The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Subhash Kashyap constitutional expert ex loksabha general secretary passes away

अब कौन 'पढ़ाएगा' भारत का संविधान, डॉ. सुभाष कश्यप का निधन

प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप का निधन हो गया है. डॉ. कश्यप को संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं, राजनीतिक सुधारों और पंचायती राज का विशेषज्ञ माना जाता था. वे भारत सरकार के पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार, संविधान की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य और उसके ड्राफ्टिंग और एडिटोरियल कमिटी के चेयरमैन रहे हैं.

Advertisement
pic
4 जून 2026 (पब्लिश्ड: 05:12 PM IST)
Subhash kashyap loksabha constitution cpr
प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का निधन हो गया है. (इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी कश्यप का निधन हो गया है. कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट की वजह से 97 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली. डॉ. सुभाष कश्यप को भारतीय संविधान की संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक सुधारों से जुड़े विषयों का प्रकांड विद्वान माना जाता रहा है.

सुभाष कश्यप का निधन

डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई, 1929 को उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में हुआ था. उन्होंने किशोरावस्था में आजादी के लिए बिजनौर-मेरठ में स्थानीय स्तर पर छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व किया था. डॉ. कश्यप ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ाी करने के बाद एक पत्रकार के तौर पर अपना करियर शुरू किया. इसके बाद वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में शिक्षक रहे और फिर हाई कोर्ट में वकालत की भी ट्रेनिंग ली.

साल 1953 में सुभाष कश्यप लोकसभा सचिवालय से जुड़े. 31 दिसंबर, 1983 से 1990 तक वे 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव रहे. साल 1990 में उन्होंने इस पद से वॉलियंटरी रिटायरमेंट ले ली. डॉ. कश्यप साल 1983 तक जिनेवा में इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) के इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन के प्रमुख भी रहे. इस पद तक पहुंचने वाले वे पहले भारतीय थे. इसके अलावा उन्होंने 1965-66 में वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी कांग्रेसनल फेलो के तौर पर काम किया है.

कई संस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं

डॉ. सुभाष कश्यप को संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं, राजनीतिक सुधारों और पंचायती राज का विशेषज्ञ माना जाता था. वे भारत सरकार के पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार, संविधान की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य और उसके ड्राफ्टिंग और एडिटोरियल कमिटी के चेयरमैन रहे हैं. हाल में रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में  वन नेशन, वन इलेक्शन की संभावनाओं पर विचार करने के लिए गठित हाई लेवल कमेटी के प्रमुख सदस्यों में भी उनका नाम शामिल था. इसके अलावा डॉ. कश्यप भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (NBA) के अध्यक्ष भी रहे हैं. वे फिलहाल नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) में मानद रिसर्च प्रोफेसर के तौर पर जुड़े थे.

कई सम्मानों को सम्मानित कर चुके हैं डॉ. कश्यप

डॉ.सुभाष कश्यप को संविधान और संसदीय परंपरा को मजबूत करने के लिए पद्म भूषण समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार मिल चुके हैं. कानून और राजनीति विज्ञान में उनके काम के लिए 2 बार मोतीलाल नेहरू पुरस्कार और 'पार्लियामेंट्री प्रोसीजर प्रैक्टिस, प्रेसिडेंट्स एंड प्रिविलेज' नाम के रिसर्च के लिए जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप मिली थी. उनको सैन फ्रांसिस्को, साउ पाउलो, ब्राजील की एकेडमी ऑफ ऑनरेरी ऑर्डर की डिग्री से सम्मानित किया जा चुका है.

100 से ज्यादा किताबें लिखी हैं

सुभाष कश्यप ने 100 से ज्यादा किताबें और 500 से ज्यादा रिसर्च आर्टिकल लिखे हैं. संविधान और राजनीति पर लिखी गई उनकी किताबों को कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं. उनकी प्रमुख किताबों में तीन खंडों में प्रकाशित 'भारत का संवैधानिक कानून' इस विषय पर सबसे महत्वपूर्ण किताबों में गिनी जाती है.   इसके अलावा उन्होंने भारतीय संसद के इतिहास पर आधारित छह खंडों का ग्रंथ भी तैयार किया है.

डॉ. कश्यप की सबसे लोकप्रिय पुस्तकों में 'आवर पॉलिटिकल सिस्टम' और 'आवर कॉन्स्टिट्यूशन'शामिल है. इन किताबों की लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं. ये नेशनल बुक ट्रस्ट की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों में शामिल हैं.

उनकी अन्य चर्चित किताबों में 'स्टेट ऑफ द नेशन : डेमोक्रेसी, गवर्नेंस एंड पार्लियामेंट', 'वी, द पीपल एंड आवर कॉन्स्टिट्यूशन' और 'इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन : कॉन्फ्लिक्ट्स एंड कंट्रोवर्सीज' शामिल है.

वीडियो: मुस्लिम छात्रा का किस्सा बताया, सुप्रीम कोर्ट जस्टिस उज्जल भुयान ने संविधान पर क्या सीख दी?

Advertisement

Advertisement

()