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कोर्ट के लिए किया था 'तानाशाही' शब्द का इस्तेमाल, यूट्यूबर को हुई 6 महीने की जेल

दिल्ली हाई कोर्ट ने यूट्यूबर और वकील गुलशन पाहुजा को कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया है. कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक कॉमेंट करने के आरोप में उनको छह महीने की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पाहुजा को अदालत की अवमानना करने का कोई पछतावा नहीं है.

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20 मई 2026 (अपडेटेड: 20 मई 2026, 06:22 PM IST)
Delhi high court judiciary youtuber gulshan pahuja
यूट्यूबर गुलशन पाहुजा को ज्यूडिशियरी के खिलाफ कॉमेंट करने के लिए 6 महीने की सजा मिली है.
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दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर और वकील गुलशन पाहुजा को ज्यूडिशियरी के खिलाफ अपमानजनक कॉमेंट करने के लिए छह महीने की सजा दी है. साथ ही, उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगा है. पाहुजा को क्रिमिनल कंटेप्ट का दोषी पाया गया है.

ज्यूडिशियरी के खिलाफ अपमानजक कॉमेंट की सजा

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, गुलशन पाहुजा पर कोर्ट को टारगेट करने वाले वीडियो बनाने और कोर्ट में सुनवाई के दौरान ज्यूडिशियरी के बारे में मनमर्जी और तानाशाही जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने इस अपराध के लिए उनको 6 महीने की सजा सुनाई. दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने कहा, 

अगर हम उचित दंड नहीं देंगे तो ये आरोपी को भविष्य में फिर से इस तरह की हरकत करने के लिए प्रोत्साहन देने जैसा होगा. कम सजा देना उसे और ऐसा करने के लिए और ज्यादा साहसी बनाना होगा.

विवादित वीडियो गुलशन पाहुजा ने अपने यूट्यूब चैनल 'फाइट 4 ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स' पर अपलोड किए थे. वीडियो में उन्होंने शिवनारायण शर्मा और दीपक सिंह नाम के दो वकीलों का इंटरव्यू किया था. इंटरव्यू के दौरान वकीलों पर ज्यूडिशियरी के खिलाफ अपमानजनक कॉमेंट करने का आरोप है.

तीन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाकर इस वीडियो के खिलाफ क्रिमिनल कंटेम्प्ट चलाने की मांग की थी. इस याचिका के बाद दोनों वकीलों (शिव नारायण शर्मा और दीपक सिंह) ने बिना शर्त माफी मांग ली. उन्होंने कहा,

 हमने इंटरव्यू को ऑनलाइन अपलोड करने की सहमति नहीं दी थी. साथ ही हमें वीडियो के साथ लगाए गए आपत्तिजनक थंबनेल या बैनर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी माफी को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही रद्द कर दी. लेकिन गुलशन पाहुजा ने अपने कॉमेंट को सही ठहराते हुए उन्हें न्यायिक सुधारों के लिए जनहित की वकालत करने वाले अभियान का हिस्सा बताया.  

Delhi High Court ने सुनाई सजा

हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल को गुलशन पाहुजा को कोर्ट की क्रिमिनल कंटेम्प्ट का दोषी पाया. इसके बाद उनको दी जाने वाले सजा पर एक अलग सुनवाई शुरू हुई. सजा पर सुनवाई के दौरान पाहुजा ने एक बार फिर से आपत्तिजनक कॉमेंट किया. उन्होंने कहा, 

अदालतों की मनमर्जी बढ़ती जा रही है मुझे इंडियन ज्यूडिशियल सिस्टम से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है.

उन्होंने अदालतों और तानाशाहों के बीच तुलना करते हुए कहा कि मनमर्जी का दूसरा अर्थ तानाशाही होता है. पाहुजा ने कंटेम्प्ट केस चलाने के तरीके पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा,

 मेरे  अपलोड किए गए वीडियो से जुड़े ज्यूडिशियल फाइलों को तलब नहीं  किया गया. वीडियो में नामित ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से गवाह के तौर पर पूछताछ नहीं की गई और मुझे उनसे जिरह करने का मौका नहीं दिया गया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा, 

अवमानना करने वाले को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है. साथ ही वह सुधार के लिए कोई सुझाव भी नहीं देता. वह कोर्ट के सामने अपमानजनक दलीलें देकर और ज्यादा अवमानना कर रहा है.

इसके बाद कोर्ट ने क्रिमिनल कंटेम्प्ट के आरोप में पाहुजा को अधिकतम छह महीने की कारावास की सजा सुनाई औ दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया. गुलशन पाहुजा दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. इसके लिए उनको 60 दिनों का समय दिया गया है. इस दौरान उनकी सजा स्थगित रहेगी.

वीडियो: वकील पर चलेगा अवमानना का केस, हाईकोर्ट की सुनवाई में बीयर पीते वीडियो वायरल हुआ था

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