एंटी करप्शन टीम रिश्वतखोरों को पकड़ने गई, दरोगा को दबोचा, सिपाही पैसे फेंककर भाग गया
वाराणसी में एक सिपाही को एंटी करप्शन टीम ने घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा. सिपाही ने पैसे मुंह पर पैसे फेंका और भाग गया. सिपाही ने बताया कि चौकी इंचार्ज ने उसे पैसे लेने को कहा था. इसपर एक्शन लेते हुए डीसीपी काशी ने दोनों को निलंबित कर दिया है.

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से रिश्वतखोरी का एक मामला सामने आया है. एक वीडियो में जब सिपाही को पकड़ने एंटी करप्शन टीम पहुंची तो वो पैसे मुंह पर फेंककर भाग गया. सिपाही ने बताया कि उसने ये पैसे काशी विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा के कहने पर लिए थे. दरोगा ने शिकायतकर्ता का एक केस से नाम हटाने के लिए पैसे मांगे थे. रिश्वत न देने पर चार्जशीट में नाम डालने और जेल भेजने की धमकी भी दी थी. कितने पैसे मांगे?
दरोगा ने प्रह्लाद गुप्ता (शिकायतकर्ता) से 50 हज़ार रुपये मांगे थे. और कई दिनों से उसे पैसे देने का दबाव बना रहे थे. इसी से तंग आकर प्रह्लाद ने एंटी करप्शन टीम (Anti Corruption Team) को ख़बर कर दी. टीम ने फिर रंगे हाथ पकड़ने का प्लान बनाया.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक़, 28 जनवरी को एंटी करप्शन टीम के इंस्पेक्टर सत्यवीर सिंह के नेतृत्व में काशी विद्यापीठ चौकी में छापेमारी हुई. प्रहलाद चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा से मिले. दरोगा ने उनसे सीधे पैसे न लेकर सिपाही को देने को कह दिया. प्रह्लाद ने फिर 20 हज़ार रुपये सिपाही (गौरव द्विवेदी) को दे दिए. सिपाही ने वो पैसे अपने जैकेट के जेब में रख लिए.
उसके बाद जब टीम ने उन्हें दबोचने की कोशिश की तो सिपाही पैसे फेंककर भाग गया. लेकिन बाद में उसे पकड़ लिया गया. शाम 6 बजे सिपाही गौरव और चौकी प्रभारी शिवाकर मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें लालपुर पांडेयपुर थाना ले जाया गया. एंटी करप्शन ने दरोगा-सिपाही के खिलाफ केस दर्ज करवाया है. जिसके बाद डीसीपी काशी गौरव बंसल ने दोनों को निलंबित कर दिया है.
किस केस में मांगी रिश्वत?रिपोर्ट के मुताबिक़, चंदौली के अलीनगर मुगलचक के रहने वाले प्रहलाद गुप्ता का अपनी पत्नी ममता गुप्ता का विवाद चल रहा था. पत्नी ने पति के खिलाफ 5 केस दर्ज कराए थे. केस के जांच की ज़िम्मेदारी चौकी प्रभारी काशी विद्यापीठ चौकी इंचार्ज शिवाकर मिश्रा को दी गई थी. जिसके बाद प्रहलाद गुप्ता ने आरोप लगाया कि चौकी इंचार्ज ने उससे मुकदमा खत्म करने की एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी. इसके बाद प्रहलाद गुप्ता को पैसे नहीं देने पर धारा बढ़ाकर जेल भेजने की धमकी भी दी जा रही थी.
रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रहलाद ने कहा,
शिवाकर मिश्रा कई दिनों से दबाव बना रहे थे. पहले 20 हज़ार पर बात तय हुई थी. लेकिन बाद में 50 हज़ार की मांग की जाने लगी. नहीं देने पर चार्जशीट में नाम डालकर गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी देने लगे. इससे परेशान होकर मैंने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी. आज जब मैं पैसे देने काशी विद्यापीठ चौकी गया. उन्होंने पैसे सिपाही गौरव को देने को कहा. मैंने 20 हजार रुपये सिपाही को दिए.
इस घटना पर दरोगा की पत्नी शिवानी की भी प्रतिक्रिया आई है. उनका कहना है कि उनके पति को फंसाया गया है. उन्होंने बताया कि एंटी करप्शन टीम उनके पति पर एक मामले को लेकर दबाव बना रही थी जिसके बाद उन्हें जबरदस्ती फंसाकर उठा लिया गया है.
पहले भी रह चुके विवादों मेंदरोगा शिवाकर मिश्रा काशी विद्यापीठ के चौकी प्रभारी हैं. उनकी भर्ती 2019 में हुई थी. वह बस्ती के रहने वाले है. IIT BHU की छात्रा से गैंगरेप मामले के दौरान शिवाकर मिश्रा बीएचयू के चौकी इंचार्ज थे, तब भी इनकी भूमिका पर सवाल उठे थे. दरोगा ने पहले मामले में दबाव बनाकर गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद हंगामा और प्रदर्शन हुआ था. बाद में एसीपी प्रवीण सिंह ने मामला संभाला था.
वीडियो: वाराणसी में दरोगा की पिटाई करने वाले बीजेपी पार्षद के बेटे का क्या हुआ?

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