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"समझ नहीं आता शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं", सुप्रीम कोर्ट ने ये क्या कहा?

Physical Relations Before Marriage: एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने यह टिप्पणी की. आरोपी पर इल्जाम है कि उसने शादीशुदा होते हुए शादी का झूठा वादा करके एक युवती के साथ रेप किया.

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16 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:49 PM IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का सुझाव दिया. (PTI)
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"हम पुराने ख्यालात के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं." शादी का झूठा वादा करके रेप करने के आरोपी की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. सोमवार, 16 फरवरी को सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इसलिए शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच के सामने एक ऐसा मामला आया, जिसमें आरोप है कि पहले से शादीशुदा एक शख्स ने 30 साल की युवती को शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए. इसके बाद शख्स ने एक अन्य महिला से दूसरी शादी भी कर ली.

पीड़ित ने बताया कि 2022 में वो एक मैट्रिमोनियल साइट पर आरोपी के संपर्क में आई. पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने शादी का वादा करके उसके साथ दिल्ली और फिर दुबई में कई बार शारीरिक संबंध बनाए. युवती ने दावा किया कि आरोपी के जोर देने पर वो दुबई गई थी.

पीड़िता ने आरोप लगाया कि दुबई में आरोपी ने शादी के नाम पर फिजिकल रिलेशन बनाए. यह भी इल्जाम लगाया कि आरोपी ने पीड़िता की मर्जी के बिना उसके अंतरंग वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिए और विरोध करने पर उन्हें वायरल करने की धमकी दी.

जब युवती ने आरोपी के खिलाफ शिकायत की, तो बाद में पता चला कि आरोपी ने 19 जनवरी 2024 को पंजाब में दूसरी शादी कर ली थी. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की जमानत याचिका सुनते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा,

"शायद हम पुराने ख्यालों वाले हैं, लेकिन शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं. उनके रिश्ते में चाहे जो भी अच्छा-बुरा हो. हम यह नहीं समझ पाते कि वे शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप में कैसे शामिल हो सकते हैं. शायद हम पुराने ख्यालों वाले हैं... आपको बहुत सावधान रहना चाहिए, शादी से पहले किसी पर भी विश्वास नहीं करना चाहिए."

जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ऐसे केस ट्रायल और सजा के लिए सही नहीं हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि संबंधित पक्ष को मध्यस्थता (Mediation) के लिए भेजा जाए. उन्होंने कहा,

"अगर वे (पीड़िता) इस बारे में इतनी सख्त थीं तो उन्हें शादी से पहले नहीं जाना चाहिए था. हम उन्हें मध्यस्थता के लिए भेजेंगे. ये ऐसे केस नहीं हैं जिनमें सहमति से रिलेशनशिप पर ट्रायल और सजा हो."

सेटलमेंट की संभावना तलाशने के लिए इस केस को बुधवार, 18 फरवरी को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. इससे पहले आरोपी की जमानत याचिका सेशन कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट से खारिज हो चुकी है. इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दाखिल की.

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