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होर्मुज ने बढ़ाई गैस की किल्लत, अब यूरिया का भी संकट आने वाला है?

भारत में गैस टर्मिनल के सबसे बड़े ऑपरेटर 'Petronet LNG' ने 'फोर्स मेज्योर' का ऐलान किया है. फोर्स मेज्योर एक ऐसा प्रावधान है जो किसी कंपनी/पार्टी/पक्ष को जिम्मेदारी से मुक्त कर देता है. ऐसा तब होता है जब किसी असाधारण, अप्रत्याशित कारण जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा या महामारी की वजह से काम को मुश्किल बना देती हैं.

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22 मार्च 2026 (अपडेटेड: 22 मार्च 2026, 09:21 PM IST)
war situation blockade of strait of hormuz can lead to shortage of urea in india kharif crops affected
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के साथ भारत में यूरिया प्लांट्स को गैस की सप्लाई कम मिल रही है (PHOTO- Business Today)
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वेस्ट एशिया की जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. यहां पहले एलपीजी की किल्लत हुई. अब खेती-किसानी पर भी संकट आने वाला है. लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई रुकने के कारण भारत के यूरिया प्लांट आधी क्षमता से काम कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में यूरिया की सप्लाई में कमी देखने को मिल सकती है. यह संकट ऐसे समय आया है जब किसान खरीफ की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं. 

भारत में गैस टर्मिनल के सबसे बड़े ऑपरेटर 'Petronet LNG' ने 'फोर्स मेज्योर' का ऐलान किया है. फोर्स मेज्योर एक ऐसा प्रावधान है जो किसी कंपनी, पार्टी या पक्ष को जिम्मेदारी से मुक्त कर देता है. ऐसा तब होता है जब किसी असाधारण या अप्रत्याशित कारण जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा या महामारी की वजह से काम मुश्किल हो जाता है.

फैक्ट्रियों की हालत खराब

भारत में खेती के लिए यूरिया एक अहम चीज है लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक होने की वजह से यूरिया प्लांट को चलाने में एक बड़ी तकनीकी समस्या सामने आ रही है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरिया प्लांट को कम क्षमता पर चलाने से ईंधन की खपत 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है. यानी कम यूरिया बनाने के लिए भी बहुत ज्यादा गैस जलाई जा रही है. अमोनिया-यूरिया प्लांट को बार-बार बंद या धीमा नहीं किया जा सकता. ऐसा करने से वापस प्रोडक्शन शुरू करना मुश्किल होता है. अचानक गैस की सप्लाई कम होने से मशीनों के खराब होने और वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का जोखिम बढ़ गया है.

खेती पर संकट

गैस सप्लाई में बाधा के साथ-साथ अब कंपनियों पर तो बोझ बढ़ ही रहा है. साथ ही इससे खेती पर भी संकट मंडराने लगा है. गेल (GAIL) ने खाद बनाने वाली कंपनियों को सूचित किया है कि अब गैस की कीमतें अलग-अलग बेंचमार्क के आधार पर तय होंगी. कीमतों में हुए बदलाव के अलावा पिछला बकाया चुकाने की शर्त रखी गई है. 

भारत यूरिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है. अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो खरीफ की बुवाई पर इसका बुरा असर पड़ेगा. फिलहाल राहत की बात ये है कि देश में 19 मार्च तक 61.14 लाख टन यूरिया का स्टॉक मौजूद है, जो पिछले साल के 55.22 लाख टन से ज्यादा है. हालांकि, अगर होर्मुज का जल्द नहीं खुला तो यह स्टॉक तेजी से खत्म हो जाएगा और किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.

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