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20 साल पुरानी बोतल में पीता रहा कॉफी, वही बन गई मौत की वजह

ताइवान में एक शख्स 20 साल पुराने बोतल से कॉफी पीता था. शरीर में लेड की मात्रा ज़्यादा होने के कारण उसकी मौत हो गई. 'लेड पॉइज़निंग' क्या होता है? किन बर्तनों में लेड पाया जाता है?

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steel bottle leads to lead toxicity
कितने साल पुराने बोतल में पानी पीते हैं आप? (फोटो-ऑनलाइन)
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शुभम कुमार
19 जनवरी 2026 (Published: 02:58 PM IST)
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सुबह उठते ही पहली चीज़ शरीर में क्या जानी चाहिए? इसपर सबकी अपनी चॉइस है. कोई ग्रीन-टी पीता है, किसी को घरेलू नुस्खे वाली ड्रिंक पसंद है तो किसी को रेगुलर चाय या कॉफ़ी. लेकिन क्या पी रहे हैं से ज़्यादा मायने रखता है किस चीज़ में पी रहे हैं. मतलब, किस तरह के बर्तन में पी रहे हैं. इन दिनों ताइवान का एक वाकिया वायरल हो रहा है. उसकी वजह ये है कि शख्स 20 साल से लगातार एक ही बोतल में कॉफी पी रहा था. और एक दिन अचानक उसकी मौत हो गई. जांच में पता चला कि मौत अचानक नहीं हुई, इसके पीछे 'लेड पॉइज़निंग' का हाथ हैं. जिसकी थोड़ी मात्रा भी शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है. क्या बला है ये? सेहत पर किस तरह असर डालता है? एक एक कर समझते हैं. 

20 साल से थर्मस नहीं बदला 

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक़, शख्स की उम्र 50 साल थी. एक दिन वो गाड़ी चलाते हुए एक दुकान से जाकर भिड़ गए. शुरुआत में ये बिल्कुल सामान्य दुर्घटना लगी. लेकिन अस्पताल में विस्तृत जांच के दौरान कई गड़बड़ियां सामने आईं. शख्स को लगातार थकान रहती, दिमाग के एक हिस्से में सिकुड़न थी, खून की कमी और किडनी पर असर भी देखा गया. सारे सिम्प्टम लगभग डेमेंशिया की तरह ही थे. उनके टेस्ट बड भी काम करना बंद कर चुके थे. उनके नमक का बिल्कुल अंदाज़ा नहीं होता. डॉक्टर ने जब उनके खून की जांच की तब उनके अंदर भारी मात्रा में लेड पाया गया. 

lead test
ब्लड टेस्ट के ज़रिए लेड का पता लगाया जाता है.  

लेकिन ये लेड आखिर शख्स के शरीर में पहुंचा कैसे? शख्स के पास 20 साल पुराना स्टील का बोतल था जिससे वो हर रोज़ कॉफी पीया करता था. समय के साथ जंग लगने और परत टूटने के बाद कॉफी जैसी गर्म और एसिडिक ड्रिंक उस धातु की परत को घिसती रही, और धीरे-धीरे लेड उसके कॉफी में मिलता गया. सालो तक ये सिलसिला यूंही चला और थोड़ा-थोड़ा ज़हर उसके शरीर में जमा होता गया. 

ये भी पढ़ें: एल्युमिनियम के बर्तनों में बने खाने से होती है लेड टॉक्सिसिटी, सेक्स की इच्छा पर भी पड़ता है असर

लेड घातक कैसे है?

भारतीय डॉक्टर जयंत ठाकुरिया बताते हैं कि लेड टॉक्सिसिटी तब होती है, जब बहुत ज़्यादा लेड शरीर में जमा हो जाता है. इसे लेड पॉइज़निंग भी कहते हैं. ऐसा लेड खाने, पीने, छूने और सूंघने से भी हो सकता है. शरीर में लेड के जमने से कई हिस्सों पर असर पड़ता है. जैसे दिमाग पर. इससे याद्दाश्त कमज़ोर हो सकती है. लिवर और किडनी पर असर पड़ता है. उनके काम करने की शक्ति घट जाती है. लेड हड्डियों में जमा होता रहता है, जिससे हड्डियां कमज़ोर हो सकती हैं. शरीर में खून की कमी हो सकती है. ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है. पाचन तंत्र और रिप्रोडक्टिव अंगों से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं.

लेड कहां पाया जाता है?

लेड कई चीज़ों में पाया जाता है. जैसे पेंट में. पुराने पाइप्स में. कुछ हर्बल दवाइयों में. खिलौनों में. मिट्टी के बर्तनों में. गहनों और कॉस्मेटिक्स के सामानों में. बहुत ज़्यादा पुराने बर्तन या घिसे हुए बर्तन इस्तेमाल नहीं करने चाहिए. इसमें मौजूद लेड खाने में मिलकर शरीर में घुस सकता है.

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