'हमारे सब बच्चे मर गए, अधिकारी-नेता परेशान करते हैं, हमें इच्छामृत्यु चाहिए', बुजुर्ग दंपती की कलेक्टर से गुहार
Surat couple euthanasia plea: गुजरात के सूरत में एक बुजुर्ग दंपती ने इच्छामृत्यु की अनुमति मांगते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि वे सूरत महानगरपालिका के उधना साउथ जोन के कार्यकारी इंजीनियर और स्थानीय राजनीतिक नेताओं से तंग आ गए हैं. दंपती के पूरे परिवार की सालों पहले मौत हो गई थी.

गुजरात के सूरत में एक बुजुर्ग दंपती ने इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) की अनुमति मांगी है. कपल ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है. उन्होंने सूरत नगर निगम (SMC) के अधिकारियों और स्थानीय राजनीतिक नेताओं पर कई सालों से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है.
पीड़ित की पहचान पति श्यामभाई कपूरजी गहलोत (73 वर्षीय) और पत्नी मधुबेन गहलोत (68 वर्षीय) के रूप में हुई है. वे पांडेसरा स्थित जलाराम नगर के रहने वाले हैं. गहलोत परिवार ने 2006 में बमरोली ग्राम पंचायत में प्लॉट नंबर 95, 96, 107 और 110 में 11 दुकानें खरीदी थीं. साल 2008 में ये जगह नगर निगम के क्षेत्र में आ गई. जिसके बाद से वे नियमित रूप से टैक्स भर रहे हैं.
5 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद खुली थी सीलदंपती का आरोप है कि साल 2021 में उधना जोन के तत्कालीन कार्यकारी इंजीनियर ने बिना किसी नोटिस के उनकी 11 दुकानों को अवैध रूप से सील कर दिया. कार्रवाई को चुनौती देने के लिए उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया. 5 साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 31 जनवरी 2026 को दुकानों की सील खोल दी गई. दंपती की मदद फायर विभाग की एक रिपोर्ट ने भी की. डिपार्टमेंट ने बताया कि दुकानें छोटी होने की वजह से फायर सेफ्टी की जरूरत नहीं है.
दंपती ने अपनी दुकानें फिर से शुरू कीं. मगर 30 मई को उधना साउथ जोन के वर्तमान कार्यकारी इंजीनियर के आदेश पर बिना किसी लिखित नोटिस या कारण बताए उनकी 11 दुकानों पर दोबारा ताला लगा दिया गया.
कानूनी लड़ाई लड़ते हुए थक गया कपलइंडिया टुडे के पत्रकार संजय सिंह राठौड़ से बात करते हुए दंपती ने आरोप लगाया कि इंजीनियर उन पर लगातार स्थानीय भाजपा नेता से मिलने का दबाव बना रहे हैं. उनकी दुकानों को हड़पने की साजिश रची जा रही है. उनका कहना है कि इस उम्र में कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते और आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद होने के बाद अब उन में जीने की इच्छा नहीं बची है. इसलिए उन्होंने कलेक्टर से इच्छामृत्यु की आधिकारिक मंजूरी देने की गुहार लगाई है.
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इच्छामृत्यु की मांग करने वाले श्याम भाई गहलोत ने बताया,
परिवार के 9 सदस्यों की सड़क दुर्घटना में मौत“आज से साढ़े 5 साल पहले कार्यपालक इंजीनियर सुजल साहब प्रजापति ने मेरी दुकानों को सील किया. सील मारने का मैंने कारण पूछा, तो कहा कि 'शैतान सिंह रतन सिंह जो पैसा जितना मांगे, उतना तुम दे दो तो मैं सील खोलूंगा.' मैंने बोला- 'साहब, मैं किस बात का पैसा दूं? उसका कोई मेरा लेना नहीं, देना नहीं, कोई व्यवहार नहीं, किस बात का?' तो कहे- 'नहीं, वो जितना मांगे उतना दे दो, तो मैं सील खोलता.' फिर मैं हाई कोर्ट गया. हाई कोर्ट के अंदर साढ़े 5 साल तक केस चला. जनवरी 2026 में सील खुली. अब फिर से दुकान पर सील लगा दी.”
श्याम भाई गहलोत ने आगे कहा, “अभी सील जो मारी 30 मई को, उसके अंदर मेरे को ना तो नोटिस दिया है, ना कोई लिखित में दिया है. मैडम सील मारने आईं, उनको पूछा क्यों सील मार रहे? तो बोलती हैं- 'ऊपर का आदेश है.' तो मेरे को कम से कम लिखित दो, नोटिस दो. ये ऐसा मेरे को टॉर्चर करते हैं साहब, मैं जाऊं तो जाऊं कहां?”
2016 में दंपती के परिवार के 9 लोगों की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी. हादसे में उनका इकलौता बेटा, बहू, दो पोते, बेटी, दामाद, दो नाती-नातिन और साले का बेटा शामिल था. पीड़ितों का कहना है कि उनके पास अब कोई नहीं है. वे सीनियर सिटीजन हैं. ऐसे में कहां जाएं.
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