असली अधिकारी को फर्जी IAS बताकर किया अरेस्ट, दस्तावेज सामने आए तो पलट गई कहानी
पुलिस द्वारा फर्जी IAS बताकर पकड़े गए राहुल कौशिक अब खुद को असली अधिकारी बताते हुए सामने आए हैं. उनके दावों और दस्तावेजों ने इस पूरे मामले को उलझा दिया है. अब इस मामले पर पुलिस के आला अधिकारी चुप्पी साधे हैं.

मेरठ में एक फर्जी आईएएस की गिरफ्तारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस द्वारा फर्जी IAS बताकर पकड़े गए राहुल कौशिक अब खुद को असली अधिकारी बताते हुए सामने आए हैं. उनके दावों और दस्तावेजों ने इस पूरे मामले को उलझा दिया है. अब इस मामले पर पुलिस के आला अधिकारी चुप्पी साधे हैं.
आजतक से जुड़े उस्मान चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक़, राहुल कौशिक ने बताया कि 2008 में उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा क्लियर की थी. उन्होंने दस्तावेज़ दिखाते हुए अपनी कथनी को बल दिया. इनमें भारत सरकार के गृह मंत्रालय से जुड़ा पहचान पत्र, ब्यूरो ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज एंड ट्रेनिंग का प्रमाणपत्र, डाक विभाग का आई कार्ड और उस समय के अखबार की कटिंग दिखाई, जिसमें रिजल्ट छपा था. UPSC सिविल सर्विस एग्जाम में उनकी 728 रैंक आई थी. राहुल कौशिक ने अपनी पूरी कहानी खुद सुनाई है. इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या पुलिस ने बिना पूरी जांच के एक व्यक्ति को फर्जी घोषित कर दिया.
मेरठ के सिविल लाइन के सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि राहुल फोन कर खुद को IAS बताते हुए बार-बार लोगों को धमकाते थे. 112 नंबर डायल कर उच्च अधिकारियों को फोन पर भ्रामक डिटेल्स देते थे. जांच में पुष्टि के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राहुल कौशिक को गिरफ्तार कर लिया. जिसके बाद उन्हें नौचंदी थाना ले जाया गया.
वहीं राहुल ने पुलिस पर आरोप लगाया कि 12 मार्च की रात को 10-12 पुलिसकर्मी उनके घर आए और उन्हें बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया. उनके साथ दुर्व्यवहार किया और फोन भी ज़ब्त कर लिया. उनका स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड नहीं किया गया. प्रेस ब्रीफ़िंग कर घटना के बारे में जानकारी दी और उन्हें उसके बाद बेल मिल गई.
राहुल कौशिक पर पहले से केस चल रहा हैरिपोर्ट के मुताबिक़, राहुल कौशिक पर साल 2017-18 में धोखाधड़ी का आरोप लगा था. इसके बाद उन्हें पहले निलंबित किया गया और फिर 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. हालांकि इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में लंबित है.
राहुल का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद वह मानसिक दबाव में हैं और डॉक्टरी सलाह पर दवाइयां ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे. रिपोर्ट बताती है कि एक फोन कॉल पर किसी वरिष्ठ अधिकारी और राहुल के बीच कहासुनी हुई थी. वहीं से ये विवाद शुरू हुआ था.
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं. क्या पर्याप्त जांच के बिना किसी को फर्जी अधिकारी घोषित करना उचित है? फिलहाल सच्चाई क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा.
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