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56 साल में तीन स्टेंट के साथ एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचे योगेश, जिद और जीत की है शानदार कहानी

Pune के Sagarmatha Startup उन लोगों के मुश्किल और दुर्गम पहाड़ चढ़ने का सपना पूरा करती है, जिन्हें मेडिकल कंडिशन के आधार पर रिजेक्ट कर दिया जाता है. इसी कंपनी के साथ योगेश ने दिल में लगे स्टेंट के बाद भी एवरेस्ट बेस कैंप जाने का सपना पूरा किया.

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18 जून 2026 (पब्लिश्ड: 11:11 AM IST)
three stents in heart at age of 56 still reached base camp this story will inspire
अपनी पत्नी के साथ माउंट एवरेस्ट बेस कैंप पर योगेश (PHOTO- Indian Express)
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एक कहावत है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल छोटी नहीं रह जाती. ये कहावत पुणे के रहने वाले योगेश लाहोटी पर एकदम फिट बैठती है. योगेश को हार्ट की प्रॉब्लम है. इस वजह से उनके दिल में तीन स्टेंट (एक मेडिकल उपकरण जो दिल में लगाया जाता है) लगे हुए हैं. लेकिन बावजूद उसके वो अक्टूबर 2022 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक पहुंचे.

योगेश बताते हैं कि पहाड़ हमेशा उन्हें अपनी ओर बुलाते थे. लेकिन उनके और पहाड़ के बीच दिल की समस्या आ रही थी. योगेश नहीं चाहते थे कि दिल की बीमारी की वजह से उन्हें अपने जुनून से पीछे हटना पड़े. योगेश कहते हैं कि हेल्दी शरीर वाले लोग भी अक्सर चुनौतियों से पीछे हट जाते हैं. अपनी एवरेस्ट तक की जर्नी को योगेश ने पुणे से शुरू किया.

कंपनियों ने मना किया, फिर एक स्टार्टअप  ने हाथ थामा

योगेश ने बताया कि हर हफ्ते सिंहगढ़ किले पर चढ़ना, हर महीने आलंदी तक 27 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना और दौड़ना, हाफ-मैराथन पूरी करना और पुणे-मुंबई रूट पर साइकिल चलाना मुश्किल है. लेकिन ये इतना मुश्किल नहीं, जितना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी के बेस कैंप पर खड़ा होना होता है. खासकर तब जब आपका शरीर इसकी गवाही ने देता हो.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए योगेश ने बताया कि, अधिकतर कंपनियां जो ट्रेकिंग और पर्वतारोहण करवाती हैं, वो उनके जैसे क्लाइंट्स को मेडिकल हिस्ट्री की वजह से शामिल नहीं करती हैं. लेकिन दिल में स्टेंट लगा होने के बावजूद योगेश ने हार नहीं मानी औ रास्ता तलाशते रहे. इसके लिए योगेश ने पुणे के एक नए स्टार्टअप, 'सागरमाथा एक्सप्लोरर्स' से कॉन्टैक्ट किया. सागरमाथा एक्सप्लोरर्स के फाउंडर श्रीकांत धुमाले ने योगेश की स्थिति को समझा. उन्होंने योगेश से कहा कि वो चिंता न करें, एवरेस्ट पर फतह जरूर की जाएगी. योगेश ने इस स्टार्टअप से मिले सहयोग पर कहा,

'अगर श्रीकांत न होते, तो क्या मैं एवरेस्ट बेस कैंप जा पाता? मुझे नहीं लगता. अब, मैं इसे एक बार और करना चाहता हूं और एक अलग और मुश्किल रास्ते से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचना चाहता हूं. मैं सागरमाथा के साथ ही जाऊंगा.'

सागरमाथा ने योगेश को एवरेस्ट पहुंचा दिया

सागरमाथा  नाम माउंट एवरेस्ट के भारतीय और नेपाली नाम पर रखा गया है. एवरेस्ट के अलावा ये स्टार्टअप माउंट किलिमंजारो और माउंट कैलाश की यात्राएं भी करवाता है. रिपोर्ट के मुताबिक योगेश पहले एक IT प्रोफेशनल थे. लेकिन अब वो आउटडोर एक्टिविटी, फिटनेस और स्पोर्ट्स के शौकीन हैं. सागरमाथा को खास बनाने वाली चीज है इसमें शामिल होने वाले लोग. इससे जुड़ने वाले एडवेंचर के शौकीनों में डायबिटीज, अस्थमा, लिगामेंट की समस्या से लेकर लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले व्यक्ति भी शामिल हैं.

योगेश ने जो कर के दिखाया है, उसके बाद से कई सीनियर सिटिज़न और युवा एस्पिरेंट्स के बीच वो लोकप्रिय हो गए हैं. लेकिन इस काम में वो अकेले नहीं है. योगेश के कदम-कदम पर उनकी पत्नी उनके साथ हैं. साथ ही वो सागरमाथा की को-फ़ाउंडर भी हैं. उन्हें भी ट्रेकिंग का कोई अनुभव नहीं था और उन्हें अस्थमा और डायबिटीज की समस्या थी, फिर भी उन्होंने एवरेस्ट बेस कैंप तक की यात्रा की.

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लॉकडाउन में शुरू हुई सागरमाथा

सागरमाथा की शुरुआत तब हुई जब योगेश लॉकडाउन के दौरान अपने दोस्तों के साथ घर पर बैठे-बैठे थक गए थे. लिहाजा वो एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचने का प्लान बनाने लगे. उनके साथ के अधिकतर लोग पहली बार ट्रेकिंग कर रहे थे और वो सब 40 साल से ज्यादा उम्र के थे. सितंबर 2022 में, योगेश ने 22 लोगों के अपने पहले ग्रुप को लीड किया. तब से, वह कई बार अलग-अलग ग्रुप्स के साथ ऐसी ट्रेकिंग्स पर जा चुके हैं. वो कहते हैं,

जब ऐसे लोग एवरेस्ट बेस कैंप जाने का फैसला करते हैं जिन्हें फ़िटनेस का कोई अनुभव नहीं होता, तो उन्हें पता होता है कि यह काफी मुश्किल है. जब भी कोई नया हमसे जुड़ता है, तो हम पहले ही दिन उनके लिए एक प्रोग्राम बनाते हैं. ये कस्टमाइज़्ड प्रोग्राम होते हैं क्योंकि सबका फिटनेस लेवल अलग-अलग होता है. हम उस व्यक्ति से कोच की मदद लेने के लिए कहते हैं. हम कोच को एक प्रोग्राम देते हैं और यह पक्का करते हैं कि वे उस प्रोग्राम को ठीक से चलाएं. हम हर हफ्ते या 15 दिन में फ़ॉलो-अप करते हैं.

योगेश आगे बताते हैं,

हम लोगों से शारीरिक और मानसिक रूप से जुड़े रहते हैं और ऐसा माहौल बनाते हैं जहां व्यक्ति आसानी से अपना लक्ष्य हासिल कर सके।” वे हर साल एवरेस्ट बेस कैंप, माउंट किलिमंजारो और माउंट कैलाश के लिए चार बैच ले जाते हैं, जिनकी कीमत 1.5 लाख रुपये से शुरू होती है.

योगेश के मुताबिक शारीरिक रूप से कमजोर या किसी समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए सागरमाथा सबसे बेस्ट स्टॉप है. उनके ज्यादातर क्लाइंट्स लोगों की सलाह या चर्चा सुनकर उनके पास आते हैं. योगेश कहते हैं कि इस साल उनका लक्ष्य 100 लोगों को साथ जोड़ना है. वो बताते हैं कि वो पहले ही 50 फीसदी से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुके हैं.

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