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KBC में तहसीलदार ने जीते थे 50 लाख रुपये, अब 2.5 करोड़ रुपये के करप्शन में हुईं अरेस्ट

Sehore Tehsildar Amita Singh Arrest: अमिता सिंह को उनके ग्वालियर स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया गया है. अमिता सिंह तोमर पहली बार 2019 में चर्चा में आई थीं. उन्होंने चर्चित शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में 50 लाख रुपये जीते थे.

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27 मार्च 2026 (अपडेटेड: 27 मार्च 2026, 03:54 PM IST)
tehsildar amita singh tomar of madhya pradesh who won 50 lakh in kbc kaun banega crorepati arrested in flood relief scam case
केबीसी में 50 लाख जीतने वाली अमिता सिंह तोमर (PHOTO- Express Photo)
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मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के विजयपुर में तैनात तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को अरेस्ट कर लिया गया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने बाढ़ राहत फंड में 2.5 करोड़ रुपये का घपला किया है. 26 मार्च को अमिता सिंह को उनके ग्वालियर स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया गया. अमिता सिंह तोमर पहली बार 2019 में चर्चा में आई थीं. उन्होंने चर्चित शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में 50 लाख रुपये जीते थे.

अमिता सिंह तोमर पर 2021 की बाढ़ के बाद मुआवजा बांटने से जुड़े 2-2.5 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने का आरोप है. जांच के मुताबिक, अधिकारियों ने बड़ौदा तहसील के 794 प्रभावित निवासियों को योग्य लाभार्थी के तौर पर पहचाना था. इन्हें बाढ़ राहत पैकेज से मुआवजा दिया जाना था. बाद में एक ऑडिट से पता चला कि पैसा प्रभावित लोगों तक पहुंचने के बजाय, कथित तौर पर 127 फर्जी बैंक खातों में भेज दिया गया. यानी मुआवजा तो दिया गया, लेकिन लाभार्थियों को नहीं, बल्कि फर्जी अकाउंट में.

पुलिस का दावा है कि यह हेरफेर कोई इत्तेफाक नहीं है. यह एक बड़े पैटर्न का हिस्सा था जिसमें सरकारी रिकॉर्ड और लाभार्थियों की लिस्ट से छेड़छाड़ की गई थी. यह मामला तब और बढ़ गया जब जांच टीम ने 100 से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम बताए, जिनमें दो दर्जन से ज्यादा पटवारी थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जांच टीम ने कुछ ऐसे लेनदेन की ओर इशारा किया है, जिनका संबंध कथित तौर पर अमिता सिंह तोमर के परिवार के सदस्यों के बैंक अकाउंट्स से है. इसी जांच के आधार पर स्थानीय पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और एंटी करप्शन एक्ट के प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए हैं. पुलिस ने आरोप लगाया कि सरकारी सहायता बांटने में अमिता सिंह ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया.

अमिता सिंह तोमर की अग्रिम जमानत याचिका को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. इसके बाद उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया. इसके तुरंत बाद प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए श्योपुर के कलेक्टर अर्पित वर्मा ने गिरफ्तारी से एक दिन पहले उन्हें उनके पद से हटा दिया.

इस मामले पर जानकारी देते हुए श्योपुर के एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल ने कहा, 

‘इस मामले में तहसीलदार को आरोपी बनाया गया था, उन्हें गिरफ्तार किया गया और स्थानीय अदालत में पेश किया गया. मामले की जांच अभी जारी है.’

अमिता सिंह तोमर का क्या कहना है?

अमिता के वकील ने यह दलील दी कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है. उनकी भूमिका केवल प्रक्रिया के तहत थी. उनकी कानूनी टीम ने यह जोर देकर कहा कि लाभार्थियों की लिस्ट और बैंक डिटेल्स, पटवारियों ने तैयार किए थे. इसके बाद रेवेन्यू इंस्पेक्टर और नायब तहसीलदारों ने इसकी पुष्टि की थी. इसके बाद ही सिग्नेचर करने और आगे की कार्रवाई के लिए फाइलें अमिता सिंह के पास आईं.

अमिता सिंह के वकील ने आगे कहा कि उन्होंने न तो किसी लेन-देन को संभाला और न ही उन्हें कोई सीधा फायदा मिला. शुरुआत में FIR में भी उनका नाम शामिल नहीं था. उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि इस केस में कई सह-आरोपियों का हाथ है. सह-आरोपियों में पटवारी शामिल हैं, जिन पर रिकॉर्ड तैयार करने में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है. लेकिन उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है.

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