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13 सालों में 20 लाख भारतीयों ने छोड़ दी नागरिकता, मालूम है वजह क्या है?

भारत में 2011 से 2024 के बीच 20 लाख से ज्यादा लोगों ने नागरिकता छोड़ी है. इसमें लगभग आधे लोगों ने पिछले पांच सालों में देश छोड़ा है. यानी 2020 में आई कोविड महामारी के बाद यह ट्रेंड बढ़ा है. लेकिन क्या है इसके पीछे की वजह और नागरिकता छोड़ने को क्यों मजबूर हैं लोग?

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18 दिसंबर 2025 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2025, 01:33 PM IST)
why indians renounce citizenship due to lack of dual citizenship rule
पिछले पांच साल में 10 लाख लोगों ने छोड़ी भारत की नागरिकता. (Photo: ITG/File)
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भारतीय लगातार देश छोड़ रहे हैं. खासकर 2022 के बाद तो इसमें और भी तेजी आई है. सरकार ने लोकसभा में हाल ही में जो आंकड़े बताए हैं, वह चौंकाने वाले हैं. शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि पिछले पांच साल में तकरीबन 10 लाख भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ चुके हैं. यानी औसतन हर साल 2 लाख भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं.

सरकार के बताए आंकड़ों के अनुसार 2011 से 2024 के बीच 20 लाख से ज्यादा लोगों ने नागरिकता छोड़ी है. इसमें लगभग आधे लोगों ने पिछले पांच सालों में देश छोड़ा है. यानी 2020 में आई कोविड महामारी के बाद यह ट्रेंड बढ़ा है. कुछ साल पहले तक हर साल नागरिकों के देश छोड़ने का जो औसत 1.2 लाख से 1.45 लाख तक हुआ करता था, वह 2022 के बाद बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गया. लेकिन सवाल है कि ऐसा हो क्यों रहा है. क्यों लोग भारत की बजाय दूसरे देशों में रहना चाहते हैं.

सरकार का इस पर कहना है कि इसके पीछे लोगों के व्यक्तिगत कारण हैं और उन्हें ही पता है कि वो क्यों देश छोड़ रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि कई लोगों ने अपनी निजी सुविधाओं के लिए विदेशी नागरिकता लेने का फैसला किया है. हालांकि सरकार ने यह भी माना कि भारत नॉलेज इकोनॉमी के दौर में ग्लोबल वर्कप्लेस की क्षमता को पहचानता है.

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कोविड के बाद के सालों में भारतीयों द्वारा नागरिकता छोड़ने के मामलों में तेज़ी आई है. (Graphic: ITG)
क्या है वजह?

भारतीयों की नागरिकता छोड़ने की वजह की बात की जाए तो यह एक नहीं, बल्कि कई सारी हैं. इनमें सबसे मुख्य वजह है बेहतर जीवन की तलाश. अधिकतर लोग काम की तलाश में अच्छे करियर और ज्यादा पैसों के लिए विदेश का रुख करते हैं. दूसरे देशों में उन्हें वह कई सुविधाएं मिलती हैं, जो भारत में नहीं हैं. इसके अलावा भारत में डुअल सिटीजनशिप यानी दोहरी नागरिकता का प्रावधान न होना भी एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से लोग भारत का पासपोर्ट छोड़ देते हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कई लोग ऐसे हैं, जो भारत की नगरिकता छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन वह जिस देश में काम करते हैं, वहां और मौकों की तलाश के लिए नागरिकता लेनी पड़ती है. और चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता नहीं है, इसलिए उनकी भारतीय नागरिकता अपने आप चली जाती है. कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया है कि वह अपनी भारतीय पहचान या उसके पासपोर्ट को छोड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है. मालूम हो कि अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में दोहरी नागरिकता की सुविधा है. इसके अलावा वहां की नागरिकता लेने पर और भी कई सुविधाएं उन देशों में मिल जाती हैं. ऐसे में जो लोग इन देशों के काम करते हैं, वह इनके अधिक आकर्षक पासपोर्ट लेना ज्यादा पसंद करते हैं, भारत के मुकाबले.

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बता दें कि भारत में जब कोई नागरिक स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता लेता है तो स्वत: ही उसकी भारतीय नागरिकता चली जाती है. उसका पासपोर्ट अमान्य (Invalid) हो जाता है. नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 में इस प्रावधान को बताया गया है. हालांकि भारत में का ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) का प्रावधान जरूर है. इसमें नागरिकता छोड़ चुके लोगों को वीजा-फ्री यात्रा और सीमित आर्थिक अधिकार दिए जाते हैं. लेकिन इसमें कोई राजनीतिक अधिकार नहीं होता है. OCI होल्डर वोट न तो वोट दे सकते हैं, न ही चुनाव नहीं लड़ सकते हैं.

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