हैदराबाद में, सुप्रीम कोर्ट जस्टिस उज्जल भुयान ने दो आम घटनाओं का उदाहरण दिया.दक्षिण दिल्ली के एक कामकाजी महिला छात्रावास में एक मुस्लिम छात्रा को उसके उपनामके कारण कमरा देने से इनकार कर दिया गया, और ओडिशा में माता-पिता ने एक दलित महिलाद्वारा पकाए गए मिड-डे मील को अस्वीकार कर दिया. इन घटनाओं का हवाला देते हुएउन्होंने तर्क दिया कि भारत की गहरी सामाजिक दरारें अभी भी संविधान में निहितसंवैधानिक नैतिकता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों से बहुत दूर हैं.