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पांच नेता जो साल 2018 में दुनिया से अलविदा हो गए

इनमें पूर्व सीएम, केंद्रीय मंत्री और पूर्व पीएम शामिल थे.

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28 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 28 दिसंबर 2018, 03:02 PM IST)
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ये राजनेता इस साल दुनिया को अलविदा कह गए.
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साल 2018 का आखिरी टाइम चल रहा है. कुछ दिन में साल 2019 शुरू हो जाएगा. लेकिन कुछ राजनेता ऐसे रहे जिनके लिए 2018 उनके जीवन का आखिरी साल साबित हुआ. इस साल देश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तमिलनाडु के पूर्व सीएम करुणानिधि सरीखे कई बड़े राजनेताओं को खो दिया. आइए जानते हैं कौन-कौनसे राजनेता इस साल दुनिया से रुख्सत हो गए.

1. अटल बिहारी वाजपेयी

भारत रत्न से सम्मानित और देश के तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त को निधन हो गया था. वो 93 साल के थे. वो 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पैदा हुए थे. 1951 से वो सक्रिय राजनीति में रहे. वाजपेयी पहले जनसंघ, फिर जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे. 1977 में वो पहली बार केंद्रीय मंत्री बने.


अटल बिहारी वाजपेयी.
अटल बिहारी वाजपेयी.

1996 में वो पहली बार 13 दिन के लिए पीएम बने. 1998 में 13 महीने और 1999 में पांच साल के लिए प्रधानमंत्री बने. 2004 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद वाजपेयी ने 2005 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया. 2009 में लकवे के अटैक के बाद से वो लाइमलाइट से दूर हो गए. 2015 में वाजपेयी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया. 16 अगस्त, 2018 को उनका निधन हो गया.

2. एम करुणानिधि

करुणानिधि का जन्म 1924 में हुआ था. अपने 60 साल से ज्यादा के राजनीतिक करियर में वो पांच बार तमिलनाडु के सीएम बने. करुणानिधि के नाम ये एक रिकॉर्ड भी है कि वो सबसे ज्यादा 13 बार विधायक बने. अपने पूरे करियर में करुणानिधि एक भी चुनाव नहीं हारे. पॉलिटिक्स में आने से पहले करुणानिधि फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रहे. वो फिल्में लिखा करते थे. करुणानिधि को फिल्म एक्टर एम. आर. राधा ने कलिंयार नाम दिया. कलिंयार ने अपने शुरुआती टाइम में पेरियार और अन्नादुराई के साथ एंटी ब्राह्मणवाद आंदोलन चलाया.

एम. करुणानिधि

1947 में पेरियार और अन्नादुराई के रास्ते अलग होने के बाद कलिंयार अन्ना के साथ हो गए. 1949 में डीएमके पार्टी बनाई. कलिंयार 33 साल की उम्र में 1957 में पहली बार विधायक बने. 1967 में डीएमके ने कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता से बेदखल कर पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई. यह झटका इतना बड़ा था कि कांग्रेस इसके बाद आजतक अपने दम पर तमिलनाडु में वापस सरकार नहीं बना पाई. गठबंधन में भी वो जूनियर पार्टी ही रहती है. 7 अगस्त, 2018 को करुणानिधि का निधन हो गया.

3. सोमनाथ चटर्जी

यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान लोकसभा स्पीकर रहे और सीपीएम नेता रहे सोमनाथ चटर्जी भी इस साल दुनिया से रुख्सत हो गए. सोमनाथ का जन्म असम के तेजपुर में 25 जुलाई 1929 को हुआ था. हालांकि उनकी पढ़ाई-लिखाई और परवरिश पश्चिम बंगाल में हुई. वो 10 बार सांसद रहे. 1996 में उनको बेस्ट पार्लियामेंटेरियन का अवॉर्ड मिला था. संसद में उन्होंने 500 से ज्यादा भाषण दिए.


सोमनाथ चटर्जी.
सोमनाथ चटर्जी.

आखिरी बार लोकसभा की प्रोसीडिंग्स करवाते हुए वह बोले थे, इस उम्र में मुझे लगा कि संन्यास ले लेना चाहिए. इसके बजाय कि मैं खुद को औरों पर थोपूं. ये बात हर नेता के लिए सीखने लायक है. जब स्पीकर के तौर पर 20 अकबर रोड में सोमनाथ रहने आए तो अपनी सादगी कायम रखी. चायपानी का खर्चा सरकारी मद से देने से इनकार कर दिया. विदेशी दौरे पर परिवार के लोग साथ जाते तो वह उनका खर्चा भी खुद उठाते थे. 13 अगस्त 2018 को सोमनाथ चटर्जी का देहांत हो गया.

4. नारायण दत्त तिवारी

यूपी और उत्तराखंड के सीएम रहे और कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे एनडी तिवारी का 18 अक्टूबर, 2018 को निधन हो गया. तिवारी तीन बार उत्तर प्रदेश और एक बार उत्तराखंड के सीएम रहे थे. इसके अलावा वो राजीव गांधी की कैबिनेट में विदेश और वित्त मंत्री भी रहे थे. 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के गवर्नर रहे. 1925 में नैनीताल पैदा हुए तिवारी ने आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया.


एनडी तिवारी.
एनडी तिवारी.

तिवारी पहली बार 1952 में नैनीताल से विधायक बने थे. इसके बाद उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता गया. 89 साल की उम्र में शादी करने के लिए भी तिवारी चर्चा में आए थे. राज्यपाल रहते हुए कथित सैक्स स्कैंडल के चलते तिवारी काफी विवादों में रहे थे. 18 अक्टूबर, 2018 को तिवारी का निधन हो गया.

5. अनंत कुमार

अनंत कुमार दक्षिणी बेंगलुरु से सांसद थे. इस शहर ने उन्हें छह बार संसद भेजा. वो वाजपेयी सरकार में भी मंत्री रहे थे. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अलावा वो पर्यटन, खेल और शहरी विकास मंत्रालय भी संभाल चुके थे. मोदी सरकार में उनके पास दो पोर्टफोलियो रहा. पहले उन्हें रसायन और उर्वरक मंत्रालय सौंपा गया. फिर जुलाई 2016 में उनको संसदीय मामलों का प्रभार दिया गया.

अनंत कुमार.

मई 2018 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव के कुछ ही समय पहले अनंत कुमार का कैंसर डायग्नोज़ हुआ. उन्होंने लंदन और न्यू यॉर्क में अपना इलाज करवाया. अक्टूबर के आखिर में ही वो न्यू यॉर्क के ‘मेमोरियल स्लोअन केटेरिंग कैंसर सेंटर’ से इलाज करवाकर लौटे थे. 12 नवंबर, 2018 को 59 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया.




वीडियो-राजीव गांधी ने अटल बिहारी को न्यूयॉर्क क्यों भेजा था?

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