अमेरिका को होने वाला निर्यात 28.5% घटा, 50% टैरिफ का किन सेक्टर्स पर बहुत बुरा असर पड़ा?
भारत और अमेरिका के बीच निर्यात काफी हद तक घट गया है. यह सब अमेरिका की ओर से 27 अगस्त को लगाए गए टैरिफ की वजह से हुआ है.

अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50 % टैरिफ ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. भारत और अमेरिका के बीच निर्यात काफी हद तक घट गया है. यह सब अमेरिका की ओर से 27 अगस्त को लगाए गए टैरिफ की वजह से हुआ है. इतना ही नहीं, भारतीय सामानों ने अब वैकल्पिक बाजारों का रुख करना भी शुरू कर दिया है. ये भारतीय सामान अब दूसरे एशियाई और यूरोपीय मार्केट में भेजे जा रहे हैं.
कीमती स्टोन, जूलरी का एक्सपोर्ट घटाइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी डेटा का एनालिसिस करने पर यह जानकारी सामने आई है. इससे पता चला है कि पिछले साल की तुलना में सितंबर में अमेरिका को कीमती स्टोन और जूलरी का एक्सपोर्ट 76% तक गिर गया. लेकिन इसके कुल एक्सपोर्ट में सिर्फ 1.5 % की मामूली गिरावट दर्ज की गई. वहीं, इन चीजों का एक्सपोर्ट UAE को 79%, हॉन्ग कॉन्ग को 11% और बेल्जियम को 8% तक बढ़ गया.
ऑटो-मरीन सेक्टर पर भी असरऑटो कंपोनेंट में भी ऐसा ही पैटर्न दिखा. सितंबर में अमेरिका को इसका एक्सपोर्ट 12% गिरा. वहीं, यह डायवर्ट होकर जर्मनी, UAE और थाईलैंड की तरफ मुड़ा और इन देशों में ऑटो कंपोनेंट का एक्सपोर्ट करीब 8% तक बढ़ गया.
वहीं, मरीन प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट बढ़ा. सितंबर में यह 25% और अक्टूबर में 11% बढ़ा. लेकिन यह अमेरिका को नहीं बल्कि चीन (लगभग 60% तक), जापान (37% तक), थाईलैंड (लगभग 70% तक) और यूरोपियन यूनियन जैसे देशों में गया.
इससे यह साफ होता है कि अगर अमेरिका के साथ ट्रेड डील नहीं होती तो भारत दुनिया के अन्य देशों से व्यापार बढ़ाकर इस नुकसान को कुछ हद तक कम कर सकता है.
छोटी यूनिट्स को ज्यादा नुकसानकुछ सेक्टर जैसे कॉटन गारमेंट्स, स्पोर्ट्स गुड्स, कारपेट, लेदर फुटवेयर में मुनाफा कम होता है और प्रतिस्पर्धा ज्यादा. ऐसे में ये प्रोडक्ट्स नई मार्केट खोजने में संघर्ष कर रहे हैं. स्पोर्ट्स गुड्स के 40% निर्यात US जाते हैं. नए बाजार न मिलने से अक्टूबर में कुल निर्यात 6% घट गया.
कॉटन गारमेंट्स के अमेरिका में 25% गिरावट के बाद UAE, इटली आदि में थोड़ी बढ़त मिली. लेकिन कुल निर्यात 6% कम हुआ. लेदर फुटवियर में भी अमेरिका के कारण कुल 10% गिरावट देखी गई.
नए बाजारों की तलाशइस बीच भारत सरकार अलग-अलग देशों के बाजारों की तरफ रुख कर रही है. व्यापार विभाग ने निर्यातकों से कहा है कि नए बाजार ढूंढते समय कीमतें बहुत कम न करें, नहीं तो भारत की छवि पर असर पड़ेगा. कुछ सामान अब भी अमेरिका जा रहा है. लेकिन धीरे-धीरे अमेरिका दूसरे देशों जैसे इंडोनेशिया और इक्वाडोर से सामान ले रहा है. इन देशों पर टैरिफ भारत की तुलना में कम है. फिर भी उनके दाम बढ़ने से कुछ भारतीय उत्पाद अभी भी प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं.
इसी के साथ EU ने 102 नई भारतीय मरीन यूनिट्स को मंजूरी दी, जिससे EU को निर्यात 20–25% तक बढ़ सकता है. वहीं, रूस को भी नया बाजार बनाने की कोशिश है. उम्मीद है कि 25 भारतीय फिशरी यूनिट्स को वहां निर्यात की अनुमति मिल सकती है. इसके साथ ही सरकार ने 45,060 करोड़ रुपये की मदद का ऐलान किया है. इसमें 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी भी शामिल है.
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