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'आस्था, समर्पण के बदले हड्डियों की बारिश होती है'

खलील जिब्रान की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी 5 छोटी कहानियां.

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विकास टिनटिन
10 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 6 मई 2016, 08:27 AM IST)
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तसल्ली के साथ ज़िन्दगी को मुड़कर देखना ही उसे फिर से जीने जैसा है: खलील जिब्रान

कवि. लेखक. पेंटर. खलील जिब्रान. उनका लिखा पढ़ते हुए तस्वीर सी सामने बनने लगती. बनाई तस्वीर को देखते हुए तमाम लिखे हुए पन्ने आंखों के सामने नजर आने लगते हैं. 6 फरवरी 1883 को जन्मे लेबनानी कवि और लेखक खलील जिब्रान ने आज ही के दिन (10 अप्रैल, 1931) दुनिया को अलविदा कहा था. खलील की लिखी कहानियां में वो आज भी जिंदा हैं. पढ़ते वक्त लगता है कि जैसे कोई दोस्त बालों पर हाथ फेरते हुए किस्सा सुना रहा है. खलील जिब्रान की पुण्यतिथि पर दी लल्लनटॉप आपके लिए लाया है खलील जिब्रान की 5 छोटी-छोटी कहानियां.
  1. लोमड़ी सूर्योदय के वक्त अपनी परछाई देख लोमड़ी ने कहा, 'आज दोपहर में मैं ऊंट खाऊंगी.' सुबह का सारा वक्त उसने ऊंट की तलाश में गुजार दिया. फिर दोपहर को अपनी परछाई देख उसने कहा, 'एक चूहा ही काफी होगा.'
  2. अंधेर नगरी राजमहल में एक रात भोज दिया गया. एक आदमी वहां आया और राजा के आगे दंडवत लेट गया. सब लोग उसे देखने लगे. उन्होंने पाया कि उसकी एक आंख निकली हुई थी और खखोड़ से खून बह रहा था. राजा ने उससे पूछा, “तुम्हारा यह हाल कैसे हुआ?”आदमी ने कहा, “महाराज, पेशे से मैं एक चोर हूं. अमावस्या होने की वजह से आज रात मैं धनी को लूटने उसकी दुकान पर गया. खिड़की के रास्ते अंदर जाते हुए मुझसे ग़लती हो गई और मैं जुलाहे की दुकान में घुस गया. अंधेरे में मैं उसके करघे से टकरा गया और मेरी आंख बाहर आ गई. अब, हे महाराज! उस जुलाहे से मुझे न्याय दिवलाइए.” राजा ने जुलाहे को बुलवाया. वह आया. निर्णय सुनाया गया कि उसकी एक आंख निकाल ली जाए.“महाराज!” जुलाहे ने कहा, “आपने उचित न्याय सुनाया है. वाकई मेरी एक आंख निकाल ली जानी चाहिए. किंतु मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कपड़ा बुनते हुए दोनों ओर देखना पड़ता है इसलिए मुझे दोनों ही आंखों की ज़रूरत है. लेकिन मेरे पड़ोस में एक मोची रहता है, उसके भी दो ही आंखें हैं. उसके पेशे में दो आंखों की ज़रूरत नहीं पड़ती है.”राजा ने तब मोची को बुलवालिया. वह आया. उन्होंने उसकी एक आंख निकाल ली. न्याय पूरा हुआ.
  3. चतुर कुत्ता एक चतुर कुत्ता एक दिन बिल्लियों के एक झुंड के पास से गुज़रा. कुछ और करीब जाने पर उसने देखा कि वे कोई योजना बना रही थीं और उसकी ओर से लापरवाह थीं. वह रुक गया. उसने देखा कि झुंड के बीच से एक जाबड़, गंभीर बिल्ला खड़ा हुआ था. उसने उन सब पर नज़र डाली और बोला, “भाइयो! दुआ करो. बार-बार दुआ करो. यक़ीन मानो, दुआ करोगे तो चूहों की बारिश ज़रूर होगी.”यह सुनकर कुत्ता मन-ही-मन हंसा. “अरे अंधे और बेवकूफ़ बिल्लो! शास्त्रों में क्या यह नहीं लिखा है और क्या मैं, और मुझसे भी पहले मेरा बाप, यह नहीं जानता था कि दुआ के, आस्था के और समर्पण के बदले चूहों की नहीं, हड्डियों की बारिश होती है.” यह कहते हुए वह पलट पड़ा.
  4. मोती एक बार, एक सीप ने अपने पास पड़ी हुई दूसरी सीप से कहा, 'मुझे अंदर ही अंदर बेहद तकलीफ हो रही है. इसने मुझे चारों ओर से घेर रखा है और मैं बहुत तकलीफ में हूं. दूसरी सीप ने घमंड से चूर आवाज में कहा, 'शुक्र है! भगवान का और इस समुद्र का कि मेरे अंदर ऐसी कोई तकलीफ नहीं है. मैं अंदर और बाहर सब तरह से स्वस्थ और संपूर्ण हूं. उसी वक्त वहां से एक केकड़ा गुजर रहा था. उसने इन दोनों सीपों की बातचीत सुनकर उस सीप से, जो अंदर और बाहर से स्वस्थ और संपूर्ण थी, कहा, 'हां, तुम स्वस्थ और संपूर्ण हो. लेकिन तुम्हारी पड़ोसन जो तकलीफ सह रही है वह एक नायाब मोती है.'
  5. मेजबान 'कभी हमारे घर को भी पवित्र करो.' करुणा से भीगी आवाज में भेड़िए ने भोली-भाली भेड़ से कहा. 'मैं जरूर आती बशर्ते तुम्हारे घर का मतलब तुम्हारा पेट न होता.' भेड़ ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया. खलील जिब्रान की कहानी- तानाशाह की बेटी

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