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इंदौर जैसी आफत राजधानी भोपाल में आई तो कौन बचाएगा? SCADA का एक चरण तक पूरा नहीं

साल 2017 के आसपास मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जब स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा था, तब ऐसी व्यवस्था लाने की कोशिश की गई थी कि लोगों को पीने के लिए जो पानी पहुंचाया जाता है, उसकी सुरक्षा मजबूत रहे. यानी पाइपलाइन में लीकेज हो तो तत्काल पता चल जाए. ताकि उससे तुरंत अलर्ट होकर सिस्टम को दुरुस्त किया जा सके.

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Bhopal SCADA indore
भोपाल में 10 साल पहले आया था वाटर सप्लाई की सुरक्षा वाला सिस्टम (india today)
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राघवेंद्र शुक्ला
2 जनवरी 2026 (Published: 10:23 PM IST)
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गंदा पानी बड़ा स्वास्थ्य संकट न बन जाए, इसके लिए भोपाल में 8-9 साल पहले ही एक शानदार निगरानी सिस्टम लाया गया था. इसे SCADA यानी सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन कहा गया. यह सिस्टम न सिर्फ पानी की क्वालिटी की रियल टाइम जांच करता, बल्कि लीकेज की पहचान कर तुरंत उसका अलर्ट भी देता. इस सिस्टम को जल आपूर्ति में एक मजबूत ‘सुरक्षा कवच’ बताया गया. लेकिन एक दशक पूरा हो जाने के बाद भी इसका काम पूरा नहीं हो पाया है. अब इंदौर की आपदा देखकर यही लगता है कि भोपाल की सुरक्षा ‘राम भरोसे’ ही है.

आपको पता होगा कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा जल आपूर्ति की मेन पाइपलाइन में लीकेज से उसमें सीवर का पानी चला गया था. इस पानी को पीने से लोग बीमार पड़े. अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है. ये सब उस शहर में हुआ, जिसे भारत के सबसे साफ शहरों में गिना जाता है. ऐसा नहीं है कि पाइपलाइन के लीकेज को रोका नहीं जा सकता था या इससे सतर्क नहीं हुआ जा सकता था. 

साल 2017 के आसपास मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जब स्मार्ट सिटी बनाया जा रहा था, तब ऐसी व्यवस्था लाने की कोशिश की गई थी कि लोगों को पीने के लिए जो पानी पहुंचाया जाता है, उसकी सुरक्षा मजबूत रहे. यानी पाइपलाइन में लीकेज हो तो तत्काल पता चल जाए. ताकि उससे तुरंत अलर्ट होकर सिस्टम को दुरुस्त किया जा सके.

स्काडा (SCADA) में वो कुव्वत थी, जो इसके मकसद को पूरा कर सकता था. ये एक ऑटोमेशन सिस्टम है, जिसमें वॉटर सप्लाई पाइपलाइन के पूरे नेटवर्क की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होती है. इससे कहीं भी लीकेज होती है या अन्य किसी दिक्कत से पानी अटकता है या पानी का दबाव कम होता है तो उसकी तुरंत जानकारी मिल जाती है. 

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल नगर निगम (BMC) के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल के 173 में से 162 ओवरहेड टैंक SCADA से जुड़े हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट का पहला चरण ही अब तक अधूरा है. जब ये प्रोजेक्ट आया था तब इसे काफी क्रांतिकारी बताया गया था. पानी का बहाव, दबाव, बिजली खपत और पानी की क्वालिटी की निगरानी, गड़बड़ी होने पर तुरंत अलर्ट, पानी की बर्बादी कम करना और पहले से ही सिस्टम की खराबियों को पहचानना, ये सब इस सिस्टम का काम था. लेकिन हकीकत में ये सारे वादे सिर्फ कागजी साबित हुए.

और ये सब तब है जब भोपाल के वॉटर सिस्टम में बड़ी खामियां मौजूद हैं. इसका एक उदाहरण 2023 में दिखा था, जब ‘ईदगाह हिल्स जल शोधन संयंत्र’ में क्लोरीन गैस लीक हो गई थी. इस हादसे ने साफ कर दिया कि भोपाल में ‘रियल-टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग’ और मौका रहते हादसों को काबू करने वाले सिस्टम मौजूद नहीं हैं. जबकि इन्हीं सबके लिए SCADA सिस्टम लाया जा रहा था.

दैनिक भास्कर की 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्काडा सिस्टम इंदौर में एक्टिव है. इसकी मदद से करोड़ों लीटर पानी को लीकेज में बर्बाद होने से बचाया जाता है. हालांकि इस सिस्टम के होने के बावजूद शहर में बड़ी आपदा देखने को मिली है जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है.

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