The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Supreme Court stays Rajasthan High Court order to move 1,102 liquor shops

हाईवे किनारे खुले रहेंगे ठेके, गाड़ी और गिलास को अलग करने वाले फैसले पर सुप्रीम 'ब्रेक'

Supreme Court ने कहा कि Rajasthan High Court की चिंताएं ‘बिल्कुल जायज’ थीं, लेकिन राज्य सरकार को दिए गए निर्देशों को न्यायिक जांच की जरूरत है. क्या है पूरा मामला?

Advertisement
Supreme Court stays Rajasthan High Court order to move 1,102 liquor shops
सुप्रीम कोर्ट ने यह बात मानी है कि शराब पीने से जुड़े सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है. (सांकेतिक फोटो: आजतक)
pic
अर्पित कटियार
20 जनवरी 2026 (Published: 11:17 AM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

करीब दो महीने पहले राजस्थान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि हाईवेज के 500 मीटर के दायरे में बनी शराब की दुकानों को हटा दिया जाए. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है. हालांकि, कोर्ट ने यह बात मानी है कि शराब पीकर गाड़ी चलाने से होने वाले सड़क हादसों की संख्या बढ़ रही है.

क्या है पूरा मामला?

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में चूरू के रहने वाले कन्हैया लाल सोनी और मनोज नाई ने राजस्थान हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि हाईवेज के किनारे शराब की दुकानों को ऑपरेट करके ‘आबकारी एक्ट’ और उसके नियमों के उल्लंघन किया जा रहा है.

PIL पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने 24 नवंबर, 2025 को अपने आदेश में कहा कि हाईवेज के 500 मीटर के दायरे में बनी करीब 1,102 शराब की दुकानों को दो महीने के भीतर हटा दिया जाए और दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए.

इसके बाद, राम स्वरूप यादव ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की. इसमें उन्होंने तर्क दिया था कि हाई कोर्ट ने स्टेकहोल्डर्स को सुनवाई का मौका दिए बिना ही ये निर्देश जारी कर दिए. 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यादव की याचिका पर सुनवाई की. रामस्वरूप की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर हाई कोर्ट के आदेश लागू किए जाते हैं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. 

रोहतगी ने कहा कि कोर्ट चूरू के एक गांव से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था, लेकिन निर्देश पूरे राज्य के लिए जारी कर दिए. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य उनका समर्थन कर रहा है.

राजस्थान सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने बताया कि राज्य के कई शहर और कस्बे नेशनल और स्टेट हाईवेज पर बने हैं. उन्होंने कहा कि अगर हाई कोर्ट के आदेश को लागू किया जाता है तो शहरी क्षेत्रों के बड़े हिस्से से शराब की दुकानें हट जाएंगी. उन्होंने यह भी बताया कि चंडीगढ़ जैसे शहरों में सभी शराब की दुकानें हटानी पड़ेंगी, जो सीधे हाईवेज पर ही बने हैं.

सीनियर वकील रोहतगी और सॉलिसिटर मेहता की दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट की चिंताएं ‘बिल्कुल जायज’ थीं, लेकिन राज्य सरकार को दिए गए निर्देशों को न्यायिक जांच की जरूरत है. 

ये भी पढ़ें: 'दो बार शराब पी... गुस्से में भगाता रहा', 14 लोगों की जान लेने वाले डंपर के ड्राइवर ने अब सब बताया

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा,

यहां दिखाई गई चिंता बिल्कुल जायज है... सच्चाई यह है कि वास्तव में कई मौतें हुई हैं. लोगों की जान बचाने के लिए कोई न कोई निर्णय या नीति लागू करनी होगी.

पीठ ने नोटिस जारी किया और अगले आदेश तक हाई कोर्ट के निर्देशों पर रोक लगा दी. हालांकि, बेंच ने यह भी साफ किया कि वह शराब पीने से जुड़े सड़क हादसों और मौतों से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर रहा है.

वीडियो: सोशल लिस्ट: सिगरेट, शराब, लड़ाई... 'धुरंधर' देखते हुए सिनेमा हॉल से कैसे वीडियो हुए वायरल?

Advertisement

Advertisement

()