The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Uttarakhand High Court slams 'Mohammad' Deepak for police protection in petition

'आप संदिग्ध आरोपी, सुरक्षा नहीं मिलेगी, पुलिस तो... ', उत्तराखंड HC ने मोहम्मद दीपक की फटकार लगाई

Uttarakhand High Court ने मोहम्मद दीपक की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. अदालत ने कहा कि दीपक याचिका दायर करके पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

Advertisement
Uttarakhand High Court slams 'Mohammad' Deepak
मोहम्मद दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी
pic
अर्पित कटियार
20 मार्च 2026 (अपडेटेड: 20 मार्च 2026, 09:57 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 'मोहम्मद' दीपक (Mohammad Deepak) की याचिका को लेकर फटकार लगाई है. इस याचिका में दीपक ने अपनी सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के 'पक्षपातपूर्ण' रवैये के खिलाफ जांच की मांग की थी. अदालत ने कहा कि दीपक याचिका दायर करके पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि वे संदिग्ध आरोपी है और एक संदिग्ध आरोपी सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है. 

लीगल वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत 'मोहम्मद' दीपक की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी. यह FIR राइट-विंग एक्टिविस्ट की शिकायत पर दर्ज की गई थी. कोर्ट ने सवाल किया कि दीपक इस याचिका में धमकियों से सुरक्षा कैसे मांग सकते हैं. बेंच ने कहा, 

"यह पूरी तरह से प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है. जो व्यक्ति आरोपी है, वह प्रोटेक्शन की मांग कर रहा है? वे (पुलिस) काबिल हैं. उन पर भरोसा करें. आप एक संदिग्ध आरोपी हैं."

क्या था मामला?

इस पूरे विवाद की शुरुआत 26 जनवरी 2026 को हुई. गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद दीपक रोज की तरह अपने दोस्त की दुकान पर बैठे थे. पास ही एक बुजुर्ग मुस्लिम की दुकान है, जिनकी उम्र करीब 70 साल है. इसी दौरान बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंचे और दुकानदार से उनकी दुकान के नाम को लेकर सवाल-जवाब करने लगे. 

दीपक का आरोप है कि इन लोगों ने जबरदस्ती नाम बदलने का दबाव बनाया. इस पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया. टकराव के दौरान जब दीपक से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने भीड़ को बताया कि उनका नाम ‘मोहम्मद दीपक’ है. 31 जनवरी को बजरंग दल के कई सदस्य विरोध जताने के लिए दीपक के जिम के बाहर इकट्ठा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया.

दीपक ने उन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी जो उनके जिम के सामने जमा हुए थे. उन्होंने कथित तौर पर गालियां दी थीं और नफरत भरे भाषण दिए थे. इसके बाद पुलिस ने एक दूसरे पुलिस अधिकारी की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की. दीपक का आरोप है कि वीडियो और आरोपियों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.

1 फरवरी को बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं की शिकायत पर पुलिस ने दीपक के खिलाफ शिकायत दर्ज की. इसके बाद दीपक ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की. उनकी याचिका पर गुरुवार, 19 मार्च को जस्टिस राकेश थपलियाल की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने सुनवाई की.

क्या कहा कोर्ट ने?

कोर्ट ने उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की मांग पर भी सवाल उठाया, जिन पर इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप है. बेंच ने कहा,

“यह किस तरह की मांग है? क्या आप ऐसी मांग कर सकते हैं? यह दबाव बनाने की एक चाल है. मैं याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाकर इस याचिका को खारिज कर दूंगा. जब आप कोई याचिका दायर करते हैं, तो आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि आप कौन हैं और याचिका में आपकी क्या भूमिका है. आपकी भूमिका एक संदिग्ध आरोपी की है. एक ऐसा व्यक्ति जो खुद संदिग्ध आरोपी है, वह विभागीय जांच की मांग कर रहा है... एक संदिग्ध आरोपी सुरक्षा की मांग कर रहा है.”

कोर्ट ने आगे कहा कि दीपक इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने की कोशिश कर रहे थे. कोर्ट ने यह भी कहा कि वे याचिका दायर करके पुलिस पर ‘बोझ डाल रहे थे’. दीपक की तरफ से पेश वकील नवनीश नेगी ने कहा कि जब हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण) और आपराधिक धमकी की घटना हुई थी, तब दीपक स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहे थे. 

ये भी पढ़ें: ‘बेटी का स्कूल जाना बंद हो गया...’, ‘मोहम्मद दीपक’ ने लल्लनटॉप को बताई आपबीती

हालांकि, कोर्ट ने वकील से कहा कि वे ‘कहानी’ पर ध्यान न दें, बल्कि उन राहतों पर बात करें जिनकी मांग की गई है. कोर्ट ने कहा कि FIR रद्द करने की मांग पर विचार किया जा सकता है, लेकिन दीपक द्वारा मांगी गई अन्य राहतों पर सवाल उठाया. पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की मांग पर, कोर्ट ने कहा कि प्रशासन सक्षम है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी कानूनी ज़िम्मेदारी है.

कोर्ट याचिका को खारिज करने के पक्ष में था, लेकिन दीपक के वकील ने मामले से जुड़े कुछ पहलुओं को वेरिफाई करने के लिए समय मांगा. इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार, 20 मार्च तक के लिए टाल दी.

वीडियो: मोहम्मद दीपक हाई कोर्ट पहुंचे, कोर्ट ने कौन-सा हिसाब मांग लिया?

Advertisement

Advertisement

()