तमिलनाडु चुनाव में क्या विदेशी नागरिकों ने भी वोट डाला? चुनाव आयोग ने दिए जांच के आदेश
यह मामला तब सामने आया जब चेन्नई और मदुरै में कई विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया. इन नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से मतदान किया. इसके बाद इमिग्रेशन अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी, जिसके आधार पर आगे की जांच शुरू हुई.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 खत्म होने के बाद भी विवादों का सिलसिला थम नहीं रहा है. दावा किया जा रहा है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विदेशी नागरिकों ने भी मतदान किया है. इस मामले के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दे दिए हैं. चुनाव आयोग ने राज्य के कई शहरों और जिलों के रिटर्निंग ऑफिसर्स से रिपोर्ट मांगी है. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने राज्य के कम से कम 2 शहरों और 5 जिलों के रिटर्निंग ऑफिसर्स से रिपोर्ट मांगी है. साथ ही पूछा है कि विशेष मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बावजूद विदेशी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में कैसे आए और वे मतदान करने में कैसे सफल हो गए?
ये मामला तब सामने आया, जब चेन्नई और मदुरै में कई विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया गया. इन नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी तरीके से मतदान किया. इसके बाद इमिग्रेशन अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी, जिसके आधार पर आगे की जांच शुरू हुई. अधिकारियों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करने वाले सीनियर ऑफिसर अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि विदेशी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हुए?
राज्य में चुनाव से पहले SIR किया गया था. इसके तहत घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच की गई थी. इस प्रक्रिया का मकसद मृत लोगों, डुप्लीकेट नामों, दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से जा चुके लोगों और गैर-भारतीय नागरिकों के नाम मतदान लिस्ट से हटाना था. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक श्रीलंका, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों से जुड़े करीब 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है या पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि 23 अप्रैल 2026 को हुए मतदान से पहले तमिलनाडु आने वाले विदेशी नागरिकों में से किन-किन लोगों ने वोट डाला.
एक पुलिस अधिकारी ने अखबार को बताया,
पुलिस ने दर्ज किया केसहो सकता है कि कुछ लोग वोट डालकर देश छोड़ चुके हों. हमें खास जानकारी मिली थी, जिसके बाद कई लोगों को रोका गया. अब विदेश से आने वाले लोगों का डेटा खंगाला जा रहा है.’
पुलिस ने गिरफ्तार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 172 और 318(2) के तहत मामला दर्ज किया है. इनमें चुनाव में किसी और की पहचान बनाकर वोट डालना और धोखाधड़ी जैसे आरोप शामिल हैं. इसके अलावा जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 31 भी लगाई गई है, जिसमें गलत जानकारी देने पर सजा का प्रावधान है. जब अधिकारियों से पूछा गया कि दूसरे देशों की नागरिकता लेने के बाद भी इन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से क्यों नहीं हटाए गए तो एक रिटर्निंग ऑफिसर ने SIR की प्रक्रिया का जिक्र किया.
उन्होंने बताया कि अगर कोई मतदाता घर पर मौजूद नहीं हो तो परिवार का कोई वयस्क सदस्य उसकी तरफ से घोषणा पत्र भर सकता है. अधिकारी ने कहा कि इसी नियम के गलत इस्तेमाल होने की आशंका है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगा क्योंकि अभी मामले की जांच चल रही है. इस मामले पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करेगा
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