यूपी-बंगाल समेत 12 राज्यों में SIR की डेडलाइन बढ़ी, अब इस डेट को आएगी फाइनल लिस्ट
देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया की समय सीमा एक हफ्ते बढ़ा दी गई है. निर्वाचन आयोग के मुताबिक अब गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 4 दिसंबर के बजाय 11 दिसंबर होगी.
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election commission of india) ने 12 राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया की डेडलाइन एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है. आयोग ने बताया है कि अब फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी, 2026 को आएगी. नए शेड्यूल के अनुसार, गणना फॉर्म (Enumeration) जमा करने की आखिरी तारीख 4 दिसंबर की बजाय 11 दिसंबर होगी. वोटर्स लिस्ट का ड्राफ्ट 9 दिसंबर की बजाय 16 दिसंबर को पब्लिश किया जाएगा. दावों और आपत्तियों के लिए यानी वोटर्स लिस्ट में योग्य वोटरों के नाम दर्ज कराने या अयोग्य वोटरों के नाम कटवाने के लिए आवेदन करने की मियाद 16 दिसंबर से 15 जनवरी तक होगी.
नोटिस चरण यानी नोटिस जारी करने, सुनवाई करने या जांच करने की अवधि 16 दिसंबर से 7 फरवरी तक होगी. Enumeration Forms पर फैसला, दावों और आपत्तियों के निपटारे का सारा काम जिला मतदाता निबंधन अधिकारी (ERO) इसी अवधि में करेंगे. यहां से निराश होने के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील की जा सकेगी. सारा मामला 16 दिसंबर से 7 फरवरी के बीच निपटाया जाएगा.
ड्राफ्ट वोटर्स लिस्ट 16 दिसंबर को प्रकाशित होगी, जो पहले 9 दिसंबर को जारी होनी थी. सारे मामले निपटाने के बाद वोटर्स लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा.
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इन 12 राज्यों में हो रहा SIRये सारे निर्देश उन सभी 12 राज्यों पर लागू होंगे, जहां SIR की प्रक्रिया चल रही है. इनमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (UT), छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप (UT), मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल शामिल हैं.
SIR की तारीखें बढ़ाने का फैसला निर्वाचन आयोग ने तमाम पॉलिटिकल पार्टियों की ओर से अपील के बाद लिया है. शिकायत की गई थी कि देश भर में कई जगहों पर बूथ लेवल ऑफिसर्स की कमी है. ऐसे में समय से काम पूरा करना मुश्किल हो रहा है. इन सबको देखते हुए आयोग ने SIR की समयसीमा 7 दिन बढ़ा दी है.

बता दें कि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन वोटर्स लिस्ट को सुधारने के लिए चुनाव आयोग की ओर से कराई जा रही प्रैक्टिस है. इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स जोड़े जाते हैं. जिनकी मौत हो गई है, उनके नाम हटाए जाते हैं. इसके अलावा किसी के पते में गलतियां हों या नाम गलत छप गया हो. ये सब सुधार किया जाता है. बिहार चुनाव से पहले वहां भी SIR की प्रक्रिया पूरी गई थी. यहां तकरीबन 47 लाख नाम, वोटर्स लिस्ट से काटे गए थे.
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