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"हिंदीभाषी राज्यों में पढ़ाई पर जोर नहीं, लोगों को गुलाम बनाते हैं", दयानिधि मारन के बयान पर बवाल

DMK सांसद Dayanidhi Maran ने कहा कि हिंदी शिक्षा पर जोर देने वाले राज्यों में शिक्षा के मौके सीमित होते हैं, जबकि Tamil Nadu के द्रविड़ मॉडल ने समानता के साथ शिक्षा को बढ़ावा दिया है, खासकर लड़कियों के लिए.

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DMK सांसद दयानिधि मारन के बयान पर विवाद. (ITG)
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अनघा
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14 जनवरी 2026 (Updated: 14 जनवरी 2026, 11:38 PM IST)
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द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के सांसद दयानिधि मारन के एक बयान ने एक बार फिर उत्तर और दक्षिण के राज्यों के बीच बहस छेड़ दी है. उन्होंने अंग्रेजी के बजाय हिंदी शिक्षा पर जोर देने वाले राज्यों की सरकारों पर गंभीर सवाल उठाए. मारन का कहना था कि कुछ राज्य केवल हिंदी को महत्व देते हैं और अंग्रेजी को छोड़ने के लिए कहते हैं. इससे छात्रों के रोजगार के मौके सीमित हो जाते हैं और वे दक्षिणी राज्यों में काम की तलाश में पलायन करते हैं.

तमिलनाडु के सत्ताधारी दल DMK के सांसद दयानिधि मारन ने दावा किया कि हिंदी शिक्षा वाले राज्यों में महिलाओं को ‘आजादी नहीं मिलती’. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे राज्यों में अंग्रेजी ना पढ़ाकर लोगों को 'गुलाम' बनाया जाता है. 

इंडिया टुडे से जुड़ीं अनघा की रिपोर्ट के मुताबिक, एक कार्यक्रम में मारन ने कहा,

"दुनिया की सभी बड़ी टॉप कंपनियां तमिलनाडु आ रही हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां पढ़े-लिखे स्टूडेंट्स मिलते हैं. अगर आप दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो वे स्टूडेंट्स से कहते हैं, 'पढ़ाई करके क्या करोगे? सिर्फ़ हिंदी पढ़ो; कुछ और मत पढ़ो, इंग्लिश को हाथ मत लगाना. अगर इंग्लिश पढ़ोगे, तो बर्बाद हो जाओगे.' वे उन्हें गुलाम बनाकर रखते हैं. इसीलिए, उन राज्यों में नौकरी के मौके नहीं हैं, और उन राज्यों से लोग यहां नौकरी के लिए आ रहे हैं.

मारन ने आगे कहा,

"आज उत्तरी राज्यों से लोग नौकरी के लिए हमारे राज्य में आ रहे हैं. इसका कारण यह है कि हम यहां पढ़े-लिखे हैं. सिर्फ हम ही नहीं, बल्कि यहां की सभी औरतें भी पढ़ी-लिखी हैं. द्रविड़ मॉडल का नेक मकसद यह है कि मर्द और औरतें दोनों पढ़े-लिखे हों, सब बराबर हों, सब तरक्की करें, और सबकी पहुंच हर चीज तक हो."

उन्होंने यह भी कहा कि अगर छात्रों को हिंदी तक सीमित कर दिया जाता है, तो यह उनकी फ्यूचर प्लानिंग और रोजगार के मौकों को ‘सीमित’ करता है. उनका यह भी मानना था कि ऐसी नीतियों के कारण ना केवल शिक्षा में पिछड़ापन आता है, बल्कि बेरोजगारी भी बढ़ती है, और लोग रोजगार की तलाश में तमिलनाडु जैसे राज्यों का रुख करते हैं.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिंदी शिक्षा पर जोर देने वाले राज्यों में शिक्षा के मौके सीमित होते हैं, जबकि तमिलनाडु के द्रविड़ मॉडल ने समानता के साथ शिक्षा को बढ़ावा दिया है, खासकर लड़कियों के लिए. उनका कहना था कि इस मॉडल ने महिलाओं की साक्षरता दर और वर्कफोर्स में उनकी भागीदारी को बढ़ाया है.

मारन के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. BJP नेता थिरुपति नारायणन ने मीडिया से बात करते हुए कहा,

"मुझे नहीं लगता कि दयानिधि मारन को कोई 'कॉमन सेंस' है. मैं उनके बयान की कड़ी निंदा करता हूं और उन्हें भारत के लोगों से माफी मांगनी चाहिए, खासकर हिंदी भाषी समुदाय से."

वहीं, DMK नेता टीकेएस एलंगोवन ने मारन का बचाव किया. उन्होंने कहा,

"यह उस पार्टी पर निर्भर करता है जो राज्य में शासन कर रही है. अब कांग्रेस महिलाओं को सशक्त बना रही है. इसमें कोई शक नहीं है कि जहां भी कांग्रेस शासन कर रही है, वे महिलाओं की शिक्षा के लिए अच्छा काम कर रही हैं... यहां तमिलनाडु में हमने महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी और उन्हें सशक्त बनाया. हमने उन्हें शिक्षा दी. हमने उन्हें रोजगार दिया. हमने सरकारी नौकरियों में सीटें भी आरक्षित की हैं."

टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु में शुरू से ही महिलाओं के अधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए काम किया जा रहा है. उन्होंने ये तक दावा किया कि उत्तर भारत में महिलाओं के लिए लड़ने वाला कोई नहीं है.

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