राम मंदिर ट्रस्ट छोड़ने वाले चंपत राय-अनिल मिश्रा कौन हैं? चंदा चोरी केस से चर्चा में हैं
जब से मंदिर का उद्घाटन हुआ, उसके बाद से मंदिर प्रशासन के सामने आई यह सबसे बड़ी चुनौती है. इस बीच ये जानना जरूरी है कौन हैं ये दोनों लोग जिनका मंदिर ट्रस्ट में अहम रोल रहा है.

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. ये इस्तीफा उन्होंने 'नैतिक' कारणों से दिया है. इससे पहले चढ़ावा चोरी के मामले में दर्ज हुई एफआईआर के बाद 8 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जब से ये विवाद सामने आया, तबसे चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा विपक्ष के निशाने पर आ गए थे. जबसे मंदिर का उद्घाटन हुआ, उसके बाद से मंदिर प्रशासन के सामने आई यह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है. इस बीच ये जानना जरूरी है कौन हैं ये दोनों लोग, जिनका मंदिर ट्रस्ट में अहम रोल रहा है और क्यों ये सबके निशाने पर हैं. सबसे पहले जानते हैं कि चंपत राय कौन हैं?
कौन हैं चंपत राय?79 साल के चंपत राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की नगीना तहसील में हुआ था. आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक फिजिक्स में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने बिजनौर के एक कॉलेज में लगभग 11 साल तक केमिस्ट्री पढ़ाई की. इसके बाद वे औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS से जुड़ गए. उनके राजनीतिक जीवन को देखें तो उस पर 1975-77 में लगी इमरजेंसी का गहरा असर पड़ा. तब सरकार का विरोध करने के कारण उन्हें लगभग 18 महीने जेल में बिताने पड़े थे. जेल से रिहा होने के बाद चंपत राय ने 1980 में विश्व हिंदू परिषद (VHP) जॉइन कर लिया. धीरे-धीरे वो संगठन में ऊंचे पद पर पहुंच गए.
इसके बाद आया 90 का दशक और शुरू हुआ राम जन्मभूमि आंदोलन. 1991 में, राम जन्मभूमि आंदोलन के चरम पर चंपत राय को अयोध्या भेजा गया. पूरे आंदोलन में उन्होंने एक अहम रणनीतिकार की भूमिका निभाई. वे उन लोगों में भी शामिल थे जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 को हुई कारसेवा में हिस्सा लिया था. इसके बाद उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP) में सेक्रेटरी, जॉइंट जनरल सेक्रेटरी और जनरल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. साल 2018 में उन्हें संगठन का इंटरनेशनल वाइस-प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया.
चंपत राय फरवरी 2020 में तब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए जब उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया. अयोध्या में कारसेवकपुरम में अपने केंद्र से उन्होंने मंदिर के डिजाइन, निर्माण और जनवरी 2024 में हुए प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की जिम्मेदारी संभाली. मौजूदा विवाद के बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने उनका बचाव करते हुए कहा कि आंदोलन के साथ उनके दशकों पुराने जुड़ाव को देखते हुए उनकी ईमानदारी पर कभी सवाल नहीं उठाया जा सकता.
कौन हैं डॉ अनिल मिश्रा?जब राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, तब उसके लिए बनाए गए ट्रस्ट में डॉ अनिल मिश्रा भी शामिल थे. 65 साल के डॉ अनिल मिश्रा ने 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के 15 ट्रस्टियों में से एक थे. डॉ अनिल मिश्रा पेशे से होम्योपैथी के डॉक्टर हैं. उन्होंने अयोध्या में लगभग चार दशकों तक अपनी प्रैक्टिस की है. मूल रूप से वो उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के रहने वाले हैं.
आउटलुक के मुताबिक डॉ अनिल मिश्रा दशकों से RSS और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. 22 जनवरी, 2024 को मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले, मिश्रा और उनकी पत्नी उषा मिश्रा ने प्रधान यजमान के तौर पर सारे अनुष्ठान किए थे. इसके बाद से ही वो कार्यक्रम के मुख्य सार्वजनिक चेहरों में से एक बन गए थे.
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