फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, एक दिन पहले ही जानलेवा हमले में बचे
Farooq Abdullah साल 2002 से लेकर 2011 तक JKCA के अध्यक्ष थे. CBI का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर 43 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई. इसी मामले की सुनवाई के दौरान श्रीनगर की एक कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया.

श्रीनगर की एक कोर्ट ने 12 मार्च को फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे CBI ने अब्दुल्ला समेत कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट जारी की है. इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनको वारंट जारी किया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीनगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट तबस्सुम ने अब्दुल्ला के खिलाफ व्यक्तिगत (शारीरिक तौर पर) या फिर ऑनलाइन माध्यम से पेश नहीं होने पर वारंट जारी किया. कोर्ट ने व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मांगने वाली उनकी अर्जी भी खारिज कर दी.
मजिस्ट्रेट ने इस मामले में एक और आरोपी मंजूर गजनफर अली की व्यक्तिगत पेशी से छूट वाली याचिका भी खारिज कर दी और उनके खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया. श्रीनगर कोर्ट ने कहा कि यदि अगली सुनवाई में कोई भी आरोपी कोर्ट के सामने पेश नहीं होगा तो उचित आदेश जारी किए जाएंगे. इस मामले में अगली सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है.
CBI इस मामले की जांच कर रही है. कुछ दिन पहले ईडी ने भी कोर्ट से JKCA घोटाले के मामले में फारूक अब्दुल्ला और दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप जोड़ने की मांग की थी. लेकिन कोर्ट ने कहा कि ईडी को ऐसे मामले में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता जिस मामले में पहले ही CBI जांच करके चार्जशीट फाइल कर चुकी है.
श्रीनगर कोर्ट के ऑब्जर्वेशन के मुताबिक, प्रथम दृष्टया फारूक अब्दुल्ला समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ गड़बड़ी के सबूत मौजूद हैं. सभी आरोपियों के खिलाफ रणबीर दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश),धारा 406 (आपाराधिक विश्वासघात) और धारा 409 के तहत अपराध के सबूत मिलने के बाद कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए सुनवाई की तारीख तय की.
जम्मू कश्मीर में महाराजा रणबीर सिंह के समय साल 1932 में रणबीर दंड संहिता लागू की गई थी. यह संहिता अनुच्छेद 370 के तहत भारत के दूसरे हिस्सों में लागू होने वाले भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह काम करती थी. साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद इसे भारतीय दंड संहिता से बदल दिया गया है. यह केस साल 2019 से पहले का है.
यह मामला जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के भीतर कथित तौर पर फंड के दुरुपयोग से जुड़ा है. साल 2018 में CBI ने फारूक अब्दुल्ला समेत कई और लोगों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से दिए गए डोनेशन से लगभग 43 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए चार्जशीट फाइल की थी.
फारूक अब्दुल्ला साल 2002 से लेकर 2011 तक JKCA के अध्यक्ष थे. CBI का आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर 43 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई. चार्जशीट में जम्मू कश्मीर बैंक के पूर्व महासचिव मोहम्मद सलीम खान, पूर्व कोषाध्यक्ष अहसान अहमद मिर्जा और जम्मू कश्मीर बैंक के एग्जीक्यूटिव बशीर अहमद मिसगर को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है.
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