पहले 'मुस्लिम छात्रों' पर हंगामा, फिर MBBS बंद, पर वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के लोग क्या कह रहे?
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को सिर्फ 4 महीने पहले एमबीबीएस का कोर्स चलाने के लिए मान्यता दी गई थी. लेकिन 2 जनवरी को कमीशन ने संस्थान से परमिशन वापस ले लिया.

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज (SMVDIME) को MBBS पढ़ाने की इजाजत नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने वापस ले ली. श्रीमाता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के लोग इसी संस्थान की 50 में से 44 सीटों पर मुस्लिम छात्रों के प्रवेश का विरोध कर रहे थे. उनका कहना था कि इस संस्थान को देश भर के हिंदू तीर्थयात्रियों के वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे से बनाया गया है. ऐसे में कश्मीरी छात्रों को यहां से प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर किया जाए. इस विरोध के बाद NMC ने अचानक कॉलेज का निरीक्षण किया और वहां MBBS कोर्स से जुड़ी सुविधाओं में कई कमियां गिना दीं. इसके बाद वो फैसला सामने आया, जिसमें कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई का ‘लेटर ऑफ परमिशन’ (LoP) वापस ले लिया गया.
लेकिन कॉलेज के टीचर्स ने NMC के इस फैसले को ‘नाटक’ बताया है. उन्होंने कहा कि NMC ने 2 जनवरी को जब अचानक कॉलेज के निरीक्षण का फैसला किया तो वो ‘तय करके आए थे’ कि उन्हें क्या फैसला लेना है. कॉलेज के अधिकारियों ने ये दावा भी किया कि सिर्फ 4 महीने पहले NMC ने पूरी जांच-पड़ताल के बाद कॉलेज को ‘लेटर ऑफ परमिशन’ दिया था. अब उनका ताजा आदेश उनके पुराने फैसले के एकदम खिलाफ है. इसे जल्दबाजी में लिया गया है और प्रक्रियाओं का पालन भी नहीं किया गया है.
इंडियन एक्सप्रेस के अरुण शर्मा ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट की है. अखबार से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर कॉलेज को पहले ऑनलाइन डेटा या औचक निरीक्षण के आधार पर ‘कारण बताओ नोटिस’ दिया जाता है. फिर कॉलेज के जवाब के बाद फैसला लिया जाता है. इसके बाद NMC में पहली अपील और स्वास्थ्य मंत्रालय में दूसरी अपील का प्रावधान भी होता है, लेकिन कॉलेज की ओर से अब तक कोई अपील ही नहीं की गई है.
NMC का आदेश क्या था?मंगलवार, 6 जनवरी की देर रात NMC ने SMVDIME से एलओपी (LoP) वापस लेते हुए कहा कि कॉलेज में बुनियादी ढांचे की कमी है. खासकर फैकल्टी की संख्या और मरीजों से जुड़ी सुविधाओं (क्लीनिकल मैटेरियल) का अभाव है. NMC ने यह भी कहा कि कॉलेज को लेकर शिकायत की गई थी कि यहां मेडिकल कोर्स चलाने के लिए जरूरी ढांचा नहीं है. ऐसे में 2 जनवरी को कॉलेज का औचक निरीक्षण किया गया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि निरीक्षण में शिकायतें सही पाई गईं.
NMC ने अपने फैसले को सही ठहराने के लिए दावा किया कि कॉलेज में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या में 39 फीसदी की कमी है. ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट्स की 65 प्रतिशत कमी है. ओपीडी में 50 प्रतिशत से भी कम मरीज आ रहे हैं. बेड के भराव की क्षमता सिर्फ 45 प्रतिशत है. आईसीयू बेड की उपयोगिता 50 प्रतिशत है. इसके अलावा, NMC ने लेक्चर थिएटर और लाइब्रेरी से जुड़ी सुविधाओं में भी कमियों का हवाला दिया.
लेकिन कॉलेज प्रशासन ने इन सारे दावों को सिरे से खारिज किया है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक-एक आरोप पर जवाब देते हुए कॉलेज अधिकारियों ने NMC की रिपोर्ट को ‘मजाक’ बताया है. एक अधिकारी ने बताया, “NMC टीम ने हमारी लाइब्रेरी में किताबों की संख्या 75 बताई है, जबकि असल में यहां 2713 किताबें हैं. उनके मुताबिक हमारे पास सिर्फ दो जर्नल (हार्ड कॉपी) हैं. जबकि हकीकत में 480 जर्नल हैं. इसके अलावा 392 राष्ट्रीय ई-जर्नल और 9,900 विदेशी ई-जर्नल भी मौजूद हैं.”
अधिकारी ने आगे कहा,
वो (NMC) कहते हैं कि पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड नहीं हैं, जबकि सभी भर्ती मरीजों के लिए अलग कमरे हैं. उनकी रिपोर्ट में लिखा है कि संस्थान में सिर्फ दो ऑपरेशन थिएटर हैं, जबकि वास्तव में यहां 8 ऑपरेशन थिएटर हैं.
अधिकारियों ने ये भी कहा कि NMC की टीम 2 जनवरी को मेडिकल कॉलेज पहुंची, जो 15 दिसंबर से 15 जनवरी की सर्दियों की छुट्टियों के बीच का समय था. इस समय तकरीबन 50 प्रतिशत फैकल्टी या तो जा चुकी थी या जाने की तैयारी में थी. उन्होंने कहा, “हमें NMC के आने से सिर्फ 15 मिनट पहले फोन आया था. फिर भी हमने पूरा सहयोग किया, क्योंकि हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था.”
अधिकारियों के मुताबिक, जांच टीम ने अस्पताल का दौरा किया और रिपोर्ट में लिखा कि उस दिन ओपीडी में सिर्फ 181 मरीज आए, जबकि 2 जनवरी को 405 मरीजों की जांच हुई थी. इसी तरह, 175 मरीज भर्ती (IPD) थे, जो कुल बेड क्षमता का 79 फीसदी है, लेकिन NMC टीम ने इसे 45 प्रतिशत बताया. अधिकारी ने कहा,
निरीक्षण करने वाली टीम शुरू से ही एलओपी (LoP) वापस लेने के इरादे से आई हुई लग रही थी.
एक डॉक्टर ने एक्सप्रेस से कहा कि NMC कैंपस के बाहर हो रहे प्रदर्शन को शांत करना चाहती थी, लेकिन उसे ये कहकर हमारी बदनामी नहीं करनी चाहिए थी कि हमारे पास स्ट्रक्चर या फैसिलिटी नहीं है. उनके मुताबिक, फैकल्टी मेंबर्स काफी निराश हैं, क्योंकि वह अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरियां छोड़कर यहां काम करने आए थे.
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