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कौन हैं पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल, 900 करोड़ के घोटाले में 55 दिन बाद हुए अरेस्ट

Jal Jeevan Mission Scam: पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि PHED में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रहते हुए उन्होंने दो निजी फर्मों को कई टेंडर दिलाए. जबकि इन दोनों कंपनियों की पहले से कई शिकायतें मिल रही थीं. अब उन्हें ACB की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है.

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सुप्रिया
| शुभम कुमार
10 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 10 अप्रैल 2026, 12:18 PM IST)
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जल जीवन मिशन में घोटाले के आरोप में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल गिरफ्तार. (फोटो-लिंकडिन)
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केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना में घोटाले के आरोप में फरार चल रहे पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को 09 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया. ये गिरफ्तारी एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB की टीम ने की है. ACB ने सुबोध अग्रवाल को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया. फिर उन्हें राजस्थान लेकर गई. राजस्थान इसलिए क्योंकि जयपुर की एक अदालत ने पूर्व IAS के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि साल 2024 की शुरुआत से जल जीवन मिशन घोटाले की जांच चल रही थी. पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने जल जीवन मिशन की टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताएं बरतीं. सुबोध पर आरोप है कि PHED यानी पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी रहते हुए उन्होंने दो निजी फर्मों को कई टेंडर दिलाए. जबकि इन दोनों कंपनियों की पहले से कई शिकायतें मिल रही थीं. 

क्या गड़बड़ की गई?

दोनों फर्मों के खिलाफ सबसे पहले शिकायत हुई कि इन्होंने इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर PHED से 960 करोड़ के टेंडर ले लिए. आरोप है कि इसकी जानकारी अधिकारियों को होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई थी. वहीं 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के टेंडर में औचक निरीक्षण करना था, लेकिन अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया. इस पूरे मामले में पद का दुरुपयोग किया गया है.

जांच के बाद एक अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी करते हुए भगोड़ा घोषित कर दिया था. बताया जा रहा है कि 9 अप्रैल की दोपहर 12 बजे दिल्ली से एक वकील ने ई-मेल के जरिए ACB को 'सरेंडर' करने की सूचना दी थी. ईमेल में कहा गया था कि सुबोध जांच में सहयोग करेंगे. और इसी के कुछ घंटे बाद सुबोध अग्रवाल को ACB ने दिल्ली में पब्लिक प्लेस से गिरफ्तार कर लिया. फिलहाल इस मामले में अब तक सुबोध अग्रवाल समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जबकि 3 फरार आरोपियों की तलाश अब भी जारी है. 

इस केस का घटनाक्रम कुछ ऐसा रहा. इसी साल के 17 फरवरी को ACB की टीम ने सुबोध अग्रवाल पर छापा मारा. 18 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हुआ था. 19 फरवरी को सुबोध अग्रवाल ने ACB की FIR को रद्द करने की याचिका कोर्ट में लगाई. 21 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के वकील ने खुद को केस से हटाया. 9 अप्रैल को दिल्ली से सुबोध को गिरफ्तार किया गया.

कौन हैं सुबोध अग्रवाल?

सुबोध अग्रवाल उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. 1988 बैच के सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के सबसे सीनियर IAS में गिने जाते थे. 35 साल से ज्यादा के करियर में 40 अलग-अलग पदों पर काम किया. सुबोध अग्रवाल पर जब घोटाले के आरोप लगे थे तब राजस्थान फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन थे. दिसंबर 2025 में वो रिटायर होने वाले थे. उन्होंने अन्नपूर्णा भंडार योजना शुरू की, जिसमें फेयर प्राइस शॉप्स पर मल्टी-ब्रांड प्रोडक्ट्स सस्ते दामों पर मिलते हैं. NITI आयोग ने तारीफ की और दूसरे राज्य कॉपी कर रहे हैं. नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम लेकर आए. उन्होंने मेडिकल एजुकेशन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रहते हुए 7 नए मेडिकल कॉलेज और एक स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट बनवाया.

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