सुप्रीम कोर्ट को मिले 5 नए जज कौन हैं? 4 दिन में नियुक्ति हुई है
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के चार दिन के भीतर पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति कर दी गई है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी. नियुक्त होने वालों में एक सीनियर वकील और 4 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट में जजों की 6 खाली जगहों में से 5 को भर दिया गया है. सोमवार, 1 जून को सर्वोच्च अदालत में पांच नए जजों की नियुक्ति की गई. इसके साथ ही यहां कुल जजों की संख्या 37 हो गई है. एक पद अभी भी खाली है.
पिछले साल सरकार ने एक अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या को 34 से 38 कर दिया था. अध्यादेश आने से पहले सुप्रीम कोर्ट में जजों की दो जगहें खाली थीं. जब जजों की निर्धारित संख्या बढ़ाई गई तब ये वैकेंसी 6 जजों की हो गई.
इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को 5 नामों की सिफारिश की थी. सिर्फ 4 दिनों के अंदर ही इन पांचों की सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति हो गई. ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कानून मंत्रालय के जस्टिस डिपार्टमेंट ने सोमवार, 1 जून की सुबह अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी कर सुप्रीम कोर्ट में हुई नियुक्तियों के बारे में जानकारी दी. इस नोटिफिकेशन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील वेंकिता सुब्रमणि मोहना को प्रमोट कर जज बना दिया गया है.
उनके अलावा, चार राज्यों के हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर प्रमोशन दिया गया है. इनमें शामिल हैंः
- बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर.
- पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू.
- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और.
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली.
इन नवनियुक्त जजों के पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस समेत 38 जज होते हैं. यानी नई नियुक्तियों के बाद भी अदालत में जज की एक सीट खाली रहेगी.
कौन बन सकता है सुप्रीम कोर्ट का जज?
संविधान के अनुच्छेद 124 (3) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए. हाई कोर्ट के जज के रूप में कम से कम 5 साल या इसी तरह के दो कोर्ट में सर्विस का अनुभव होना चाहिए. 10 सालों तक हाई कोर्ट में वकालत कर चुके वकील भी इसके लिए दावेदार होते हैं. इन सबके अलावा राष्ट्रपति की नजर में उम्मीदवार को न्याय का जानकार होना चाहिए.
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