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'सारे प्रयोग और संयोग मुसलमानों के साथ ही क्यों?', वक्फ बिल पर बोले RJD सांसद मनोज झा

राज्यसभा सांसद Manoj Jha ने कहा कि देश में जैसा माहौल है, सरकार के बिल का मसौदा और बिल की मंशा, दोनों पर सवाल खड़े होते हैं.

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3 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 06:54 PM IST)
Manoj Jha
लालू यादव की पार्टी RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा.
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आज दोनों ही पक्ष आए हैं तैयारियों के साथ
हम गर्दनों के साथ हैं, वो आरियों के साथ

अपनी वाकपटुता के लिए मशहूर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान यह शेर पढ़ा. झा भी तैयारी के साथ आए थे. हालांकि, उनके इस शेर पर अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे घनश्याम तिवारी ने माहौल को हल्का करते हुए कहा कि सदन में गर्दन तो आ सकती है मगर आरी लेकर आने की अनुमति नहीं है.

मनोज झा ने अपनी बात संविधान से शुरू की. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अनुच्छेद 26 का सही तरीके से अध्ययन किया होता तो इस संशोधन की जरूरत नहीं पड़ती. अनुच्छेद 26 धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता से संबंधित है. और इस अनुच्छेद का तीसरा खंड 26C में धार्मिक संप्रदायों के चल-अचल संपत्ति का स्वामित्व एवं अधिग्रहण से संबंधित है.

आरजेडी सांसद ने कहा कि देश के माहौल पर गौर करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कभी एक समुदाय के आर्थिक बहिष्कार की बात की जाती है तो कभी किसी पुरानी मस्जिद ने नीचे खुदाई करने की. गाहे बगाहे प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप ऐक्ट पर सवालिया निशान खड़े होते हैं. ऐसे में सरकार के बिल का मसौदा और बिल की मंशा दोनों पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि खान-पान, कपड़े, आभूषण, भाषा, इतने तकरारों की वजह से एक समुदाय आशंकित है.

मनोज झा ने अपने भाषण में प्रेमचंद की कहानी ईदगाह का जिक्र किया. उन्होंने कहा, 

ईदगाह में हामिद ने अपनी दादी अमीना के लिए चिमटा खरीदा. क्या कोई बता सकता है कि हामिद ने चिमटा हरेंद्र से खरीदा था या सोहाबुद्दीन से. आज देश में ऐसा माहौल है कि हामिद खरीदेगा तो सोहाबुद्दीन के पास जाएगा और हरेंद्र चिमटा खरीदेगा तो वह हरखू के पास जाएगा.

RJD सांसद झा ने वक्फ बिल के उस खंड पर सवाल उठाए जिसमें वफ्क बोर्ड में गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों के शामिल होने का प्रावधान है. झा ने कहा-

सिर्फ एक धर्म के साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है. अगर करना ही है तो हर धर्म की संस्थाओं में दूसरे धर्म के लोगों को शामिल किया जाए. हिंदुओं, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों की संस्थाओं में दूसरे धर्म के लोगों को शामिल किया जाए. अगर ऐसा हो पाए तो मैं समर्थन करूंगा.

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह तय कर लिया है कि सारे प्रयोग या सारे संयोग सिर्फ मुसलमानों के साथ होगा. यह उचित नहीं है.

 

 

 

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