बेटी ने कहा, 'पापा फिर से पढ़िए', पिता ने साथ परीक्षा देकर 12वीं पास कर दिखाया
Tripura man Class 12 class board exam: दूधू मिया एक सरकारी स्कूल में टीचर थे. लेकिन 2020 में उनकी नौकरी चली गई. कारण था हाई कोर्ट का एक आदेश. नौकरी जाने के बाद वे दिहाड़ी मजदूरी करने लगे. ताकि बेटी को पढ़ा सके. फिर एक दिन उनकी बेटी ने कहा कि उन्हें 12वीं करनी चाहिए.

त्रिपुरा में बाप-बेटी ने मिलकर 12वीं के बोर्ड एग्जाम दिए. दोनों इसमें पास भी हो गए. अब दोनों ने ग्रेजुएशन के लिए कॉलेज जाने का फैसला किया है. पिता-बेटी का साथ में एग्जाम देना सुनने में लोगों को अटपटा लग सकता है लेकिन इसकी वजह हाईकोर्ट का एक फैसला है. ये कहानी है दूधू मिया की. उन्होंने राज्य बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा दी थी और बाद में एक सरकारी स्कूल में टीचर बन गए थे. हालांकि, 2014 में वे स्कूल टीचरों के चयन प्रक्रिया को लेकर उठे एक विवाद के बाद जांच के घेरे में आ गए.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे त्रिपुरा में लगभग 10 हजार भर्तियों की जांच की गई. फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गईं. लेकिन कोर्ट ने सभी को खारिज कर दिया. इसके बाद मार्च 2020 में दूधू की नौकरी चली गई.
नौकरी जाने के बाद की दिहाड़ी मजदूरीनौकरी जाने के बाद परिवार चलाने के लिए और बेटी को पढ़ाने के लिए वो दिहाड़ी मजदूरी करने लगे. इसके साथ ही एक छोटा-मोटा कारोबार भी शुरू किया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दूधू मिया की बेटी रूपा ने उन्हें आगे की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया था. रूपा ने बताया कि उनके सामने जब भी कोई चुनौती आती थी तो वह सबसे पहले अपने पिता के पास ही जाती थीं. हो सकता है कि उन्होंने 10वीं कक्षा से आगे पढ़ाई न की हो लेकिन उनकी रुचि हमेशा से ही पढ़ाई-लिखाई में रही है. रूपा ने कहा,
मैंने ही उन्हें सुझाव दिया था कि उन्हें हायर सेकेंडरी क्लास में एडमिशन लेने के बारे में सोचना चाहिए. मुझे बहुत खुशी हुई जब वह इसके लिए राजी हो गए. हम एक साथ मिलकर पढ़ते थे. जब भी मुझे किसी मदद की जरूरत होती थी तो वह शिक्षक की भूमिका निभाते थे.
दोनों ने सिपाहीजाला जिले के जंपुईजाला कस्बे में स्थित प्रमोद नगर हायर सेकेंडरी स्कूल में त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं के एग्जाम दिए थे. पिछले शुक्रवार को घोषित हुए बोर्ड परीक्षा के नतीजों के बाद पिता और बेटी ने अब एक साथ कॉलेज जाने का फैसला किया है. दूधू ने बताया,
नौकरी चले जाने से मुझे बेसहारा महसूस हुआ लेकिन पढ़ाई का ख्याल मेरे मन से कभी दूर नहीं हुआ. जब मेरी बेटी ने मुझे अपनी क्लास में शामिल होने के लिए बुलाया तो मैंने पूरे आत्मविश्वास के साथ उस मौके को लपक लिया. अब मैंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने का पक्का इरादा कर लिया है.
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