The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Supreme court refuse to adjourn hearing on cec and ec appiontment

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों के सिलेक्शन प्रोसेस से जुड़ी सुनवाई टालने से इनकार किया

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2023 में एक अधिनियम बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की प्रक्रिया को बदल दिया था. सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई. शीर्ष अदालत इस मामले की सुनवाई कर रहा है. सरकार का पक्ष रख रहे सोलिसिटर जनरल ने कोर्ट से मामले की सुनवाई टालने का अनुरोध किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे साफ इनकार कर दिया.

Advertisement
pic
6 मई 2026 (अपडेटेड: 6 मई 2026, 06:26 PM IST)
Supreme court justice dipankar dutta election commissioner
सुप्रीम कोर्ट ने CEC की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी याचिका पर सुनवाई रोकने से इनकार किया है. (इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि ये मामला किसी भी दूसरे मामले से ज्यादा जरूरी है. सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी व्यस्तता के चलते इस मामले की सुनवाई टालने की अपील की थी.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा, शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी. मामले में भारत सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता रख रहे थे.

उन्होंने जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुआई वाली दो जजों की बेंच को बताया कि 9 जजों की बेंच सबरीमाला केस की सुनवाई कर रही है, वे उस मामले में व्यस्त हैं. इसलिए इस मामले की सुनवाई फिलहाल के लिए रोक दिया जाए. SGI ने आगे कहा कि वे इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलील सुनने के लिए कोर्टरूम में मौजूद रहना चाहते हैं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले में सुनवाई टालते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों से अपनी दलील शुरू करने का आदेश दिया. जस्टिस दत्ता ने कहा, 

हमने आज न्यूजपेपर में पढ़ा कि सबरीमाला मामले में कल (5 मई) की सुनवाई के दौरान 9 जजों की बेंच की ओर से एक टिप्पणी आई कि 2006 की उस जनहित याचिका को स्वीकार हीं नहीं किया जाना चाहिए था, जिसके चलते अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र के महिलाओं की एंट्री पर लगी रोक हटी. इसलिए जजों के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए मैं कहना चाहूंगा कि नौ जज एक ऐसे मामले में व्यस्त हैं, जिसमें खुद उन्होंने ये टिप्पणी की है कि उसे शुरू में स्वीकार ही नहीं किया जाना चाहिए.  ऐसे में मुख्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का मामला दूसरे किसी भी मामले से ज्यादा जरूरी है. इसलिए इस पर सुनवाई आगे के लिए टाली नहीं जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने से किया साफ इनकार

सॉलिसिटर जनरल ने बार-बार बेंच से मामले की सुनवाई को स्थगित करने की मांग की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी बात नहीं मानी. जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता आज अपनी दलील रख सकते हैं, वहीं केंद्र सरकार किसी और दिन अपनी दलील शुरू कर सकती है.

डॉ. जया ठाकुर, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और लोक प्रहरी जैसी संस्थाओं ने दिसंबर 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त को चुनने वाले अधिनियम को चुनौती दी है. इन याचिकाओं का आधार सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 का एक फैसला है,  जिसमें कहा गया था कि जब तक कोई नया कानून नहीं बन जाता, तब तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और भारत के चीफ जस्टिस की एक समिति द्वारा की जानी चाहिए.

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी है याचिका

वहीं 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा, शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' के मुताबिक, राष्ट्रपति एक चयन समिति की सिफारिश पर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियक्ति करेंगे. चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होंगे.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि दिसंबर 2023 में पारित अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भावना के खिलाफ है. अधिनियम के तहत निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव आयोग की नियुक्ति के मूल उद्देश्य को चोट पहुंच सकती है. मार्च 2026 में इस याचिका से चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने खुद को अलग कर लिया था, क्योंकि याचिकाकर्ता चयन समिति से चीफ जस्टिस को हटाए जाने को चुनौती दे रहे थे.

वीडियो: TMC की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

Advertisement

Advertisement

()