'इस देश में क्या हो रहा है...', सुप्रीम कोर्ट ने 'रेवड़ी कल्चर' पर सरकारों की क्लास लगा दी!
CJI सूर्यकांत ने डायरेक्ट कैश ट्रांसफर यानी लोगों के खातों में सीधे पैसे डालने की स्कीमों पर भी चिंता जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को चुनाव से पहले ‘मुफ्त योजनाएं’ लाने पर जमकर फटकार लगाई है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कड़े शब्दों में पूछा कि आखिर यह ट्रेंड कब तक चलेगा. उन्होंने चिंता भी जताई कि इस ट्रेंड से देश का आर्थिक विकास में बाधा आएगी. सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 19 फरवरी को तमिलनाडु की बिजली कंपनी तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी. इसी दौरान अदालत ने फ्रीबीज़ ट्रेंड पर सवाल उठाए.
सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने रेवड़ी कल्चर पर सवाल उठाए. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक बेंच ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी है कि हाल में चुनावी राज्यों में क्या हुआ. कोर्ट ने पूछा कि अगर लोगों के खाते में सीधे पैसे डालने की योजनाएं इसी तरह आती रहीं तो क्या लोग काम करना चाहेंगे. CJI सूर्य कांत ने तमिलनाडु सरकार द्वारा बिजली बिल में सब्सिडी देने पर सवाल उठते हुए कहा,
CJI बोले- परेशान हो जाता हूंCJI ने आगे कहा कि यह पूरे देश में हो रहा है और वो इसे लेकर कभी-कभी सच में परेशान हो जाते हैं. उन्होंने कहा,
CJI ने आगे चुनाव से पहले फ्रीबीज बांटने के कल्चर पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा,
CJI ने इसके बाद डायरेक्ट कैश ट्रांसफर यानी लोगों के खातों में सीधे पैसे डालने की स्कीमों पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आपको लोगों के लिए रोजगार के रास्ते बनाने चाहिए, ताकि वे कमा सकें और अपनी इज्जत और आत्म-सम्मान बनाए रख सकें. अगर आप शुरू से ही फ़्री खाना, फ़्री गैस, फ़्री बिजली देना शुरू कर देंगे, तो आप सीधे अकाउंट में कैश ट्रांसफर कर रहे हैं. फिर लोग काम क्यों करें? वे काम क्यों सीखेंगे, जब उन्हें पता है कि सब कुछ मिल जाएगा.
CJI ने यह भी कहा कि कोर्ट फ़्रीबीज के मुद्दे पर दूसरी याचिकाओं पर भी विचार कर रहा है. इसके बाद कोर्ट ने TN पावर कंपनी की याचिका पर जांच करने के लिए सहमत हो गया और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया.
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बताते चलें कि तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट रूल्स 2024 के रूल 23 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी. इस नियम के तहत भारत सरकार ने निर्देश दिए थे कि बिजली वितरण कंपनियां बिल में सब्सिडी तभी देंगी, जब राज्य उनको पहले ही पैसा दे दे. अगर सरकार पहले ही सब्सिडी ट्रांसफर नहीं करती तो बिजली कंपनियां सब्सिडी वाले बिल नहीं बनाएं.
वीडियो: ‘फ्री की रेवड़ी कब तक…’ सरकार से सुप्रीम कोर्ट के गंभीर सवाल?

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