The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • supreme court demands accurate translation of sonam wangchuk speech said its age of AI

'3 मिनट का भाषण, 8 मिनट का अनुवाद', सोनम वांगचुक मामले में SC ने लताड़ा, कहा- 'ये AI का युग है...'

Sonam Wangchuk Case SC Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोनम वांगचुक का मूल भाषण केवल 3 मिनट का है, लेकिन सरकार की तरफ से दिया गया अनुवाद 7-8 मिनट का है. अब कोर्ट ने सरकार से पूरा सटीक अनुवाद मांगा है.

Advertisement
supreme court demands accurate translation of sonam wangchuk speech said its age of AI
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सोनम के भाषण का सटीक अनुवाद मांगा है. (Photo: ITG/File)
17 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 05:40 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के विवादित भाषण का पूरा अनुवाद मांगा है. कोर्ट ने कहा है कि उसे पूरे भाषण का असल अनुवाद चाहिए और यह AI का युग है, अनुवाद 98% सटीक होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 16 फरवरी को सोनम वांगचुक के हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.

कोर्ट ने मामले पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों पर असंतोष जताया. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज से कहा,

Image embed

कपिल सिब्बल ने लगाया था आरोप

इससे पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की तरफ से कोर्ट में पेश हुए सीन‍ियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया था कि सरकार ने वांगचुक के नाम पर ऐसे शब्द जोड़े हैं जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार इस पर एड‍िशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ट्रांसक्रिप्शन एक विभाग ने किया है और हम इस काम में एक्सपर्ट नहीं हैं. जब अदालत ने सरकार से असल ट्रांसक्रिप्ट मांगा, तो इस पर सिब्बल ने कहा,

Image embed

इस बीच सुनवाई के दौरान शेर-ओ-शायरी का भी दौर चला. सुनवाई के वक़्त कोर्ट ने एक शेर का ज़िक्र करते हुए कहा- हमने वो भी सुना जो उन्होंने कहा ही नहीं. इस पर कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा- और जो हम कह रहे हैं, उन्होंने सुना ही नहीं. फिर अदालत ने कहा, ‘हम सुन रहे हैं न’. इस पर कपिल सिब्बल ने सहमति जताते हुए कहा, ‘इसीलिए तो हम यहां हैं’.

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने और भी कई आरोप सरकार पर लगाए. उन्होंने कहा,

Image embed

कॉपी-पेस्ट जैसा है आदेश: सिब्बल

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत का आदेश 'कॉपी-पेस्ट' जैसा है और बिना ठीक से दिमाग लगाए तैयार किया गया है. इसके बाद कोर्ट ने सरकार को भाषण का पूरा अनुवाद जमा कराने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी तक के लिए टाल दी. आपको याद द‍िलाते चलें क‍ि सितंबर 2025 में लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था. इसके बाद उनकी पत्नी ने उनकी रिहाई के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की.

यह भी पढ़ें- 'कुर्सी के लायक नहीं, पार्टी से निकालने पर भड़कीं सिद्धू की पत्नी ने राहुल को बहुत कुछ कह दिया

सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से कहा था कि जेल में बिगड़ती सेहत को देखते हुए वांगचुक की हिरासत के फैसले पर दोबारा से विचार किया जाए. सरकार ने पिछले हफ्ते इस मामले में अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं. 16 फरवरी को वांगचुक की पत्नी आंगमो के वकील ने जवाबी दलीलें पेश कीं.

वीडियो: पत्नी का पैकेज 11 लाख, तब भी मिलेगा गुजारा भत्ता, हाई कोर्ट ने क्या कहा?

Advertisement

Advertisement

()