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रात को वाशिंग मशीन चलाई तो बिजली का बिल दोगुना आएगा? 'Time of Day' टैरिफ जो आपकी जेब ढीली करेगा!

Electricity Bill: क्या रात को वाशिंग मशीन या एसी चलाने से आपका बिजली का बिल दोगुना होने वाला है? जानिए बिजली मंत्रालय (Ministry of Power) के नए 'Time-of-Day' (ToD) टैरिफ और स्मार्ट मीटर से जुड़े नियम, जो आपकी जेब ढीली कर सकते हैं.

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9 जून 2026 (अपडेटेड: 9 जून 2026, 03:04 PM IST)
Electricity Bill
किस वक्त बिजली का इस्तेमाल करने से बचेगा आपका पैसा (फोटो- आजतक)
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गर्मियों का सीजन आते ही मिडिल क्लास परिवारों का सबसे बड़ा विलेन एक्टिव हो जाता है- बिजली का बिल. अभी तक हमारा और आपका गणित सीधा था कि भाई, जितनी यूनिट फुकेंगी, महीने के अंत में उतना ही बिल थमा दिया जाएगा. लेकिन बॉस, अब बिजली का बिल सिर्फ इस बात पर तय नहीं होगा कि आपने 'कितनी' बिजली खर्च की, बल्कि इस बात पर तय होगा कि आपने 'किस वक्त' बिजली खर्च की.

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो ऑफिस से लौटकर रात को 10 बजे वाशिंग मशीन में कपड़ों का ढेर डाल देते हैं, या रात भर एसी (AC) को 18 डिग्री पर चलाकर रजाई तान लेते हैं, तो सावधान हो जाइए. देश भर के शहरों में जो 'स्मार्ट मीटर' लगाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. और स्मार्ट मीटर के साथ ही एक बहुत बड़ा कंफ्यूजन भी छिपा है. डिमांड के हिसाब से बिजली के रेट घटने-बढ़ने का कंफ्यूजन. जिसे रेल मंत्रालय की तर्ज पर विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) 'Time-of-Day' (ToD) टैरिफ कह रहा है.

सोशल मीडिया पर हल्ला है कि रात को वाशिंग मशीन चलाने पर बिल दोगुना आएगा. क्या वाकई ऐसा है? या फिर इस नए नियम के पीछे की कहानी कुछ और है? आइए, इस कड़क यूटिलिटी गाइड में इस पूरे गणित का पोस्टमार्टम करते हैं और जानते हैं कि आपकी जेब पर इसका क्या और कितना असर पड़ने वाला है.

क्या है ये 'Time of Day' (ToD) टैरिफ का पेंच?

सरल शब्दों में कहें तो ToD टैरिफ का मतलब है- "जैसा समय, वैसा दाम." इसे आप कैब एग्रीगेटर्स (जैसे ओला या उबर) के 'सरचार्ज' या 'पीक प्राइसिंग' की तरह समझ सकते हैं. जब दफ्तर छूटने के समय गाड़ियों की मांग बढ़ती है, तो कैब का किराया बढ़ जाता है. ठीक यही फॉर्मूला अब आपकी बिजली पर लागू होने जा रहा है.

विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) संशोधन नियमों के तहत अब पूरे 24 घंटे बिजली की दरें एक जैसी नहीं रहेंगी. दिन के 24 घंटों को मुख्य रूप से तीन अलग-अलग स्लॉट्स में बांट दिया गया है:

  • सोलर ऑवर्स: जैसा कि नाम से जाहिर है दिन का समय, जब सूरज की रोशनी मौजूद हो. इस दौरान बिजली की दरें सामान्य से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक सस्ती होंगी.
  • नॉर्मल ऑवर्स: अमूमन रात का या सुबह का वक्त. इस दौरान बिजली की दरें वही रहेंगी जो आपके मौजूदा टैरिफ में तय हैं.
  • पीक ऑवर्स: शाम का वक्त जब बिजली की खपत ज्यादा होती है क्योंकि इसी समय लोग कपड़े धोने जैसे काम निपटाते हैं. साथ ही सारे कूलर-एसी भी चल रहे होते हैं. इस दौरान बिजली की दरें सामान्य से 10 फीसदी से 20 फीसदी तक महंगी हो जाएंगी.

सरकार का तर्क है कि जब दिन में धूप होती है, तो ग्रिड को सस्ती सोलर एनर्जी मिलती है, इसलिए दिन में बिजली सस्ती दी जाएगी. लेकिन रात के वक्त जब सब लोग अपने घरों में एसी, टीवी और भारी उपकरण एक साथ चालू करते हैं, तो ग्रिड पर लोड अचानक बहुत बढ़ जाता है. इस लोड को संभालने के लिए सरकार को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है, और अब वही बढ़ा हुआ दाम सीधे आपकी जेब से वसूला जाएगा.

नए बिजली बिल का पूरा स्ट्रक्चर

नीचे दिए गए ब्रेकअप से आप आसानी से समझ सकते हैं कि 24 घंटे के चक्र में आपकी जेब पर बिजली का मीटर किस रफ्तार से भागने वाला है.

            
        Time-of-Day (ToD) Tariff        

स्मार्ट मीटर का नया गणित: समय बदलो, पैसा बचाओ!

   
       
       
            ☀️ सोलर ऑवर्स (दिन का समय)             10% - 20% सस्ती        
       
समय: सुबह 08:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक
       
बेस्ट उपयोग: वाशिंग मशीन, पानी का पंप, इंडक्शन, भारी गीजर और प्रेस.
   
       
       
            🚨 पीक ऑवर्स (भारी लोड का समय)             10% - 20% महंगी        
       
समय: शाम 04:00 बजे से रात 10:00 बजे तक
       
सावधानी: एसी को 26°C पर रखें. हैवी मोटर, वाशिंग मशीन या गीजर भूलकर भी न चलाएं.
   
       
       
            🌙 नॉर्मल ऑवर्स (रात/सुबह)             सामान्य दर (Normal Rate)        
       
समय: रात 10:00 बजे से सुबह 08:00 बजे तक
       
उपयोग: फ्रिज, अपने नॉर्मल तापमान पर एसी, मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग.
   
       
        *विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) के नए स्मार्ट मीटर नियमों पर आधारित.    

Note: AI की मदद से तैयार ग्राफिक्स

नियम की डेडलाइन: बिजली मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, कमर्शियल और बड़े इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के लिए यह व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है. वहीं, देश के बड़े शहरों में आम घरेलू उपभोक्ताओं (जिनके यहां स्मार्ट मीटर लग चुके हैं) के लिए इसे अनिवार्य करने की समय-सीमा आ चुकी है.

तो क्या सच में रात को वाशिंग मशीन चलाने से बिल दोगुना होगा?

अब आते हैं आपके असली डर पर. सोशल मीडिया के ज्ञानियों ने यह अफवाह उड़ा दी है कि रात को कुछ भी भारी काम किया तो सीधे कंगाल हो जाओगे. यह पूरी तरह सच नहीं है गुरु.

इस मामले का सबसे बड़ा पेंच समझिए. सबसे महंगी बिजली रात को नहीं, बल्कि शाम के 4 बजे से रात के 10 बजे के बीच होने वाली है, क्योंकि यही वो वक्त होता है जब कमर्शियल और डोमेस्टिक लोड एक साथ टकराते हैं. रात के 10 बजे के बाद तो दरें वापस सामान्य (नॉर्मल) हो जाएंगी.

असली झटका तब लगेगा जब आप शाम को 6 या 7 बजे ऑफिस से लौटकर कपड़े धोने बैठेंगे, या उसी दौरान पानी की मोटर चलाएंगे. अगर आपने शाम के पीक ऑवर्स में वाशिंग मशीन, पानी का हीटर, या आयरन (Press) जैसी ज्यादा वाट की चीजें चलाईं, तो आपका बिल सामान्य से 20 फीसदी तक उछल सकता है. दोगुना भले न हो, पर बजट बिगाड़ने के लिए 20 फीसदी की बढ़ोतरी भी बहुत बड़ी होती है.

आदत बदलो और बिजली का बिल कम करो

इस नए डिजिटल सिस्टम से घबराने के बजाय अगर आप थोड़ी चालाकी दिखाएं, तो आप अपने पुराने बिल में भी कटौती कर सकते हैं. इसे ऐसे समझिए,

1. वाशिंग मशीन का टाइम बदलिए: हफ्ते भर के गंदे कपड़ों को रोज शाम को या रात में धोने के बजाय शनिवार या रविवार को दिन के 11 से 3 बजे के बीच धोएं. इस वक्त 'सोलर ऑवर्स' के कारण आपको बिजली पर 20% तक की सीधी छूट मिलेगी.

2. पानी का पंप (Water Motor): सुबह उठते ही सबसे पहले पानी की मोटर चलाने की आदत छोड़िए. अगर मुमकिन हो, तो पानी की टंकी भरने का काम सुबह 8 बजे के बाद करें ताकि वह सोलर ऑवर्स के दायरे में आ सके.

3. एसी (AC) का सही इस्तेमाल: शाम को 6 बजे जैसे ही घर आएं, तुरंत सारे कमरों के एसी ऑन न कर दें. पीक ऑवर्स (शाम 4 से रात 10) में एसी को 26 या 27 डिग्री पर चलाएं और साथ में पंखा ऑन रखें. रात को 10 बजे के बाद जब दरें सामान्य हो जाएं, तब आप उसे अपने मनमुताबिक 24 डिग्री पर सेट कर सकते हैं.

जमीनी कंफ्यूजन और आम जनता की टेंशन

नियम तो कागजों पर बहुत सुंदर दिख रहा है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर इसे लेकर भारी कन्फ्यूजन है. आम जनता परेशान है कि उन्हें कैसे पता चलेगा कि किस वक्त क्या रेट चल रहा है? क्या हर महीने बिजली कंपनियां गुपचुप तरीके से पीक ऑवर्स का टाइम बदल देंगी?

विजिलेंस और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि बिजली कंपनियों (DISCOMs) को अपने ऐप्स और स्मार्ट मीटर के डिस्प्ले पर लाइव रेट दिखाने की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी. जब तक उपभोक्ता को अपने मोबाइल पर यह नहीं दिखेगा कि "इस समय बिजली का रेट क्या है", तब तक वो अपनी खपत को कंट्रोल कैसे करेगा?

कुल मिलाकर तकनीक हमारे घरों में घुस चुकी है. स्मार्ट मीटर केवल रीचार्ज करने वाली मशीन नहीं है, वो आपकी एक-एक मिनट की बिजली की चोरी और खपत पर नजर रख रहा है. अगर जेब ढीली होने से बचानी है, तो अपनी पुरानी आदतों का टाइम-टेबल बदलना ही एकमात्र रास्ता है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से ये टैरिफ बिहार के उन इलाकों में लागू की जा चुकी है, जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं. बाकी देशभर में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है.

अब एक सवाल आपके लिए: क्या आपके इलाके या सोसायटी में स्मार्ट मीटर लग चुका है? और अगर सरकार आपके शहर में यह 'Time-of-Day' टैरिफ लागू करती है, तो क्या आप अपने घर के कामों का समय बदलने को तैयार हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा कीजिएगा!

वीडियो: रेगुलेटरी कमीशन की बैठक में रखा गया प्रस्ताव, पास हो गया तो यूपी वालों का बिजली बिल बढ़ जाएगा

सामान्य प्रश्न

टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ क्या है?

ToD टैरिफ बिजली बिलिंग की एक नई व्यवस्था है जिसमें दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से बिजली की दरें बदलती रहती हैं. पीक ऑवर्स में बिजली महंगी और सोलर (दिन के) ऑवर्स में सस्ती मिलती है.

क्या बिना स्मार्ट मीटर के भी ToD टैरिफ लागू हो सकता है?

नहीं, यह व्यवस्था केवल उन्हीं उपभोक्ताओं पर लागू हो सकती है जिनके घरों में 'स्मार्ट मीटर' इंस्टॉल किए जा चुके हैं, क्योंकि सामान्य डिजिटल मीटर समय के हिसाब से खपत का अलग-अलग डेटा रिकॉर्ड नहीं कर सकते.

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