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'मेरे प्राइवेट पार्ट में डाली बोतल, जलाई गर्दन... ' महिला ने थाने में सुनाई 'आपबीती', जांच में खुद पकड़ी गई

Uttar Pradesh के गाजियाबाद में एक महिला ने बेहद खौफनाक आरोप लगाते हुए गैंगरेप की शिकायत की. पुलिस ने जांच की तो पूरा मामला सामने आया. फिर जो कहानी पता लगी, उसने और भी चौंका दिया.

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मौ. जिशान
| मयंक गौड़
28 फ़रवरी 2025 (पब्लिश्ड: 11:10 PM IST)
Ghaziabad Police, fake gangrape case
गाजियाबाद पुलिस की गिरफ्त में आरोपी महिला. (X @ghaziabadpolice)
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एक महिला ने गैंगरेप, हैवानियत और जानलेवा हमले की ऐसी कहानी बुनी कि सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए. लेकिन जब पुलिस ने इस केस की गहराई से जांच शुरू की, तो परत-दर-परत झूठ की परतें खुलती चली गईं. मामला उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के कविनगर थाना क्षेत्र का है. क्या-कैसे हुआ? आइए जानते हैं.

बीती 24 फरवरी की रात पुलिस को 112 नंबर पर एक महिला का कॉल आया. महिला ने बताया कि उसे तीन लोगों ने जबरन कार में अगवा कर लिया, फिर बारी-बारी से रेप किया. महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसकी गर्दन पर केमिकल डालकर जला दिया और उसके प्राइवेट पार्ट में बोतल डाल दी. महिला ने आगे कहा कि आरोपियों ने उसे बेरहमी से पीटा और महरौली रेलवे फाटक के पास कूड़े के ढेर में फेंककर वहां से फरार हो गए.

आजतक के मयंक गौड़ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने दीपक चौहान उर्फ मेहनती और वैभव चौहान उर्फ राबिन और उनके एक अन्य अज्ञात साथी पर गैंगरेप का आरोप लगाया. महिला की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी.

इस पूरे मामले में डीसीपी सिटी राजेश कुमार ने बताया,

पुलिस ने जब इस मामले की बारीकी से जांच की, तो महिला की कहानी में कई विरोधाभास नजर आए. सबसे पहले पुलिस ने आरोपियों की कॉल डिटेल (CDR) निकाली, जिससे पता चला कि घटना के समय वे घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे. इसके अलावा, पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें कहीं भी महिला के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई. महिला खुद एक अन्य कार में जाती हुई पुलिस को नजर आई. साथ ही आरोपी बताए जा रहे शख्स भी किसी अन्य लोकेशन पर सीसीटीवी में नजर आए.

मेडिकल रिपोर्ट में भी महिला के साथ किसी भी तरह के शारीरिक शोषण या मारपीट के साफ सबूत नहीं मिले. महिला के केमिकल डालकर जलाए जाने वाले आरोप भी गलत निकले. पुलिस के अनुसार जिस केमिकल से जलाने की बात महिला कर रही थी, वह उसके शरीर पर डाला नहीं गया था, बल्कि रुई आदि जैसी किसी चीज से लगाया गया था. जब पुलिस ने महिला से दोबारा सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपने बयान बदलने शुरू कर दिए.

पुलिस को यह भी पता चला कि यह महिला पहले भी फर्जी केस दर्ज करवा चुकी है. इससे पहले उसने अपने लिव-इन पार्टनर विकास त्यागी पर रेप, मारपीट और जातिसूचक गालियां देने का आरोप लगाया था. बाद में उसने खुद ही माना कि उनके बीच सहमति से संबंध बने थे. पुलिस के मुताबिक विकास त्यागी फिलहाल जेल में बंद है, और उसके केस की पैरवी करने वाले दीपक चौहान और वैभव चौहान को फंसाने के लिए महिला ने यह नया झूठ गढ़ा था.

सभी सबूत मिलने के बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ झूठी शिकायत देने और निर्दोष लोगों को फंसाने की साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया है. आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी)/230 (मौत की सजा के मामले में फंसाना)/308(3) (जबरन वसूली)/352 (जानबूझकर अपमान/उकसाना) के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.

गाजियाबाद पुलिस ने जनता से अपील की है कि लोग पुलिस को झूठी शिकायत और गलत जानकारी देने से बचें. पुलिस ने चेतावनी दी कि झूठे मामले दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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