं. तो उनके किसी पुत्र ने गलत कामों से तो सोना, पैसा इकट्ठा किया नहीं होगा. और सोना तो लोगों ने अपनी गाढ़ी मेहनत के पैसे से खरीदा है. चार साल पहले माता रानी के जागरण के चंदे की 11 रुपये की रसीद भी लोक संभालकर रखते हैं तो फिर सोना खरीद की रसीद तो रखी ही होगी. फिर टेंशन किस बात की.

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और आखिर में वो गुंडे, जुए की फड़ चलाने वाले, डाकू, नशे का कारोबार करने वाले, भ्रष्ट ढंग से अपने पद का दुरुपयोग कर पैसा बनाने वाले..अपनी मर्जी से आप भी इस लिस्ट में कुछ नाम जोड़ लें. तुम सब जहन्नुम में जाओ. ओहो गुस्सा हो गए. अच्छा मत जाओ. तुम्हारा जहन्नुम यहीं आ गया है. जब जाओगे नहीं तो सरका दिए जाओगे. जैसे हम कूड़ा सरकाते हैं. फर्श से. डस्टबिन में. तूम कूड़ा. तुम्हारा काला पैसा कूड़ा. दीवाली बीती है. मगर सफाई का ये दौर बाकी था. सब जाले हट जाएंगे. सब उजला होगा. घर के नए पेंट की तरह. देशवासियों. अब हमारे आपके कमर कसने की बारी है. इस फैसले को सही साबित करने की बारी. आपस में बात करें. अफवाहों पर ध्यान न दें. जो दिक्कतें हो रही हैं, उन्हें आपसी सहयोग के साथ निपटाएं. किसी के घर में शादी होगी. कोई और बड़ा काम होगा. चेक इस्तेमाल करें. अगर कैश की ही बात है तो आपस में एक दूसरे का सहयोग करें. न तो पैसा खत्म हो गया है, न ही उन्हें दर्शाने वाले नोटों का चलन. सिर्फ फर्जीवाड़ा खत्म हुआ है. जल्द ही बैंक 500 और 2000 के नए नोट जारी करेगा. आपके खाते का पैसा आपका था और आपका ही रहेगा.

आपके और हमारे नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से कई वैचारिक मतभेद हो सकते हैं. लेकिन इस फैसले के साथ खड़ा होना चाहिए. मोदी के आलोचक अर्थशास्त्री कह रहे हैं कि इससे काले धन की समस्या खत्म नहीं हो जाएगी. लेकिन उनमें से कई ये भी मानते हैं कि ये फैसला काले धन पर सबसे बड़ी चोट पहुंचाएगा. रिस्क लेने या न लेने में ज्यादातर लोग रिस्क के साथ ङी थे.

बाकी जो खाता था, नोट. आपके और हमारे. टैक्स के. देश के. उनको दस्त होने शुरू हो गए हैं. कल रात से ही. हमारी आपकी रात बीत गई. सुबह है. रौशनी है. उम्मीद है. जिसका नाम भारत है. हमारा देश. जय हिंद.
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