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US डिपोर्टेशन केस में चौंकाने वाली जानकारी, 45 करोड़ की उगाही, 32 देशों में फैला नेटवर्क

Indian Deportees from US: पंजाब पुलिस ने 19 FIR दर्ज की है. 36 एजेंट, उनके सहयोगी और रिश्तेदारों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. इनमें से कम से कम पांच एजेंट मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. वर्तमान में ये स्पेन, इंग्लैण्ड, अमेरिका, जर्मनी और दुबई जैसे देशों में रहते हैं.

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27 फ़रवरी 2025 (अपडेटेड: 27 फ़रवरी 2025, 12:16 PM IST)
Illegal Migrants
अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचे प्रवासी. (फाइल फोटो: PTI, 6 फरवरी)
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पिछले दिनों अमेरिका ने सैकड़ों भारतीयों को डिपोर्ट (US Deports Indians) किया. कारण बताया कि वो कानूनी रूप से अमेरिका नहीं गए थे. इसके बदले उन्होंने डंकी रूट का इस्तेमाल किया था. डिपोर्ट किए भारतीयों से जुड़े मामलों की अब देश में जांच हो रही है. ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर वो वहां तक पहुंचे कैसे. और इसके पीछे किस तरह का नेटवर्क काम कर रहा है?

पंजाब पुलिस ने डेयरी किसान गुरविंदर सिंह के मामले की भी जांच की. 44 साल के गुरविंदर पटियाला के रहने वाले हैं. इस मामले में दर्ज केस के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में उन्होंने अमेरिका जाने के लिए हरियाणा के एजेंटों को 45 लाख रुपये दिए थे. ये उनका तीसरा प्रयास था. पहली बार दुबई के रास्ते और दूसरी बार नीदरलैंड के एम्स्टर्डम से होते हुए गिनी के कोनाक्री के रास्ते अमेरिकी सीमा में घुसने की कोशिश की. लेकिन दोनों बार असफल रहे थे.

सब्जी के ट्रक में छिपे रहे

तीसरे प्रयास में वो अमेरिका पहुंच गए. उन्होंने चार महीने की यात्रा की. दक्षिण अमेरिका में सूरीनामा जाने के लिए हवाई जहाज से सफर किया. गुयाना जाने के लिए नाव से लंबी यात्रा की. पनामा के जंगलों में पांच दिनों तक पैदल चलते रहे. इसके बाद उन्हें सब्जी के एक ट्रक में छिपना पड़ा. उसी ट्रक से वो कोस्टा रिका, निकारागुआ, होंडुरास और ग्वाटेमाला होते हुए मैक्सिकन सीमा तक पहुंचे. इसके बाद 25 जनवरी को गुरविंदर अमेरिका में दाखिल हो गए. लेकिन फरवरी में उन्हें 131 भारतीयों के बैच के साथ डिपोर्ट कर दिया गया.

पंजाब पुलिस ने इन मामलों में 19 एफआईआर दर्ज की है. इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं दिव्या गोयल की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंटों ने अलग-अलग रास्तों से भारतीयों को अमेरिका भेजने का प्रयास किया. चीन, गिनी, केन्या, मिस्र, चेक गणराज्य, बेलारूस, बहामास, नाइजीरिया से लेकर इटली, नीदरलैंड, माल्टा, सूरीनाम, थाईलैंड, दुबई और स्पेन जैसे देशों का इस्तेमाल किया गया.

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डंकर्स ने कमाए करोड़ों रुपये

इन FIR में ऐसे कम से कम 32 देशों के नाम हैं. डिपोर्ट हुए लोग इन देशों से होकर अमेरिका पहुंचे थे. 19 लोगों ने एजेंटों को कुल 7.89 करोड़ रुपये दिए थे. ये आधिकारिक आंकड़ा है जो पुलिस FIR में दर्ज है. भारतीयों को जब अमृतसर एयरपोर्ट पर उतारा गया था, तब भी उनसे शुरुआती पूछताछ की गई थी. उसके आधार पर ये अनुमान लगाया गया था कि लोगों ने एजेंटों को कुल 44.70 करोड़ रुपये दिए हैं. इसमें कुछ ऐसे मामले भी हैं जो अब तक पुलिस में दर्ज नहीं हुआ है.

डंकी रूट से लोगों को किसी दूसरे देश में पहुंचाने वाले एजेंटों को डंकर्स कहते हैं. इन मामलों की जांच से पता चलता है कि डंकर्स और उनके सहयोगियों का एक बड़ा नेटवर्क दुनिया के कई देशों तक फैला है. 

इन 19 मामलों में 36 एजेंट, उनके सहयोगी और रिश्तेदारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई हैं. इनमें से कम से कम पांच एजेंट मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं. वर्तमान में ये स्पेन, इंग्लैण्ड, अमेरिका, जर्मनी और दुबई जैसे देशों में रहते हैं. एजेंटों की सूची मोगा के एक किसान यूनियन नेता का भी नाम है, जो इमिग्रेशन का बिजनेस चलाता था. मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले कुछ एजेंट भी इस लिस्ट में हैं. 

हर नए रास्ते पर पैसे मांगे

FIR से डंकर्स के काम करने के एक जैसे तरीके का भी पता चला है. जैसे-जैसे यात्रा में नए मोड़ आते गए, ये एजेंट उनके परिवार के लोगों से किस्तों में पैसे वसूले. ज्यादातर मामलों में डंकर्स अपने सहयोगियों को परिवार के पास पैसे के लिए भेजते थे. कुछ मामलों में ऐसा भी हुआ कि एजेंटों ने शुरुआत में तय की गई राशि से ज्यादा पैसों की मांग की. इसके बाद परिवार को WhatsApp कॉल के जरिए बताया कि वो जब तक और पैसे नहीं देंगे, यात्रा वहीं रुकी रहेगी.

डिपोर्ट हुए लोगों में एक व्यक्ति छीना-झपटी और डकैती केस का संदिग्ध, एक डेयरी किसान, एक ट्रक ड्राइवर और एक रेस्टोरेंट स्टाफ भी है. इन लोगों ने अपनी पैतृक जमीन बेची, घर और आभूषण गिरवी रखे, कुछ लोगों ने भैंस बेचकर और कर्ज लेकर एजेंटों को पैसे दिए. प्रत्येक ने औसतन 40 से 45 लाख रुपये खर्च किए.

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छोटे गांवों और कस्बों के लोग

FIR से ये भी पता चलता है कि डिपोर्ट हुए पंजाब के अधिकतर लोग छोटे गांवों और कस्बों के हैं. उन्होंने कम से कम तीन महीने की यात्रा की. कुछ एक साल से ज्यादा समय तक रास्ते में ही रहे. अधिकतर लोग ब्राजील पहुंचे और वहां से डेरियन गैप से होते हुए मैक्सिको की ओर आगे बढ़े. कुछ लोग अल साल्वाडोर से होते हुए हवाई जहाज से मैक्सिको पहुंचे. कई लोगों को जमीन के रास्ते भी जाना पड़ा जो सबसे कठिन था.

पंजाब पुलिस ने इन मामलों में मानव तस्करी के आरोपों की जांच के लिए चार सदस्यों वाली SIT का गठन किया है. इसके प्रमुख ADGP (NRI मामले) पीके सिन्हा ने कहा कि इन मामलों की जांच कई देशों तक फैली है. इसलिए आने वाले दिनों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से सहयोग लेने पर विचार किया जा रहा है. 

डिपोर्ट हुए लोगों के बयानों के आधार पर उन्होंने दावा किया कि एजेंटों का एक ऑर्गेनाइज्ड नेटवर्क काम कर रहा है. पुलिस अधिक से अधिक डिपोर्ट हुए लोगों को FIR दर्ज करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है. हालांकि, सभी लोग आगे आकर ऐसा नहीं कर रहे हैं. ADGP ने बताया कि अब तक तीन गिरफ्तारियां हुई हैं. SIT पैसों के लेन-देन और एजेंटों के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है. टीम ने स्थानीय एजेंटों से अपनी जांच शुरू की है और आगे अन्य देशों के एजेंटों की भी जांच की जाएगी.

वीडियो: अमेरिका से डिपोर्ट हुए गुजरात के लोग घरों से गायब क्यों हैं?

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