सूरत में 100 घरों पर बुलडोजर 'भूतों' ने चलाया? नगर निगम के अधिकारी कह रहे- 'हमें नहीं पता'
Surat Ghost Demolition: एडिशनल सिटी इंजीनियर आशीष नाइक ने ये तो माना कि नगर निगम की टीमें 30 मई को सफाई और सड़क की चौड़ाई तय करने नासिर नगर गई थीं. कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए को लेकर पुलिस को भी जानकारी दी गई थी. लेकिन आशीष नाइक ने ये नहीं बताया कि डिमोलिशन के पीछे कौन था.

सूरत शहर के नासिर नगर इलाके की एक झुग्गी बस्ती में लगभग 100 घरों को किसने गिराया, ये अब तक साफ नहीं है. दावा है कि ये तोड़फोड़ नगर निगम के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई. लेकिन अधिकारियों ने इस कार्रवाई में अपनी किसी भूमिका से इनकार कर दिया. इसीलिए इस घटना को ‘घोस्ट डिमोलिशन’ कहा जा रहा है.
मई में हुई इस घटना पर अब सूरत नगर निगम (SMC) के अधिकारियों ने अपनी-अपनी बात रखी है. लेकिन यहां भी कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, SMC के सेंट्रल जोन के प्रमुख और एडिशनल सिटी इंजीनियर आशीष नाइक ने ये तो माना कि नगर निगम की टीमें 30 मई को सफाई और सड़क की चौड़ाई तय करने नासिर नगर गई थीं. कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को भी बुलाया गया था. लेकिन डिमोलिशन किसने करवाया, ये आशीष नाइक ने नहीं बताया.
सवाल और भी हैं. मसलन, अगर नगर निगम की टीम सिर्फ सड़क की चौड़ाई तय करने गई थी, तो भारी मशीनरी और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को क्यों तैनात किया गया?
कमिश्नर का बयान इससे अलगआशीष नाइक के बयान के कुछ घंटों बाद म्युनिसिपल कमिश्नर नागराजन एम ने भी मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी. लेकिन डिमोलिशन के पीछे कौन था, इसका जवाब उन्होंने भी नहीं दिया. केवल इतना बोले, "मुझे नहीं पता कि तोड़-फोड़ किसने की. तथ्यों का पता लगाने के लिए मैंने एक जांच समिति बनाई है."
कमिश्नर ने भी तोड़फोड़ की कार्रवाई में SMC अधिकारियों की भूमिका से इनकार किया. लेकिन साथ में ये भी कहा कि अगर कर्मचारियों की कोई गलती पाई गई, तो कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी.
हालांकि डिमोलिशन से जुड़े वीडियो कुछ और ही बयान करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो में घटना के दिन सीनियर सिविक अधिकारी, SMC हेडक्वार्टर के रोड डिपार्टमेंट के अधिकारी और सेंट्रल जोन के कर्मचारियों को देखा जा सकता है.
BJP विधायक ने जताई चिंताकतारगाम के BJP विधायक विनोद मोराडिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में इस घटना पर चिंता जताई. बोले,
"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि SMC अधिकारियों ने पहले वहां होने से इनकार किया और अब मान रहे हैं कि वे उस इलाके में गए थे. जो अधिकारी इस कार्रवाई में शामिल थे, उन्हें जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए."
विधायक ने पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए.
क्या है मामला?
सूरत के कतारगाम इलाके में स्थित नासिर नगर में बीती 30 मई को कई घरों को गिरा दिया गया था. आरोप है कि बिना किसी कानूनी नोटिस के ये कार्रवाई की गई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बाद में दिए एक नोटिस ने इस विवाद को और बढ़ा दिया.
SMC ने कथित तौर पर उस मालिक को नोटिस भेजा, जिनके प्लॉट पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य चल रहा है. इसमें कहा गया,
"रेवेन्यू सर्वे नंबर 1267, 1267/3 और 1268 पर इमारत बनाने के लिए बेसमेंट और नींव का काम चल रहा है. इसके लिए SMC से कोई मंज़ूरी नहीं ली गई है. बेसमेंट/नींव वाली जगह पर पानी जमा होने की संभावना है, जिससे मच्छर पनप सकते हैं और आस-पास रहने वाले लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है. इसलिए बेसमेंट या नींव वाली जगह को भरा जाए. अगर बीमारी फैलती है या जान-माल का नुकसान होता है, तो इसके लिए आपको जिम्मेदार ठहराया जाएगा."
रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम ने नोटिस में अवैध निर्माण का कोई जिक्र नहीं किया. अब नगर निगम इस कार्रवाई से ही पल्ला झाड़ रहा है. यही से सवाल पैदा हुआ कि क्या 100 घरों को भूतों ने गिरा दिया. बोले तो 'Ghost Demolition'.
इस डिमोलिशन की वजह से कई परिवार बेघर हो गए. बताया गया कि कई घर 40-45 साल पुराने थे. नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स भी देते हैं.
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