चेक बाउंस केस होता क्या है जिसने राजपाल यादव को जेल पहुंचा दिया?
Rajpal Yadav Cheque Bounce: राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव के खिलाफ 2018 में केस फाइल किया गया था. उन पर 2010 में दिल्ली के एक बिजनेसमैन से 5 करोड़ रुपये का लोन ना चुकाने का आरोप था. ब्याज जुड़कर यह रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

Cheque Bounce Case: अक्सर लोग चेक बाउंस को हल्के में ले लेते हैं. सोचते हैं कि 'अरे, पैसे ही तो नहीं थे, बाद में देख लेंगे.' लेकिन यही लापरवाही कब जेल की हवा खिला दे, पता ही नहीं चलता. मशहूर अभिनेता राजपाल यादव का मामला इसी की एक बड़ी मिसाल बन गया है, जहां 5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस ने उन्हें तिहाड़ जेल तक पहुंचा दिया.
चेक बाउंस होता क्या है?
दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत में सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट अर्विंद मणियम ने बताया कि जब कोई व्यक्ति या कंपनी किसी को पेमेंट के लिए चेक देती है, लेकिन बैंक खाते में उतना पैसा नहीं होता, या खाता बंद होता है, या जानबूझकर 'स्टॉप पेमेंट' यानी पेमेंट रोक दी जाती है, तो चेक बाउंस हो जाता है. बहुत से लोग इसे निजी या सिविल विवाद मानते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत में यह क्रिमिनल ऑफेंस है.
अरविंद मणियम के मुताबिक, चेक बाउंस नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत अपराध है. यानी इसमें पुलिस, कोर्ट और जेल तक की नौबत आ सकती है.
कानून क्या कहता है? आसान भाषा में समझिए
चेक बाउंस के बाद कानून एक तय प्रक्रिया फॉलो करता है-
लीगल नोटिस: चेक बाउंस होने के 30 दिनों के अंदर चेक बाउंस के आरोपी को लीगल नोटिस भेजना जरूरी है.
15 दिन का मौका: नोटिस मिलने के बाद आरोपी को 15 दिन का समय दिया जाता है कि वह पैसा चुका दे.
कोर्ट केस: अगर 15 दिन में भुगतान नहीं हुआ, तो अगले 30 दिनों में कोर्ट में केस दर्ज किया जा सकता है.
सजा: दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल या चेक अमाउंट का दोगुना जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.
यानी मामला सिर्फ पैसे का नहीं, इज्जत और आजादी का भी है. हाल के सालों में सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामलों में कई अहम फैसले दिए हैं. इनमें कुछ बड़े मामले ये हैं-
डिजिटल समन: अब वॉट्सऐप और ईमेल से भेजा गया समन भी कानूनी तौर पर माना जाता है. यानी 'नोटिस नहीं मिला' का बहाना नहीं चलेगा.
अंतरिम मुआवजा: ट्रायल के दौरान कोर्ट आरोपी को 20 फीसदी रकम जमा कराने का आदेश दे सकता है. ये कोर्ट की मर्जी पर निर्भर करता है और हर केस में जरूरी नहीं है.
सिक्योरिटी चेक: अगर कर्ज बाकी है और सिक्योरिटी चेक बाउंस होता है, तो वह भी अपराध माना जाएगा.
कंपनी डायरेक्टर की जिम्मेदारी: सिर्फ वही कंपनी डायरेक्टर फंसेंगे जो कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज में शामिल हों. स्लीपिंग या इंडिपेंडेंट डायरेक्टर को इससे राहत मिली हुई है.
राजपाल यादव का मामला क्या है?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव के खिलाफ 2018 में केस फाइल किया गया था. उन पर 2010 में दिल्ली के एक बिजनेसमैन से 5 करोड़ रुपये का लोन ना चुकाने का आरोप था. आरोप था कि एक्टर ने 2010 में अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता पता लापता' के लिए पैसे लिए थे. यह फिल्म 2012 में रिलीज हुई थी, लेकिन एक्टर ने अपना लोन नहीं चुकाया.
5 करोड़ रुपये की रकम समय पर वापस नहीं हुई, ब्याज जुड़ता गया और आज यह रकम करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. अब दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया. इसके बाद उन्होंने गुरुवार, 5 फरवरी को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया.
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