ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाएगी TMC, क्या है चुनाव आयुक्त को हटाने का नियम?
संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की तरह ही संसदीय महाभियोग प्रक्रिया से हटाया जा सकता है. महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत वोट चाहिए.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग के पूरे पैनल के साथ पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं. दूसरी तरफ SIR लिस्ट से लोगों का नाम कटने के खिलाफ ममता बनर्जी धरने पर बैठी है. साथ ही तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयुक्त के दौरे का विरोध कर रही है. अब खबर है कि संसद में तृणमूल कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. द हिंदू से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के उपनेता शताब्दी रॉय ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक में यह मुद्दा उठाया.
ये बैठक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे के संसद स्थित कार्यालय में बुलाई गई थी. शताब्दी रॉय ने विपक्षी नेताओं की बैठक में बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 6 मार्च से SIR की फाइनल लिस्ट से वोटर्स का नाम काटे जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रही हैं. इस प्रदर्शन को अब चार दिन हो चुके हैं. चुनाव आयोग ने राज्य में 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी किया था. तृणमूल सांसद रॉय ने तर्क दिया कि अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाकर अगला कदम उठाना बहुत महत्वपूर्ण है.
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष के बाकी नेता भी इस सुझाव से सहमत थे. तृणमूल कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की तैयारी कर रही है. वहीं विपक्ष इसकी डिटेलिंग पर काम कर रहा है, जिसमें ये तय करना भी है कि प्रस्ताव किस सदन में पेश किया जाएगा. विपक्ष के एक नेता ने बताया कि उनके पास दोनों सदनों में से किसी में भी प्रस्ताव पेश करने के लिए जरूरी संख्याबल है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है?
संविधान के अनुच्छेद 324 (5) के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की तरह ही संसदीय महाभियोग प्रक्रिया से हटाया जा सकता है. महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उपस्थित और वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत वोट चाहिए.
यह प्रस्ताव किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है. राज्यसभा में इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए 50 सदस्यों के सिग्नेचर चाहिए. वहीं लोकसभा में 100 सदस्यों का सिग्नेचर चाहिए होता है. प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के कारणों का जिक्र होना चाहिए.
प्रस्ताव पेश होने के बाद संबंधित सदन के अध्यक्ष को आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन करना होगा. अगर समिति की जांच में मुख्य चुनाव आयुक्त को दोषी पाया जाता है तो फिर कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है. इसके बाद प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी होता है. दोनों सदनों से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति निष्कासन का अंतिम आदेश जारी करते हैं.
वीडियो: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की नाराजगी पर ममता बनर्जी ने क्या बोल दिया?

.webp?width=60)

