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पासपोर्ट बनवाने के लिए महिलाओं को पति की सहमति की जरूरत नहीं, हाईकोर्ट का फैसला

महिला ने Madras High Court में याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अप्रैल में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसके आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई. क्योंकि उस पर पति के हस्ताक्षर नहीं थे. क्या है पूरा मामला?

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21 जून 2025 (पब्लिश्ड: 04:17 PM IST)
Women do not need husband's consent for passport decision of High Court
हाईकोर्ट ने कहा कि शादी के बाद महिलाएं अपनी पहचान नहीं खोती है (फोटो: आजतक)
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मद्रास हाइकोर्ट ने कहा है कि पासपोर्ट के लिए महिलाओं को अपने पति की सहमति लेने की जरूरत नहीं है. ना ही पासपोर्ट पर पति के हस्ताक्षर होना जरूरी हैं. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि शादी के बाद महिलाएं अपनी पहचान नहीं खोती है और पत्नी अपने पति की अनुमति के बिना पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकती है.

क्या है पूरा मामला?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रेवती नाम की महिला ने कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अप्रैल में पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसके आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई. रेवती को बताया गया कि आवेदन-पत्र पर उन्हें अपने पति के हस्ताक्षर लेने होंगे. उसके बाद ही चेन्नई RPO (क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय) उस पर कार्रवाई करेगा. याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसकी शादी 2023 में हुई थी. लेकिन कुछ दिनों बाद ही पति-पत्नी के बीच विवाद  हो गया था. जिसके बाद उसके पति ने स्थानीय अदालत में तलाक की मांग करते हुए याचिका दायर की थी. हालांकि, यह याचिका अभी लंबित चल रही है.

जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने रेवती द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया. उन्होंने कहा, 

किसी पत्नी के लिए पासपोर्ट आवेदन करने से पहले अपने पति की अनुमति लेना और उसके हस्ताक्षर लेना जरूरी नहीं है.

उन्होंने कहा कि RPO का महिला के प्रति ये व्यवहार समाज की मानसिकता को दर्शाता है. जिसमें विवाहित महिलाओं को पति की संपत्ति माना जाता है. कोर्ट ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है कि RPO पासपोर्ट बनाने के लिए इस बात पर जोर दे रहा था कि महिला पति की अनुमति और एक विशेष फॉर्म पर उसके हस्ताक्षर ले. आगे कहा,

याचिकाकर्ता और उसके पति के बीच पहले से ही रिश्ते खराब थे और RPO को ये उम्मीद कैसे थी कि याचिकाकर्ता अपने पति के हस्ताक्षर ले लेंगी? 

कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद याचिकाकर्ता की अपनी पहचान नहीं खोती है और पत्नी, पति की अनुमति या हस्ताक्षर के बिना पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकती है. जस्टिस वेंकटेश ने कहा कि पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के लिए पति से अनुमति लेने की कवायद, उस समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है जो महिला की मुक्ति की तरफ बढ़ रहा है.

यह भी पढ़ें: 'सक्षम महिलाओं को पति से गुजारा-भत्ता नहीं मांगना चाहिए'- बोला हाईकोर्ट

जस्टिस वेंकटेश ने RPO को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता ने पासपोर्ट के लिए जो आवेदन किया है, उस पर जल्द कार्रवाई की जाए और उसके नाम से पासपोर्ट जारी किया जाए. कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया चार हफ्ते के भीतर पूरी कर ली जाए.

वीडियो: बहू के खिलाफ सास भी दर्ज करा सकती है घरेलू हिंसा का केस, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?

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