नीतीश कुमार के इंजीनियर बेटे रखेंगे 'JDU का ख्याल', कौन हैं निशांत कुमार
Nishant Kumar Joined JDU: निशांत कभी पॉलिटिक्स में नहीं आना चाहते थे. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की जब खबरें आईं तो निशांत ने उसका विरोध भी किया था. तब भी उन्होंने साफ कहा था कि उन्हें किसी भी तरह के पद में कोई दिलचस्पी नहीं है.

पटना का जेडीयू कार्यालय कार्यकर्ताओं से ठसाठस भरा हुआ था. मंच पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच साधारण कुर्ता पायजामा पहने और चेहरे पर अतिरिक्त सतर्कता लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार खड़े थे. उनके हाथ में माइक था और वह कार्यकर्ताओं से बोल रहे थे कि वो अपना कीमती समय निकालकर वहां आए, इसके लिए वह उनका आभार व्यक्त करते हैं. निशांत ये भी बताते हैं कि पार्टी में शामिल होने के लिए वह जेडीयू कार्यालय आए हैं. एक्टिव मेंबर के तौर पर वह पार्टी का ख्याल रखेंगे.
वह बिहार की जनता और पार्टी के लोगों को आश्वस्त भी करते हैं कि उनके पापा (नीतीश कुमार) पार्टी और बिहार का मार्गदर्शन करते रहेंगे. वह खुद उनके पापा ने जो 20 साल में किया, उसे जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे. ये वो क्षण है जिसे ठीक-ठीक वो मोड़ कह सकते हैं जब बिहार की राजनीति से नीतीश कुमार का प्रस्थान होता है और निशांत कुमार का युग शुरू होता है. वही निशांत जो 50 साल की उम्र में पार्टी और राजनीति दोनों में एंट्री कर रहे हैं. अपने पापा के एकदम उलट वो बिल्कुल भी राजनीतिक नहीं हैं.
निशांत कभी पॉलिटिक्स में नहीं आना चाहते थे. नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की जब खबरें आईं तो निशांत ने उसका विरोध भी किया था. तब भी उन्होंने साफ कहा था कि उन्हें किसी भी तरह के पद में कोई दिलचस्पी नहीं है. वो चाहते थे कि नीतीश कुमार बिहार में ही रहें लेकिन 8 मार्च को जेडीयू में आने के बाद उन्होंने पिता के फैसले को स्वीकार कर लिया है. थोड़े बुझे मन से ही सही लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने कहा कि
“मेरे पिताजी ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है. यह उनका निजी फैसला है. मैं उसे स्वीकार करता हूं. आदर करता हूं. हम सब मेरे पिताजी नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में काम करेंगे.”
निशांत कुमार की जेडीयू में एंट्री तय होने के बाद ये कयास और भी तेज हो गए हैं कि वह बिहार के डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं. हालांकि, ये फैसला प्रदेश की एनडीए सरकार को लेना है लेकिन ये तो तय है कि जेडीयू में नीतीश कुमार की खाली जगह निशांत ही भरेंगे. नीतीश की हर जिम्मेदारी के उत्तराधिकारी वही होंगे. इस जिम्मेदारी में पार्टी के ‘मुख्यमंत्री फेस’ को भी शामिल किया जा सकता है.
कौन हैं निशांतनिशांत कुमार उसी साल जन्मे हैं, जिस साल इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी. उनकी पैदाइश 20 जुलाई 1975 की है. वह नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं. साल 2007 में उनकी मां मंजू का निधन हो गया था. निशांत ने पटना के सेंट करेन स्कूल से शुरुआती पढ़ाई-लिखाई की है. बाद में मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल में भी वह पढ़े. इसके बाद उन्होंने रांची के मेसरा स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.
बताते हैं कि डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में न आने का फैसला किया था. इतना ही नहीं, सार्वजनिक जीवन से भी काफी हद तक दूरी बना ली थी. उनके परिवार को जानने वाले लोग बताते हैं कि निशांत बेहद आध्यात्मिक और शांत लाइफस्टाइल में जीना पसंद करते हैं. राजनीति की भीड़भाड़ और सार्वजनिकता उन्हें नहीं भाती है. मुख्यमंत्री का बेटा होने के बावजूद वह अक्सर बेहद सादगी के साथ सार्वजनिक या अन्य कार्यक्रमों में दिखाई दिए.
बिहार या देश की पॉलिटिक्स में ऐक्टिव कई राजनीतिक उत्तराधिकारियों के उलट निशांत कुमार ने अपने जीवन का ज्यादातर समय पब्लिक लाइफ से दूर रहकर बिताया. 50 साल की उम्र पार कर चुके निशांत ने शादी भी नहीं की है और ज्यादातर समय वो पटना में ही रहते हैं. कभी-कभार किसी-किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में वह अपने पिता नीतीश कुमार के साथ दिखाई दे जाते हैं. हालांकि, पार्टी या सरकार में उन्होंने कभी कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला है.
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से पहले भी जब 2025 के बिहार चुनाव हो रहे थे, तब निशांत को पार्टी में लाने की चर्चा शुरू हो गई थी. पार्टी के नेताओं ने तो ये तक कह दिया कि जेडीयू को बचाना है तो निशांत को पार्टी में लाना ही होगा. हालांकि, बिहार चुनाव के समय अन्य चुनावों से ज्यादा दिखे निशांत ने तब भी पार्टी जॉइन नहीं की और न ही चुनाव लड़े. लेकिन अब जब नीतीश दिल्ली जा रहे हैं तो निशांत ने भी राजनीति करने पर हामी भर दी है.
अब क्यों हो रही एंट्रीदी लल्लनटॉप में आनंद कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय तक बिहार की सभी पार्टियों में सेकेंड जेनरेशन ने कमान संभाल ली है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मुखिया का पद लालू प्रसाद यादव ने छोड़ दिया है. उनकी जगह तेजस्वी यादव ने ले ली है और अब पार्टी के सारे फैसले लेने का अधिकार उन्हीं के पास है. लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान ने अपने पिता की विरासत को संभाल लिया है.
जीतन राम मांझी भी अब अपने बेटे संतोष सुमन को आगे कर रहे हैं. बीजेपी सम्राट चौधरी को प्रोजेक्ट कर रही है. ऐसे में जेडीयू को भी नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने वाले लीडर की तलाश थी. विजय कुमार चौधरी और संजय कुमार झा जैसे नेता जेडीयू की विरासत को आगे नहीं ले जा सकते. जेडीयू नीतीश कुमार की पार्टी मानी जाती है और उनका कोर वोटर लव-कुश किसी दूसरी जाति के नेता के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करेगा.
जेडीयू में नीतीश कुमार ने नेतृत्व को लेकर इसके पहले कई प्रयोग किए लेकिन उन्होंने जिन पर भरोसा जताया, वो पार्टी में एक पैरलल पावर सेंटर बनाने में जुट गए. ऐसे लोगों को बाद में पार्टी से ही बाहर जाना पड़ा. सरेंडर करने के बाद उनमें से कुछ की वापसी भी हुई. इस फेहरिस्त में उपेंद्र कुशवाहा, ललन सिंह, आरसीपी सिंह, प्रशांत किशोर और जीतन राम मांझी जैसे नाम शामिल हैं.
दरअसल एक मजबूत जनाधार वाला नेता कभी नहीं चाहता कि उसके अलावा कहीं और पावर सेंटर बने. नीतीश कुमार इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. व्यक्ति और परिवार केंद्रित पार्टियों में दूसरा पावर सेंटर नहीं होता. 2020 के बिहार विधानसभा के बाद कमजोर दिख रही जेडीयू को 2024 लोकसभा चुनावों के नतीजों ने ऑक्सीजन दे दिया. केंद्र में बीजेपी की सरकार अब उन पर निर्भर है. पार्टी अभी मजबूत स्थिति में है. उनकी बारगेनिंग पावर मजबूत है. ऐसे में नीतीश कुमार के आसपास के लोग उन पर निशांत को लॉन्च करने का दबाव बना रहे थे. इसमें उनके परिवार, जाति और जिले से जुड़े करीबी लोग शामिल हैं. निशांत का पॉलिटिक्स में आना इन्हीं सब का नतीजा हो सकता है और शायद अब नीतीश कुमार भी पार्टी में उत्तराधिकार के प्रयोग को लेकर थक गए हैं.
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